किसी भी गाड़ी को खींचकर उसका वेग तय करो, या स्लाइडर इस्तेमाल करो।
नियंत्रण
मापन
- गाड़ी 1 का अभी वेग
- 4.00m/s
- गाड़ी 2 का अभी वेग
- -1.00m/s
- गाड़ी 1 का अंतिम वेग, v₁′
- -0.50m/s
- गाड़ी 2 का अंतिम वेग, v₂′
- 2.00m/s
- कुल संवेग (पहले)
- 5.00kg·m/s
- कुल संवेग (बाद में)
- 5.00kg·m/s
- कुल गतिज ऊर्जा (पहले)
- 17.50J
- कुल गतिज ऊर्जा (बाद में)
- 6.25J
- नष्ट हुई गतिज ऊर्जा
- 11.25J
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- पहले डिफ़ॉल्ट मान से चलाओ: गाड़ी 1 दाईं ओर, गाड़ी 2 बाईं ओर बढ़ती है, बीच में टकराती है, फिर नए वेग से अलग होती है।
- किसी भी गाड़ी को खींचकर उसका वेग बदलो — संख्या तुरंत बदलेगी, और नीचे के बार-चार्ट में टक्कर का नतीजा चलाने से पहले ही दिख जाएगा।
- e = 0 करो: टक्कर के बाद दोनों गाड़ियाँ एक ही वेग से साथ चलती हैं, गतिज ऊर्जा का बार तेज़ी से गिरता है जबकि संवेग का बार वही ऊँचाई रखता है।
- e = 1 करो: गतिज ऊर्जा के दोनों बार बिल्कुल बराबर ऊँचाई के हो जाते हैं — कोई ऊर्जा नष्ट नहीं होती।
- m₁ या m₂ बदलकर फिर चलाओ: v₁′ और v₂′ कैसे बदलते हैं, यह नीचे के हल किए गए उदाहरणों वाले सूत्र से ही मिलाकर देखो।
कैरम, बिलियर्ड्स और दो रेल डिब्बों का जुड़ना
कैरम में स्ट्राइकर से गोटी पर चोट करो तो स्ट्राइकर खुद धीमा हो जाता है या रुक जाता है, और गोटी उछल जाती है। बिलियर्ड्स में सफ़ेद गेंद रंगीन गेंद से टकराए तो लगभग यही होता है। दोनों में एक ही सवाल उठता है: टक्कर के बाद हर वस्तु का वेग कितना होगा, क्या यह पहले से बताया जा सकता है?
तुमने स्टेशन पर दो रेल डिब्बों को जुड़ते ज़रूर देखा होगा — एक डिब्बा धीरे आकर दूसरे से टकराता है और फिर दोनों एक ही वेग से साथ चलने लगते हैं। यहाँ दोनों वस्तुएँ टक्कर के बाद अलग नहीं होतीं, चिपकी रहती हैं — यह भी एक तरह का संघट्ट है, जिसे अप्रत्यास्थ संघट्ट कहते हैं।
"साफ़ उछलना" और "पूरी तरह चिपक जाना" के बीच अनगिनत संभावनाएँ हैं, और एक ही संख्या — प्रत्यावस्थान गुणांक e — बताती है कि कोई असली संघट्ट इस पूरे दायरे में कहाँ खड़ा है। ऊपर के सिमुलेशन में e की स्लाइडर खिसकाकर यह पूरा दायरा खुद देखा जा सकता है।
शुरुआत से: संवेग और उसका संरक्षण
किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं, p = mv। संवेग एक सदिश राशि है — इसकी दिशा होती है, इसलिए दाईं ओर की गति को धनात्मक मानें तो बाईं ओर की गति ऋणात्मक होगी। कई वस्तुओं का कुल संवेग उनके अलग-अलग संवेगों का सदिश योग होता है।
न्यूटन का तीसरा नियम कहता है कि संघट्ट के दौरान दोनों वस्तुएँ एक-दूसरे पर बराबर और विपरीत बल लगाती हैं, और यह बल बिल्कुल उतने ही समय तक काम करता है। इसलिए एक वस्तु का संवेग जितना बढ़ता है, दूसरी का उतना ही घटता है — कुल संवेग वही रहता है। यही संवेग संरक्षण का नियम है: यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी परिणामी बल न लगे, तो उसका कुल संवेग स्थिर रहता है।
