आरेख पर टैप करें, एक इलेक्ट्रॉन जुड़ेगा
ऑफबाऊ सिद्धांत: अगला इलेक्ट्रॉन सबसे कम ऊर्जा वाले खाली उपकोश में जाता है। कौन-सा कम ऊर्जा का है, यह (n + l) नियम बताता है।
नियंत्रण
तैयार उदाहरण (परमाणु और आयन)
दृश्य
मापन
- परमाणु या आयन
- Feआयरन
- भरे गए इलेक्ट्रॉन
- 0 / 26e⁻
- पूरा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
- —
- उत्कृष्ट गैस से संक्षिप्त रूप
- —
- कोशों में वितरण (K, L, M, N)
- सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन
- 0
- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन
- 0
- आवर्त · वर्ग · ब्लॉक
- 4 · 8 · d
- अभी
- + 1s
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- पहले बस देखें: आयरन (Fe) के 26 इलेक्ट्रॉन एक-एक करके कक्षक बॉक्स में आ रहे हैं, और नीचे लिखा आता है कि हर इलेक्ट्रॉन कौन-सा नियम मान रहा है।
- Z स्लाइडर से 1 से 36 तक कोई भी तत्व चुनें, या तैयार उदाहरण Na, Cl, K, Cr, Fe, Cu और आयन Na⁺, Cl⁻, Fe²⁺, Fe³⁺ पर टैप करें।
- दृश्य बदलकर “ऊर्जा की सीढ़ी” चुनें: 4s की सीढ़ी 3d से नीचे है, इसीलिए 4s पहले भरता है।
- रोककर आरेख पर टैप करें: हर टैप पर एक इलेक्ट्रॉन जुड़ेगा, ताकि आप कॉपी में साथ-साथ विन्यास लिख सकें।
- मापन पैनल में पूरा विन्यास, उत्कृष्ट गैस वाला संक्षिप्त रूप, K L M N कोश, अयुग्मित इलेक्ट्रॉन और आवर्त-वर्ग-ब्लॉक मिलाकर देखें।
बस की सीट, हॉस्टल का कमरा और इलेक्ट्रॉन का पता
बस में चढ़ते ही लोग क्या करते हैं? सबसे अच्छी खाली सीट ढूँढते हैं। अगर दो वाली सीट पर कोई बैठा है, तो नया यात्री आमतौर पर किसी दूसरी खाली जोड़ी में अकेले बैठना पसंद करता है, और तभी किसी के साथ बैठता है जब कोई खाली जोड़ी न बचे। परमाणु के अंदर इलेक्ट्रॉन भी लगभग ऐसे ही जगह लेते हैं।
अब एक हॉस्टल सोचिए। हर मंज़िल एक कोश है, हर मंज़िल के विंग उपकोश हैं और हर कमरा एक कक्षक है। एक कमरे में ज़्यादा से ज़्यादा दो लोग रह सकते हैं, और अगर दो रहें तो एक का सिर उत्तर की ओर और दूसरे का दक्षिण की ओर। सीढ़ियाँ कोई नहीं चढ़ना चाहता, इसलिए पहले नीचे की मंज़िल भरती है। कौन कहाँ रहता है, यह लिखना ही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है।
इतनी मेहनत क्यों? क्योंकि किसी तत्व का लगभग हर गुण इसी व्यवस्था से तय होता है: सोडियम पानी में क्यों भभक उठता है, नियॉन किसी से अभिक्रिया क्यों नहीं करता, लोहा चुंबक से क्यों चिपकता है। खासकर सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन ही तय करते हैं कि परमाणु कितने बंध बनाएगा और आवर्त सारणी में कहाँ बैठेगा।
शुरू से: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किसे कहते हैं
परमाणु के बीच में नाभिक होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं। इसके चारों ओर ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन घूमते हैं। उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों के बराबर, यानी परमाणु क्रमांक Z के बराबर होती है। आयरन का Z = 26 है, तो उदासीन आयरन परमाणु में 26 इलेक्ट्रॉन हैं।
ये इलेक्ट्रॉन बेतरतीब नहीं घूमते। हर इलेक्ट्रॉन की एक निश्चित ऊर्जा होती है और उसी के अनुसार वह एक निश्चित स्तर में रहता है। किसी परमाणु के इलेक्ट्रॉनों का विभिन्न कोशों, उपकोशों और कक्षकों में वितरण उस परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कहलाता है।
इसे दो तरह से लिखा जाता है। कक्षा 9 में हम केवल कोश के आधार पर लिखते हैं, जैसे सोडियम: 2, 8, 1, यानी K कोश में 2, L में 8 और M में 1 इलेक्ट्रॉन। कक्षा 11 में उपकोश के आधार पर लिखते हैं: 1s² 2s² 2p⁶ 3s¹। यहाँ 3s¹ का अर्थ है तीसरे कोश के s उपकोश में एक इलेक्ट्रॉन।
लिखने का ढंग याद रखें: पहले संख्या (कोश n), फिर अक्षर (उपकोश s, p, d या f), और ऊपर छोटे अंक में इलेक्ट्रॉनों की संख्या। सभी ऊपर वाले अंकों का योग कुल इलेक्ट्रॉनों के बराबर होना चाहिए। हर उत्तर के अंत में यह योग जाँचना इस अध्याय की सबसे अच्छी आदत है।
मुख्य कोश K, L, M, N और 2n² नियम
नाभिक से बाहर की ओर मुख्य कोशों के नाम K, L, M, N हैं और इनकी मुख्य क्वांटम संख्या n = 1, 2, 3, 4 है। जितना बाहर, उतनी अधिक ऊर्जा और उतना बड़ा कोश। नाभिक के सबसे पास वाले K कोश के इलेक्ट्रॉन सबसे मज़बूती से बँधे होते हैं।
किसी कोश में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं, यह बोर-बरी का 2n² नियम बताता है। n = 3 (M कोश) के लिए 18, और n = 4 (N कोश) के लिए 32। कारण सरल है: n-वें कोश में n² कक्षक होते हैं और हर कक्षक में दो इलेक्ट्रॉन।
पर ध्यान दें: 2n² अधिकतम सीमा है, हर बार कोश भरेगा ही, ऐसा नहीं। पोटैशियम (Z = 19) का विन्यास 2, 8, 8, 1 है। M कोश में 18 की जगह होने पर भी 8 होते ही अगला इलेक्ट्रॉन N कोश में चला जाता है। इसका कारण उपकोशों का ऊर्जा क्रम है, जो नीचे ऑफबाऊ सिद्धांत में समझेंगे। कक्षा 9 का नियम याद रखें: सबसे बाहरी कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं होते।
n-वें कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n²K = 2, L = 8, M = 18, N = 32
n-वें कोश में कक्षकों की संख्या = n²
| n | कोश | कक्षक (n²) | अधिकतम इलेक्ट्रॉन (2n²) | उपकोश |
|---|---|---|---|---|
| 1 | K | 1 | 2 | 1s |
| 2 | L | 4 | 8 | 2s, 2p |
| 3 | M | 9 | 18 | 3s, 3p, 3d |
| 4 | N | 16 | 32 | 4s, 4p, 4d, 4f |
उपकोश s, p, d, f और कक्षक
हर मुख्य कोश छोटे भागों में बँटा होता है, जिन्हें उपकोश कहते हैं: s, p, d, f। n-वें कोश में ठीक n उपकोश होते हैं: K में केवल 1s, L में 2s और 2p, M में 3s, 3p, 3d, और N में 4s, 4p, 4d, 4f।
उपकोश के अंदर कक्षक होते हैं। कक्षक नाभिक के चारों ओर वह त्रिविमीय क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता सबसे अधिक होती है। यह बोर मॉडल की तरह कोई निश्चित वृत्ताकार पथ (कक्षा) नहीं, बल्कि बादल जैसा क्षेत्र है। s कक्षक गोलाकार, p कक्षक डंबल जैसे, और अधिकांश d कक्षक चार पंखुड़ियों वाले फूल जैसे होते हैं।
s उपकोश में 1 कक्षक, p में 3, d में 5 और f में 7। हर कक्षक में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन, इसलिए s में 2, p में 6, d में 10 और f में 14 इलेक्ट्रॉन आते हैं। सिमुलेशन का हर छोटा बॉक्स एक कक्षक है, इसीलिए 3d के पाँच बॉक्स दिखते हैं।
उपकोश में कक्षक = 2l + 1l = 0, 1, 2, 3 के लिए s, p, d, f
उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2(2l + 1)
| l | उपकोश | कक्षक (2l + 1) | अधिकतम इलेक्ट्रॉन |
|---|---|---|---|
| 0 | s | 1 | 2 |
| 1 | p | 3 | 6 |
| 2 | d | 5 | 10 |
| 3 | f | 7 | 14 |
चार क्वांटम संख्याएँ, आसान भाषा में
एक इलेक्ट्रॉन का पूरा पता लिखने के लिए चार संख्याएँ चाहिए, जैसे चिट्ठी के पते में राज्य, शहर, गली और मकान नंबर। इन्हें क्वांटम संख्याएँ कहते हैं। NCERT कक्षा 11 के “परमाणु की संरचना” अध्याय में ये विस्तार से हैं।
मुख्य क्वांटम संख्या n बताती है कि इलेक्ट्रॉन किस कोश में है (n = 1, 2, 3 …)। दिगंशी क्वांटम संख्या l बताती है कि किस उपकोश में (l = 0 से n − 1; 0 यानी s, 1 यानी p, 2 यानी d, 3 यानी f)। चुंबकीय क्वांटम संख्या mₗ बताती है कि उपकोश के किस कक्षक में (−l से +l तक, कुल 2l + 1 मान)। चक्रण क्वांटम संख्या mₛ बताती है कि इलेक्ट्रॉन किस दिशा में घूम रहा है (+½ या −½)।
इस अध्याय का सारा हिसाब इन्हीं चार से निकलता है। n = 2 के लिए l = 0 या 1, यानी 2s और 2p। l = 1 के लिए mₗ = −1, 0, +1, यानी तीन p कक्षक। हर एक में चक्रण +½ और −½, इसलिए p में 6 इलेक्ट्रॉन।
l = 0, 1, 2, …, (n − 1)
mₗ = −l, …, 0, …, +lकुल 2l + 1 मान
mₛ = +½ या −½
ऑफबाऊ सिद्धांत और (n + l) नियम