ध्यान दो, इस नियम को संघट्ट के भीतर क्या हुआ यह जानने की ज़रूरत ही नहीं — कितनी विकृति हुई, कितनी ऊष्मा बनी, कुछ भी नहीं। बस संघट्ट से ठीक पहले और ठीक बाद का संवेग मिलाना काफ़ी है। यही बात संवेग संरक्षण के नियम को भौतिकी के सबसे शक्तिशाली औज़ारों में से एक बनाती है।
गतिज ऊर्जा (½mv²) एक अदिश राशि है, और संघट्ट में यह हमेशा संरक्षित नहीं रहती — विरूपण, ऊष्मा और ध्वनि में कुछ ऊर्जा खर्च हो सकती है। कितनी खर्च होगी यह इस पर निर्भर करता है कि संघट्ट कितना "प्रत्यास्थ" है, जिसे प्रत्यावस्थान गुणांक से मापा जाता है।
संघट्ट के ज़रूरी शब्द
सूत्रों से पहले शब्दावली साफ़ कर लें; परीक्षा के परिभाषा-प्रश्न यहीं से आते हैं।
| शब्द | प्रतीक | सरल अर्थ | मात्रक |
|---|---|---|---|
| संवेग | p = mv | द्रव्यमान और वेग का गुणनफल, एक सदिश राशि | kg·m/s |
| संवेग संरक्षण का नियम | — | बाहरी बल न होने पर कुल संवेग स्थिर रहता है | — |
| प्रत्यास्थ संघट्ट | e = 1 | संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं | — |
| अप्रत्यास्थ संघट्ट | e < 1 | संवेग संरक्षित रहता है, पर कुछ गतिज ऊर्जा नष्ट होती है | — |
| पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट | e = 0 | टक्कर के बाद दोनों वस्तुएँ आपस में चिपक जाती हैं | — |
| प्रत्यावस्थान गुणांक | e | टक्कर के बाद दूर जाने की गति और पहले पास आने की गति का अनुपात | — |
| गतिज ऊर्जा | KE = ½mv² | गति के कारण किसी वस्तु में ऊर्जा | जूल (J) |
| प्रतिक्षेप (recoil) | — | विस्फोट या गोली चलने के बाद बचे हिस्से की विपरीत दिशा में गति | — |
प्रत्यावस्थान गुणांक से दोनों सूत्र निकालना
द्रव्यमान m₁, m₂ और प्रारंभिक वेग u₁, u₂ वाली दो गाड़ियाँ टकराकर v₁′, v₂′ वेग से (अलग होकर या साथ चलते हुए) निकलती हैं। दो समीकरण इन्हें पूरी तरह तय कर देते हैं।
पहला है संवेग संरक्षण: m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁′ + m₂v₂′। दूसरा है प्रत्यावस्थान गुणांक की परिभाषा: e = (v₂′ − v₁′) / (u₁ − u₂), यानी टक्कर के बाद दूर जाने की गति, टक्कर से पहले पास आने की गति के e गुने के बराबर। e = 1 का मतलब है ठीक उसी गति से अलग होना (प्रत्यास्थ); e = 0 का मतलब है अलग होने की गति शून्य, यानी साथ चलना।
दोनों समीकरणों को हल करने पर दो सीधे सूत्र मिलते हैं, जो e के 0 से 1 तक किसी भी मान के लिए एक ही बार में काम करते हैं — अलग-अलग स्थिति सोचने की ज़रूरत नहीं। e = 0 रखने पर दोनों सूत्र एक ही जगह मिल जाते हैं, और e = 1 रखने पर क्लासिक प्रत्यास्थ-संघट्ट सूत्र सामने आ जाते हैं।
e = (v₂′ − v₁′) / (u₁ − u₂)प्रत्यावस्थान गुणांक की परिभाषा
v₁′ = [(m₁ − em₂)u₁ + (1+e)m₂u₂] / (m₁ + m₂)दोनों सूत्र e के किसी भी मान पर लागू होते हैं
v₂′ = [(1+e)m₁u₁ + (m₂ − em₁)u₂] / (m₁ + m₂)
e = 0 और e = 1 पर सूत्र क्या कहते हैं
e = 0 रखने पर (m₁ − em₂), m₁ बन जाता है और (m₂ − em₁), m₂ बन जाता है, और दोनों सूत्र v₁′ = v₂′ = (m₁u₁ + m₂u₂)/(m₁ + m₂) पर आ जाते हैं — यानी द्रव्यमान-भारित औसत वेग। यही पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट है: दोनों वस्तुएँ एक ही साझा वेग से साथ चलती हैं।
e = 1 रखने पर सूत्र क्लासिक प्रत्यास्थ-संघट्ट रूप में बदल जाते हैं: v₁′ = [(m₁−m₂)u₁ + 2m₂u₂]/(m₁+m₂), v₂′ = [2m₁u₁ + (m₂−m₁)u₂]/(m₁+m₂)। यहीं दिखता है कि बराबर द्रव्यमान की दो वस्तुओं के प्रत्यास्थ संघट्ट में (एक शुरू में स्थिर हो) वेग बिल्कुल आपस में बदल जाते हैं — नीचे उदाहरण 3 में यही दिखाया गया है।
सिमुलेशन में खुद प्रयोग करो
हर प्रयोग से पहले अनुमान लगाओ, फिर मिलाकर देखो।
- e = 0.5 रखते हुए गाड़ी 2 का द्रव्यमान धीरे-धीरे बढ़ाओ। क्या v₂′ बढ़ता है या घटता है?
- दोनों द्रव्यमान बराबर करो, u₂ = 0 रखो, और e = 1 करो। टक्कर के बाद कौन-सी गाड़ी चलती है?
- e = 0 करके ऐसे वेग चुनो कि कुल संवेग बिल्कुल शून्य हो (बराबर द्रव्यमान, बराबर और विपरीत वेग)। क्या टक्कर के बाद दोनों गाड़ियाँ रुक जाती हैं?
- वही सेटअप रखते हुए e को धीरे-धीरे 0 से 1 तक बढ़ाओ। "बाद" वाला गतिज-ऊर्जा बार कैसे बड़ा होता है?
- गाड़ी 1 को इस तरह खींचो कि वह गाड़ी 2 को कभी पकड़ ही न पाए (धीमी या उल्टी दिशा में)। कौन-सा संदेश दिखता है?
हल किए गए उदाहरण
हर हल में पहले दिया गया, फिर सूत्र, फिर मान रखा गया है — परीक्षा में भी इसी क्रम में लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।
उदाहरण 1: सिमुलेशन की डिफ़ॉल्ट टक्कर
m₁ = 2 kg, u₁ = 4 m/s (दाईं ओर) और m₂ = 3 kg, u₂ = -1 m/s (बाईं ओर), e = 0.50। टक्कर के बाद दोनों गाड़ियों के वेग क्या हैं?
v₁′ = [(m₁ − em₂)u₁ + (1+e)m₂u₂]/(m₁+m₂) = -0.50 m/s। v₂′ = [(1+e)m₁u₁ + (m₂−em₁)u₂]/(m₁+m₂) = 2.00 m/s। जाँच: p_पहले = m₁u₁+m₂u₂ = 5 kg·m/s, और m₁v₁′+m₂v₂′ भी 5 kg·m/s — संवेग मिल गया। गतिज ऊर्जा 17.50 J से घटकर 6.25 J हो गई, यानी 11.25 J नष्ट हुई।
उदाहरण 2: गोली का लकड़ी के गुटके में धँसना (e = 0)
0.01 kg की एक गोली 400 m/s की गति से स्थिर 3.99 kg के लकड़ी के गुटके में धँस जाती है। गोली और गुटका मिलकर किस वेग से चलेंगे?
e = 0 पर v_common = (m_गोली u_गोली + m_गुटका × 0)/(m_गोली + m_गुटका) = (0.01 × 400)/4.00 = 1.00 m/s। गोली का बड़ा वेग पूरे मिले हुए द्रव्यमान में बँट जाता है, इसलिए अंतिम वेग काफ़ी छोटा हो जाता है — यही बैलिस्टिक पेंडुलम का सिद्धांत है।
उदाहरण 3: बराबर द्रव्यमान का प्रत्यास्थ संघट्ट — वेगों की अदला-बदली
दो बराबर द्रव्यमान (2 kg प्रत्येक) की गाड़ियाँ। एक 5 m/s से स्थिर दूसरी से टकराती है (e = 1)। टक्कर के बाद क्या होगा?