ऑफबाऊ एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ है “निर्माण करना”। ऑफबाऊ सिद्धांत कहता है: इलेक्ट्रॉन पहले सबसे कम ऊर्जा वाले कक्षक में जाते हैं, और वह भरने के बाद ही अधिक ऊर्जा वाले कक्षक में। जैसे घड़े में पानी डालने पर पहले तली भरती है।
पर कैसे पता चले कि किस उपकोश की ऊर्जा कम है? इसके लिए (n + l) नियम है। हर उपकोश के n और l जोड़ें। जिसका (n + l) कम, उसकी ऊर्जा कम, वह पहले भरता है। अगर दो उपकोशों का (n + l) बराबर हो, तो जिसका n कम है वह पहले भरता है।
इस नियम का सबसे प्रसिद्ध नतीजा है: पहले 4s, फिर 3d। 4s के लिए n + l = 4 और 3d के लिए n + l = 5। इसलिए कोश संख्या बड़ी होने पर भी 4s की ऊर्जा 3d से कम है। 3d और 4p दोनों का n + l = 5 है, पर 3d का n छोटा है, इसलिए पहले 3d, फिर 4p।
याद रखने का सबसे आसान तरीका विकर्ण आरेख है: 1s; 2s 2p; 3s 3p 3d; 4s 4p 4d 4f; इस तरह पंक्तियाँ लिखें और ऊपर दाएँ से नीचे बाएँ तिरछे तीर खींचें। तीर जिस क्रम में उपकोशों से गुज़रते हैं, वही भरने का क्रम है। सिमुलेशन में यही आरेख कक्षक बॉक्स के दाईं ओर बना है।
1s < 2s < 2p < 3s < 3p < 4s < 3d < 4p < 5s …ऊर्जा का क्रम = भरने का क्रम
| क्रम | उपकोश | n | l | n + l | क्षमता |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 1s | 1 | 0 | 1 | 2 |
| 2 | 2s | 2 | 0 | 2 | 2 |
| 3 | 2p | 2 | 1 | 3 | 6 |
| 4 | 3s | 3 | 0 | 3 | 2 |
| 5 | 3p | 3 | 1 | 4 | 6 |
| 6 | 4s | 4 | 0 | 4 | 2 |
| 7 | 3d | 3 | 2 | 5 | 10 |
| 8 | 4p | 4 | 1 | 5 | 6 |
पाउली अपवर्जन सिद्धांत: एक कमरे में दो, उलटी दिशा में
वुल्फगैंग पाउली ने कहा: एक परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ समान नहीं हो सकतीं। कम से कम एक में अंतर होना ही चाहिए।
इसका सीधा नतीजा: एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं, और उनके चक्रण विपरीत होने चाहिए। एक ही कक्षक में n, l, mₗ तीनों पहले से समान हैं, इसलिए अंतर का एकमात्र तरीका चक्रण है: एक +½ (↑), दूसरा −½ (↓)। तीसरे इलेक्ट्रॉन के लिए कोई चक्रण बचता ही नहीं।
सिमुलेशन में देखें: किसी बॉक्स में कभी दो ↑ साथ नहीं आते, और किसी बॉक्स में तीन तीर कभी नहीं जाते। जैसे ही किसी बॉक्स में दूसरा इलेक्ट्रॉन आता है, नीचे पाउली सिद्धांत लिखा आ जाता है।
हुंड का नियम: पहले अकेले, फिर जोड़ी में
एक ही उपकोश के कक्षकों की ऊर्जा बराबर होती है, जैसे तीनों 2p कक्षक। नया इलेक्ट्रॉन कहाँ जाएगा? हुंड का अधिकतम बहुलता का नियम कहता है: समान ऊर्जा वाले कक्षकों में इलेक्ट्रॉन पहले एक-एक करके समान चक्रण के साथ भरते हैं। जब हर कक्षक में एक इलेक्ट्रॉन आ जाता है, तभी युग्मन शुरू होता है।
कारण है प्रतिकर्षण। सभी इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित हैं और एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं। अलग-अलग कक्षकों में रहने से वे दूर रहते हैं, ऊर्जा कम होती है और परमाणु अधिक स्थायी होता है।
नाइट्रोजन लीजिए: 1s² 2s² 2p³। इसके तीनों 2p इलेक्ट्रॉन तीन अलग कक्षकों में अकेले बैठते हैं (↑ ↑ ↑), इसलिए नाइट्रोजन में 3 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। ऑक्सीजन में चौथा 2p इलेक्ट्रॉन पहले कक्षक में जोड़ी बनाता है (↑↓ ↑ ↑), और 2 अयुग्मित बचते हैं। सिमुलेशन में नारंगी तीर अयुग्मित और रंगीन तीर युग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
अपवाद: क्रोमियम और कॉपर अलग क्यों हैं
ऑफबाऊ क्रम को आँख मूँदकर मानें तो क्रोमियम (Z = 24) का विन्यास [Ar] 3d⁴ 4s² होना चाहिए। पर वास्तव में यह [Ar] 3d⁵ 4s¹ है: 4s का एक इलेक्ट्रॉन 3d में चला जाता है। इसी तरह कॉपर (Z = 29) का अपेक्षित [Ar] 3d⁹ 4s², पर वास्तविक [Ar] 3d¹⁰ 4s¹ है।
कारण है अर्धपूरित (d⁵) और पूर्णपूरित (d¹⁰) उपकोशों का अतिरिक्त स्थायित्व। NCERT इसके दो कारण बताती है: सममिति, यानी आवेश का नाभिक के चारों ओर समान फैलाव; और विनिमय ऊर्जा, यानी समान चक्रण वाले इलेक्ट्रॉन आपस में जगह बदल सकते हैं जिससे ऊर्जा निकलती है। जितने अधिक समान चक्रण वाले जोड़े, उतनी अधिक विनिमय ऊर्जा।