e = 1 और m₁ = m₂ रखने पर सूत्र से सीधे मिलता है v₁′ = 0 m/s (रुक जाती है) और v₂′ = 5 m/s (पहली गाड़ी का पूरा वेग ले लेती है)। बराबर द्रव्यमान के प्रत्यास्थ संघट्ट में वेग बिल्कुल आपस में बदल जाते हैं — बिलियर्ड्स में यही दिखता है।
उदाहरण 4: असमान द्रव्यमान का प्रत्यास्थ संघट्ट — हल्की वस्तु लौट आती है
1 kg की एक गेंद 6 m/s से स्थिर 2 kg की गेंद से टकराती है (e = 1)। टक्कर के बाद क्या होगा?
सूत्र से v₁′ = -2 m/s (ऋणात्मक, यानी हल्की गेंद उल्टी दिशा में लौटती है) और v₂′ = 4 m/s मिलता है। गतिज ऊर्जा जाँच: पहले 18 J, बाद में 18 J — दोनों बराबर, जैसा प्रत्यास्थ संघट्ट में होना चाहिए।
उदाहरण 5: पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट में बड़ी गतिज-ऊर्जा हानि
4 kg की एक गाड़ी 3 m/s से और 2 kg की दूसरी गाड़ी विपरीत दिशा में -3 m/s से (एक-दूसरे की ओर) आकर आपस में चिपक जाती हैं (e = 0)। उनका साझा वेग और गतिज-ऊर्जा हानि कितनी है?
v_common = (m₁u₁+m₂u₂)/(m₁+m₂) = 1 m/s। गतिज ऊर्जा पहले 27 J थी, चिपकने के बाद मात्र 3 J रही — यानी 24 J ऊष्मा, ध्वनि और विरूपण में नष्ट हो गई। आमने-सामने से आकर चिपकने वाले संघट्ट में गतिज-ऊर्जा हानि सबसे ज़्यादा होती है, यही उसका उदाहरण है।
उदाहरण 6: मापे गए आँकड़ों से प्रत्यावस्थान गुणांक निकालना
एक प्रयोग में टक्कर से पहले वेग u₁ = 6 m/s, u₂ = 0 m/s थे, और टक्कर के बाद मापे गए वेग v₁′ = 1 m/s, v₂′ = 4 m/s। इस संघट्ट का प्रत्यावस्थान गुणांक कितना है?
e = (v₂′ − v₁′)/(u₁ − u₂) = (4 − 1)/(6 − 0) = 0.50। इस तरह द्रव्यमान जाने बिना ही, केवल वेग मापकर किसी भी असली संघट्ट का e निकाला जा सकता है — प्रयोगशाला में e इसी तरह मापा जाता है।
उदाहरण 7: बंदूक का प्रतिक्षेप (recoil)
5 kg की एक बंदूक से 0.05 kg की एक गोली 200 m/s की गति से चलाई जाती है। बंदूक कितनी गति से पीछे हटेगी?