4s और 3d की ऊर्जा में अंतर बहुत कम है, इसलिए एक इलेक्ट्रॉन खिसकाकर अर्धपूरित या पूर्णपूरित d उपकोश मिल जाए, तो परमाणु ऐसा ही करता है। क्रोमियम में इससे अयुग्मित इलेक्ट्रॉन 4 से बढ़कर 6 हो जाते हैं। कॉपर में केवल 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन बचता है, 4s में।
सिमुलेशन में Cr या Cu चुनें। सारे इलेक्ट्रॉन भरने के बाद एक लाल तीर 4s से कूदकर 3d में जाता दिखेगा। Z = 1 से 36 तक केवल यही दो अपवाद हैं, इसलिए CBSE से लेकर JEE तक ये बार-बार पूछे जाते हैं।
आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: पहले 4s खाली होता है
परमाणु इलेक्ट्रॉन खोए तो धनायन बनता है, इलेक्ट्रॉन ग्रहण करे तो ऋणायन। आयन का विन्यास लिखने के लिए पहले उदासीन परमाणु का विन्यास लिखें, फिर इलेक्ट्रॉन हटाएँ या जोड़ें।
Na⁺ में 10 इलेक्ट्रॉन हैं: 1s² 2s² 2p⁶, यानी [Ne], नियॉन जैसा स्थायी अष्टक। Cl⁻ में 18 इलेक्ट्रॉन हैं: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶, यानी [Ar], आर्गन जैसा।
संक्रमण तत्वों के लिए एक ज़रूरी नियम: धनायन बनते समय इलेक्ट्रॉन पहले सबसे बाहरी कोश से, यानी 4s से निकलते हैं, फिर 3d से। 4s पहले भरता है और पहले ही खाली भी होता है। इसलिए Fe²⁺ = [Ar] 3d⁶ और Fe³⁺ = [Ar] 3d⁵। गलती से 3d से हटाकर [Ar] 3d⁴ 4s² न लिखें।
ऐसा क्यों? इलेक्ट्रॉन भरते समय 4s की ऊर्जा कम होती है, पर 3d में इलेक्ट्रॉन आने के बाद 3d की ऊर्जा घटकर 4s से नीचे आ जाती है। तब 4s (n = 4) सबसे बाहरी, नाभिक से सबसे दूर होता है, इसलिए उसके इलेक्ट्रॉन सबसे आसानी से निकलते हैं।
विन्यास से आवर्त सारणी में स्थान
विन्यास पता हो तो आवर्त सारणी रटे बिना भी तत्व का स्थान निकाला जा सकता है। NCERT कक्षा 11 के “तत्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता” अध्याय की यही सबसे काम की ट्रिक है।
आवर्त = सबसे बड़ी कोश संख्या (अधिकतम n)। अंतिम इलेक्ट्रॉन जिस उपकोश में जाता है, तत्व उसी ब्लॉक का है: s, p, d या f। वर्ग (1–18): s-ब्लॉक में वर्ग = बाहरी s इलेक्ट्रॉन; p-ब्लॉक में वर्ग = 10 + बाहरी s और p इलेक्ट्रॉन (यानी 12 + p इलेक्ट्रॉन); d-ब्लॉक में वर्ग = बाहरी s इलेक्ट्रॉन + (n − 1)d इलेक्ट्रॉन।
उदाहरण: क्लोरीन का विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁵। अधिकतम n = 3, इसलिए आवर्त 3। अंतिम इलेक्ट्रॉन 3p में, इसलिए p-ब्लॉक, वर्ग 17। आयरन में अधिकतम n = 4, अंतिम इलेक्ट्रॉन 3d में, इसलिए d-ब्लॉक, वर्ग = 2 + 6 = 8।
संयोजकता इलेक्ट्रॉन सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन हैं, यही बंध बनाने में भाग लेते हैं। संयोजकता सामान्यतः: बाहरी इलेक्ट्रॉन 1 से 4 हों तो वही संख्या, 5 से 7 हों तो 8 में से वह संख्या घटाकर। इसलिए सोडियम और क्लोरीन की संयोजकता 1, ऑक्सीजन की 2, नाइट्रोजन की 3। बाहरी कोश में 8 (हीलियम में 2) इलेक्ट्रॉन हों तो तत्व उत्कृष्ट गैस है।
अर्धपूरित और पूर्णपूरित उपकोशों का स्थायित्व आवर्त सारणी में भी दिखता है। नाइट्रोजन का 2p³ अर्धपूरित है, इसलिए नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी पड़ोसी ऑक्सीजन से भी अधिक है। उत्कृष्ट गैसों के सभी उपकोश भरे हैं, इसलिए वे लगभग अभिक्रिया नहीं करतीं।
शब्दावली एक नज़र में
इस अध्याय के सारे शब्द एक तालिका में। परीक्षा से पहली रात बस इसे पढ़ लेना भी बहुत काम आएगा।
| शब्द | आसान अर्थ |
|---|---|
| कोश (ऊर्जा स्तर) | नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों का मुख्य स्तर: K, L, M, N (n = 1, 2, 3, 4) |
| उपकोश | कोश के अंदर का छोटा भाग: s, p, d, f |
| कक्षक | वह त्रिविमीय क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता सबसे अधिक; अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन |
| ऑफबाऊ सिद्धांत | इलेक्ट्रॉन पहले कम ऊर्जा वाले, फिर अधिक ऊर्जा वाले कक्षक में जाते हैं |
| (n + l) नियम | कम n + l वाला पहले भरता है; बराबर हो तो कम n वाला पहले |
| पाउली अपवर्जन सिद्धांत | एक परमाणु में दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ समान नहीं हो सकतीं |
| हुंड का नियम | समान ऊर्जा वाले कक्षकों में पहले एक-एक, समान चक्रण के साथ; फिर युग्मन |
| अयुग्मित इलेक्ट्रॉन | कक्षक में अकेला इलेक्ट्रॉन |
| संयोजकता इलेक्ट्रॉन | सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन, जो बंध में भाग लेते हैं |
| तलस्थ अवस्था | परमाणु की सबसे कम ऊर्जा वाली, सामान्य व्यवस्था |
| संक्रमण तत्व | जिनका d उपकोश आंशिक रूप से भरा हो, जैसे Fe, Cr, Cu |
सिमुलेशन में खुद करके देखें
ये प्रयोग एक-एक करके करें। हर बार पहले उत्तर का अनुमान कॉपी में लिखें, फिर सिमुलेशन से मिलाएँ।
प्रयोग 1: हुंड का नियम अपनी आँखों से
Z को 5 से 10 तक ले जाएँ और हर बार भरना पूरा होने तक देखें। बोरॉन से नाइट्रोजन तक 2p के तीनों बॉक्स में एक-एक ↑ आता है, युग्मन ऑक्सीजन से शुरू होता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन 1, 2, 3 होकर फिर 2, 1, 0 हो जाते हैं। यही उतार-चढ़ाव हुंड का नियम है।
प्रयोग 2: पहले 4s या 3d
Z = 18 (आर्गन) से 19 (पोटैशियम) करें, फिर “ऊर्जा की सीढ़ी” चालू करें। 19वाँ इलेक्ट्रॉन 3d में नहीं, 4s में जाता है, क्योंकि सीढ़ी में 4s नीचे है। फिर Z = 21 (स्कैंडियम) करें: तब जाकर पहला 3d इलेक्ट्रॉन आता है।
प्रयोग 3: क्रोमियम की छलाँग
Cr पर टैप करें और अंत तक देखें। 24 इलेक्ट्रॉन भरने के बाद एक इलेक्ट्रॉन 4s से 3d में छलाँग लगाता है। छलाँग से पहले और बाद में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का मान मिलाएँ। यही Cu के साथ करें और 3d को पूरा भरते देखें।
प्रयोग 4: आयन बनाना
Fe²⁺ और फिर Fe³⁺ चुनें। आयरन के 26 इलेक्ट्रॉन भरने के बाद लाल तीर इलेक्ट्रॉनों को निकलते दिखाते हैं: पहले दो 4s से, तीसरा 3d से। Fe³⁺ में अर्धपूरित 3d⁵ और 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, इसी कारण यह अधिक स्थायी आयन है।
प्रयोग 5: उत्कृष्ट गैसें खोजें
Z धीरे-धीरे बढ़ाएँ और देखें कि किन Z पर “सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन” 8 (हीलियम में 2) होते हैं। आपको Z = 2, 10, 18 और 36 मिलेंगे: He, Ne, Ar, Kr। संक्षिप्त रूप में कोष्ठक [He], [Ne], [Ar], [Kr] में यही लिखे जाते हैं।
हल किए गए प्रश्न
हर उत्तर सिमुलेशन में भी मिलाया जा सकता है। पहला प्रश्न सिमुलेशन के शुरुआती तत्व आयरन पर है।
प्रश्न 1: आयरन (Z = 26) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
हल: ऑफबाऊ क्रम में 26 इलेक्ट्रॉन भरें: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s² 3d⁶। कोश के क्रम में: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d⁶ 4s²। संक्षेप में: [Ar] 3d⁶ 4s²।
कोशों में: 2, 8, 14, 2। 3d⁶ में पाँच इलेक्ट्रॉन पहले पाँचों कक्षकों में अकेले बैठते हैं और छठा जोड़ी बनाता है, इसलिए 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन। आवर्त 4, वर्ग 8, d-ब्लॉक।
प्रश्न 2: क्लोरीन (Z = 17) और क्लोराइड आयन
हल: Cl = 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁵, संक्षेप में [Ne] 3s² 3p⁵। कोशों में 2, 8, 7, इसलिए बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन, संयोजकता 8 − 7 = 1। आवर्त 3, वर्ग 17।
क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन लेकर Cl⁻ बनती है: 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ = [Ar]। बाहरी अष्टक पूरा हो गया।
प्रश्न 3: सोडियम (Z = 11) और Na⁺
हल: Na = 1s² 2s² 2p⁶ 3s¹ = [Ne] 3s¹; कोशों में 2, 8, 1। बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन, संयोजकता 1, आवर्त 3, वर्ग 1।
3s¹ इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ बनता है: 1s² 2s² 2p⁶ = [Ne], कोशों में 2, 8। केवल एक इलेक्ट्रॉन खोकर सोडियम नियॉन जैसा स्थायी हो जाता है, इसीलिए सोडियम इतना क्रियाशील है।
प्रश्न 4: क्रोमियम (Z = 24) का विन्यास और अयुग्मित इलेक्ट्रॉन
हल: ऑफबाऊ के अनुसार अपेक्षित [Ar] 3d⁴ 4s², जिसमें 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन। पर अर्धपूरित 3d⁵ अधिक स्थायी है, इसलिए वास्तविक विन्यास [Ar] 3d⁵ 4s¹।
अब 3d के पाँच कक्षकों में पाँच अकेले इलेक्ट्रॉन और 4s में एक: कुल 6 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन। वर्ग = 1 + 5 = 6।
प्रश्न 5: कॉपर (Z = 29) का विन्यास
हल: अपेक्षित [Ar] 3d⁹ 4s², पर पूर्णपूरित 3d¹⁰ अधिक स्थायी है, इसलिए वास्तविक [Ar] 3d¹⁰ 4s¹। कोशों में 2, 8, 18, 1।
अयुग्मित इलेक्ट्रॉन: 1 (4s में)। वर्ग = 1 + 10 = 11। Cu⁺ में वह 4s इलेक्ट्रॉन निकल जाता है और [Ar] 3d¹⁰ बचता है, पूरा भरा हुआ।
प्रश्न 6: Fe²⁺ और Fe³⁺ में कौन अधिक स्थायी है
हल: Fe²⁺ में 24 इलेक्ट्रॉन। पहले 4s के दो निकलते हैं: [Ar] 3d⁶, 4 अयुग्मित। Fe³⁺ में 23 इलेक्ट्रॉन, एक और 3d से निकलता है: [Ar] 3d⁵, 5 अयुग्मित।
Fe³⁺ का 3d⁵ अर्धपूरित है, इसलिए यह अधिक स्थायी है। इसीलिए फेरस (Fe²⁺) लवण हवा में धीरे-धीरे फेरिक (Fe³⁺) में ऑक्सीकृत हो जाते हैं। केवल-चक्रण चुंबकीय आघूर्ण μ = √(n(n + 2)) BM से: Fe²⁺ के लिए 4.90 BM और Fe³⁺ के लिए 5.92 BM। यह प्रश्न JEE और NEET में बहुत आता है।
μ = √(n(n + 2)) BMn = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या
प्रश्न 7: पोटैशियम का 19वाँ इलेक्ट्रॉन कहाँ जाएगा
हल: आर्गन तक 3p भर चुका है। अब सामने 4s (n + l = 4) और 3d (n + l = 5) हैं। 4s का मान कम है, इसलिए इलेक्ट्रॉन 4s में जाता है। K = 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s¹, कोशों में 2, 8, 8, 1।
प्रश्न 8: 16 इलेक्ट्रॉन वाला तत्व कौन-सा है
हल: 16 इलेक्ट्रॉन ऑफबाऊ क्रम में भरने पर 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁴, कोशों में 2, 8, 6। Z = 16, यानी तत्व सल्फर (S) है।
अधिकतम n = 3, इसलिए आवर्त 3; अंतिम इलेक्ट्रॉन 3p में, इसलिए वर्ग 16। 3p⁴ में 2 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन, संयोजकता 2।
प्रश्न 9: M और N कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन
हल: 2n² से n = 3 के लिए 18 और n = 4 के लिए 32। कक्षकों की संख्या n² = 9 और 16।
पहले 36 तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
नीचे की हर पंक्ति उसी गणना से बनी है जो सिमुलेशन चलाता है। Cr (24) और Cu (29) के अपवाद ध्यान से देखें। संक्षिप्त रूप NCERT की तरह कोश के क्रम में है, यानी 3d पहले, 4s बाद में।
| Z | तत्व | विन्यास (संक्षिप्त) | K, L, M, N |
|---|---|---|---|
| 1 | H (हाइड्रोजन) | 1s¹ | 1 |
| 2 | He (हीलियम) | 1s² | 2 |
| 3 | Li (लीथियम) | [He] 2s¹ | 2, 1 |
| 4 | Be (बेरिलियम) | [He] 2s² | 2, 2 |
| 5 | B (बोरॉन) | [He] 2s² 2p¹ | 2, 3 |
| 6 | C (कार्बन) | [He] 2s² 2p² | 2, 4 |
| 7 | N (नाइट्रोजन) | [He] 2s² 2p³ | 2, 5 |
| 8 | O (ऑक्सीजन) | [He] 2s² 2p⁴ | 2, 6 |
| 9 | F (फ्लुओरीन) | [He] 2s² 2p⁵ | 2, 7 |
| 10 | Ne (नियॉन) | [He] 2s² 2p⁶ | 2, 8 |
| 11 | Na (सोडियम) | [Ne] 3s¹ | 2, 8, 1 |
| 12 | Mg (मैग्नीशियम) | [Ne] 3s² | 2, 8, 2 |
| 13 | Al (ऐलुमिनियम) | [Ne] 3s² 3p¹ | 2, 8, 3 |
| 14 | Si (सिलिकॉन) | [Ne] 3s² 3p² | 2, 8, 4 |
| 15 | P (फॉस्फोरस) | [Ne] 3s² 3p³ | 2, 8, 5 |
| 16 | S (सल्फर) | [Ne] 3s² 3p⁴ | 2, 8, 6 |
| 17 | Cl (क्लोरीन) | [Ne] 3s² 3p⁵ | 2, 8, 7 |
| 18 | Ar (आर्गन) | [Ne] 3s² 3p⁶ | 2, 8, 8 |
| 19 | K (पोटैशियम) | [Ar] 4s¹ | 2, 8, 8, 1 |
| 20 | Ca (कैल्सियम) | [Ar] 4s² | 2, 8, 8, 2 |
| 21 | Sc (स्कैंडियम) | [Ar] 3d¹ 4s² | 2, 8, 9, 2 |
| 22 | Ti (टाइटेनियम) | [Ar] 3d² 4s² | 2, 8, 10, 2 |
| 23 | V (वैनेडियम) | [Ar] 3d³ 4s² | 2, 8, 11, 2 |
| 24 | Cr (क्रोमियम) | [Ar] 3d⁵ 4s¹ | 2, 8, 13, 1 |
| 25 | Mn (मैंगनीज़) | [Ar] 3d⁵ 4s² | 2, 8, 13, 2 |
| 26 | Fe (आयरन) | [Ar] 3d⁶ 4s² | 2, 8, 14, 2 |
| 27 | Co (कोबाल्ट) | [Ar] 3d⁷ 4s² | 2, 8, 15, 2 |
| 28 | Ni (निकेल) | [Ar] 3d⁸ 4s² | 2, 8, 16, 2 |
| 29 | Cu (कॉपर) | [Ar] 3d¹⁰ 4s¹ | 2, 8, 18, 1 |
| 30 | Zn (ज़िंक) | [Ar] 3d¹⁰ 4s² | 2, 8, 18, 2 |
| 31 | Ga (गैलियम) | [Ar] 3d¹⁰ 4s² 4p¹ | 2, 8, 18, 3 |
| 32 | Ge (जर्मेनियम) | [Ar] 3d¹⁰ 4s² 4p² | 2, 8, 18, 4 |
| 33 | As (आर्सेनिक) | [Ar] 3d¹⁰ 4s² 4p³ | 2, 8, 18, 5 |
| 34 | Se (सेलेनियम) | [Ar] 3d¹⁰ 4s² 4p⁴ | 2, 8, 18, 6 |
| 35 | Br (ब्रोमीन) | [Ar] 3d¹⁰ 4s² 4p⁵ | 2, 8, 18, 7 |
| 36 | Kr (क्रिप्टॉन) | [Ar] 3d¹⁰ 4s² 4p⁶ | 2, 8, 18, 8 |
आम गलतियाँ
ये गलतियाँ सबसे ज़्यादा अंक कटवाती हैं। हर एक के साथ सही बात लिखी है।
- पोटैशियम को 2, 8, 9 लिखना। सही है 2, 8, 8, 1, क्योंकि 19वाँ इलेक्ट्रॉन 3d में नहीं, 4s में जाता है।
- Cr को [Ar] 3d⁴ 4s² और Cu को [Ar] 3d⁹ 4s² लिखना। सही हैं 3d⁵ 4s¹ और 3d¹⁰ 4s¹।
- Fe²⁺ के लिए 3d से इलेक्ट्रॉन हटाना। पहले 4s खाली होता है, इसलिए Fe²⁺ = [Ar] 3d⁶।
- हुंड का नियम भूलकर 2p³ को ↑↓ ↑ _ बनाना। सही है ↑ ↑ ↑।
- एक कक्षक में दो ↑ बनाना। पाउली के अनुसार जोड़ी हमेशा ↑↓ होती है।
- ऊपर वाले अंकों का योग न जाँचना। योग Z (आयन में Z − आवेश) होना ही चाहिए।
- कक्षक और उपकोश को मिला देना। 3d एक उपकोश है जिसमें पाँच कक्षक हैं।
- कक्षा (orbit) और कक्षक (orbital) को एक समझना। कक्षक प्रायिकता का बादल है, निश्चित पथ नहीं।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
आतिशबाज़ी के रंग: सोडियम पीली, कॉपर हरी-नीली और स्ट्रॉन्शियम लाल रोशनी देता है। गर्मी से इलेक्ट्रॉन ऊपर के स्तर में कूदते हैं और वापस आते समय किसी खास रंग का प्रकाश छोड़ते हैं। रंग स्तरों के ऊर्जा अंतर पर, यानी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करता है। सड़क के पीले सोडियम लैंप भी इसी कारण पीले हैं।
चुंबक: लोहा, कोबाल्ट और निकेल में कई अयुग्मित d इलेक्ट्रॉन होते हैं। जब उनके चक्रण एक दिशा में सज जाते हैं, तो नन्हे-नन्हे चुंबक मिलकर बड़ा चुंबक बनाते हैं। फ्रिज के चुंबक से लेकर बिजलीघर के जनरेटर तक, हर जगह अयुग्मित इलेक्ट्रॉन काम कर रहे हैं।
खून: हीमोग्लोबिन Fe²⁺ आयन से ऑक्सीजन ढोता है। अगर Fe²⁺ बदलकर Fe³⁺ हो जाए, तो हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन नहीं ढो पाता। Fe³⁺ इतनी आसानी से क्यों बनता है, इसका जवाब 3d⁵ के स्थायित्व में है।
मोबाइल और कंप्यूटर: सिलिकॉन के बाहरी कोश में चार इलेक्ट्रॉन हैं। इसमें थोड़ा फॉस्फोरस (पाँच बाहरी इलेक्ट्रॉन) या बोरॉन (तीन) मिलाने से अर्धचालक बनता है, जिससे हर चिप बनती है। और नियॉन लाइट इसलिए चमकती है क्योंकि नियॉन का भरा हुआ विन्यास उसे अक्रिय रखता है, वह केवल बिजली से उत्तेजित होकर प्रकाश देता है।
परीक्षा कॉर्नर: CBSE, JEE और NEET
CBSE कक्षा 9 में “परमाणु की संरचना” में बोर-बरी योजना (2, 8, 8) आती है, और कक्षा 11 के “परमाणु की संरचना” अध्याय में क्वांटम संख्याएँ, ऑफबाऊ, पाउली, हुंड और अपवाद। कक्षा 12 के “d- एवं f-ब्लॉक के तत्व” में आयनों के विन्यास और चुंबकीय आघूर्ण पर प्रश्न आते हैं। JEE Main और NEET में यह हर साल किसी न किसी रूप में पूछा जाता है।
- CBSE (1–2 अंक): ऑफबाऊ सिद्धांत, पाउली अपवर्जन सिद्धांत या हुंड के नियम की परिभाषा, और किसी तत्व का विन्यास।
- CBSE (3 अंक): “Cr और Cu के विन्यास अपवाद क्यों हैं?” सममिति और विनिमय ऊर्जा दोनों लिखें।
- NEET: “किस आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन सबसे अधिक हैं?” हर आयन का विन्यास लिखकर गिनें; 3d⁵ वाले (Fe³⁺, Mn²⁺) में 5।
- JEE Main: चुंबकीय आघूर्ण √(n(n + 2)) BM से n निकालना, या n से μ। Fe²⁺ के लिए n = 4, Fe³⁺ के लिए n = 5।
- JEE: क्वांटम संख्याओं के सेट में से अमान्य सेट पहचानना। याद रखें l हमेशा n − 1 तक ही जाता है।
- MCQ: “n = 3 में अधिकतम इलेक्ट्रॉन?” 2n² = 18। “l = 2 के लिए कक्षक?” 2l + 1 = 5।
- विन्यास से आवर्त, वर्ग और ब्लॉक निकालना: अधिकतम n, अंतिम इलेक्ट्रॉन का उपकोश, और बाहरी इलेक्ट्रॉन।
एक स्क्रीन में रिवीज़न
परीक्षा से पहले यह सूची पढ़ लें, पूरा अध्याय याद आ जाएगा।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = कोशों, उपकोशों और कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का वितरण।
- कोश K, L, M, N; अधिकतम इलेक्ट्रॉन 2n²; कक्षक n²।
- उपकोश s, p, d, f; कक्षक 1, 3, 5, 7; इलेक्ट्रॉन 2, 6, 10, 14।
- भरने का क्रम: 1s 2s 2p 3s 3p 4s 3d 4p; कम n + l पहले, बराबर हो तो कम n पहले।
- पाउली: एक कक्षक में अधिकतम 2, विपरीत चक्रण के साथ।
- हुंड: पहले एक-एक समान चक्रण में, फिर युग्मन।
- अपवाद: Cr = [Ar] 3d⁵ 4s¹, Cu = [Ar] 3d¹⁰ 4s¹।
- धनायन में पहले 4s खाली, फिर 3d: Fe²⁺ = [Ar] 3d⁶, Fe³⁺ = [Ar] 3d⁵।
- आवर्त = अधिकतम n; ब्लॉक = अंतिम इलेक्ट्रॉन का उपकोश; वर्ग बाहरी इलेक्ट्रॉनों से।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किसे कहते हैं?
किसी परमाणु के इलेक्ट्रॉनों का विभिन्न कोशों, उपकोशों और कक्षकों में वितरण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कहलाता है। इसे ऑफबाऊ सिद्धांत, पाउली अपवर्जन सिद्धांत और हुंड के नियम से लिखा जाता है।
ऑफबाऊ सिद्धांत क्या है?
इलेक्ट्रॉन पहले सबसे कम ऊर्जा वाले कक्षकों में जाते हैं और फिर क्रम से अधिक ऊर्जा वाले कक्षकों में। क्रम है 1s, 2s, 2p, 3s, 3p, 4s, 3d, 4p …
पाउली अपवर्जन सिद्धांत क्या है?
एक परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ समान नहीं हो सकतीं, इसलिए एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन विपरीत चक्रण के साथ होते हैं।
हुंड का नियम क्या है?
समान ऊर्जा वाले कक्षकों में इलेक्ट्रॉन पहले एक-एक करके समान चक्रण के साथ भरते हैं, और सभी में एक-एक आने के बाद ही युग्मन होता है।
3d से पहले 4s क्यों भरता है?
(n + l) नियम से 4s का मान 4 और 3d का 5 है। कम मान यानी कम ऊर्जा, इसलिए 4s पहले भरता है।
क्रोमियम और कॉपर का विन्यास अपवाद क्यों है?
अर्धपूरित और पूर्णपूरित d उपकोश अतिरिक्त स्थायी होते हैं और 4s व 3d की ऊर्जा बहुत पास है। इसलिए Cr = [Ar] 3d⁵ 4s¹ और Cu = [Ar] 3d¹⁰ 4s¹।
आयरन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?
आयरन (Z = 26) का विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s² 3d⁶, संक्षेप में [Ar] 3d⁶ 4s²। कोशों में 2, 8, 14, 2।
Fe²⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?
Fe²⁺ = [Ar] 3d⁶। आयन बनते समय पहले 4s के दो इलेक्ट्रॉन निकलते हैं, 3d के नहीं।
एक कोश में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं?
2n²: K में 2, L में 8, M में 18 और N में 32। पर सबसे बाहरी कोश में सामान्यतः 8 से अधिक नहीं होते।
कक्षा (orbit) और कक्षक (orbital) में क्या अंतर है?
कक्षा बोर मॉडल का निश्चित वृत्ताकार पथ है, जबकि कक्षक वह त्रिविमीय क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता सबसे अधिक होती है। एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन होते हैं।
विन्यास से आवर्त और वर्ग कैसे निकालें?
सबसे बड़ी कोश संख्या आवर्त है। अंतिम इलेक्ट्रॉन का उपकोश ब्लॉक है। s-ब्लॉक में वर्ग = बाहरी s इलेक्ट्रॉन, p-ब्लॉक में 12 + p इलेक्ट्रॉन, d-ब्लॉक में बाहरी s + (n − 1)d इलेक्ट्रॉन।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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