गोली चलने से पहले कुल संवेग शून्य था, इसलिए बाद में भी शून्य रहना चाहिए: 0 = m_बंदूक v_बंदूक + m_गोली v_गोली। हल करने पर v_बंदूक = −(m_गोली × v_गोली)/m_बंदूक = -2.0 m/s। ऋणात्मक चिह्न बताता है कि बंदूक गोली की विपरीत दिशा में हटती है — यही प्रतिक्षेप है, बिना किसी संघट्ट के संवेग-संरक्षण का एक सीधा उदाहरण।
प्रत्यावस्थान गुणांक बढ़ाने पर गतिज ऊर्जा कैसे लौटती है
सिमुलेशन के डिफ़ॉल्ट सेटअप (m₁ = 2 kg, u₁ = 4 m/s, m₂ = 3 kg, u₂ = -1 m/s) को स्थिर रखते हुए केवल e बदलने पर संवेग हमेशा एक जैसा रहता है, जबकि गतिज ऊर्जा e के साथ लगातार बढ़ती है, e = 1 पर पूरी तरह लौट आती है।
| e | v₁′ | v₂′ | गतिज ऊर्जा (बाद में) | मूल गतिज ऊर्जा का % |
|---|---|---|---|---|
| 0.00 | 1.00 m/s | 1.00 m/s | 2.50 J | 14% |
| 0.25 | 0.25 m/s | 1.50 m/s | 3.44 J | 20% |
| 0.50 | -0.50 m/s | 2.00 m/s | 6.25 J | 36% |
| 0.75 | -1.25 m/s | 2.50 m/s | 10.94 J | 63% |
| 1.00 | -2.00 m/s | 3.00 m/s | 17.50 J | 100% |
ये गलतियाँ सब करते हैं
इन गलतियों से बचने पर संघट्ट के अंकों में नंबर कटने का डर नहीं रहता।
- यह मान लेना कि संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों हमेशा संरक्षित रहते हैं। संवेग हमेशा रहता है; गतिज ऊर्जा केवल e = 1 पर।
- दिशा को नज़रअंदाज़ करके संवेगों को अदिश राशि की तरह जोड़ देना। विपरीत दिशा के वेग को ऋणात्मक न मानने से उत्तर गलत हो जाता है।
- यह सोचना कि "प्रत्यास्थ संघट्ट" का मतलब "ज़ोरदार, तेज़ टक्कर" है। प्रत्यास्थ या अप्रत्यास्थ इस बात पर निर्भर करता है कि गतिज ऊर्जा संरक्षित रही या नहीं, टक्कर कितनी तेज़ दिखी उस पर नहीं।
- यह मान लेना कि e = 0 का मतलब दोनों वेग शून्य हो जाना है। असल में इसका मतलब है दोनों वस्तुएँ किसी साझा (आमतौर पर अशून्य) वेग से साथ चलती हैं।
- सूत्र में द्रव्यमान उलट देना। जिस गाड़ी का अंतिम वेग निकाल रहे हो, सूत्र में सबसे पहले उसी का द्रव्यमान आना चाहिए।
- प्रत्यावस्थान गुणांक की परिभाषा में घटाव का क्रम उलट देना। e = (v₂′ − v₁′)/(u₁ − u₂); क्रम उलटने पर चिह्न बदल जाता है।
- यह मान लेना कि प्रत्यावस्थान गुणांक e, 1 से ज़्यादा या ऋणात्मक हो सकता है। असली संघट्ट में हमेशा 0 ≤ e ≤ 1 होता है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में संवेग संरक्षण
परीक्षा से परे भी संवेग संरक्षण का नियम कई सुरक्षा और इंजीनियरिंग फ़ैसलों की नींव है।
- गाड़ी का क्रम्पल ज़ोन: गाड़ी का अगला हिस्सा जानबूझकर धीरे-धीरे मुड़ता है, ताकि टक्कर का समय बढ़े और यात्रियों पर लगने वाला बल कम हो।
- रॉकेट प्रक्षेपण: रॉकेट गैस को पीछे की ओर फेंककर खुद आगे बढ़ता है — यह भी बंदूक के प्रतिक्षेप जैसा ही संवेग-संरक्षण है।
- बिलियर्ड्स और कैरम: लगभग प्रत्यास्थ संघट्ट, इसीलिए खिलाड़ी वेग और कोण का हिसाब लगाकर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि गेंद या गोटी कहाँ जाएगी।
- सड़क दुर्घटना की जाँच: टायरों के निशान और गाड़ियों की अंतिम स्थिति से संवेग संरक्षण के नियम से टक्कर से पहले की गति का अंदाज़ा लगाया जाता है।
- अंतरिक्ष यानों की डॉकिंग: दो यानों को जोड़ना लगभग पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट जैसा है, इसलिए वेग बहुत सावधानी से मिलाने पड़ते हैं।
- न्यूटन का पालना (Newton's cradle): लगभग प्रत्यास्थ संघट्टों की एक श्रृंखला, जो संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों का संरक्षण एक साथ दिखाती है।
परीक्षा कॉर्नर
CBSE बोर्ड और JEE/NEET दोनों में संवेग संरक्षण और संघट्ट एक स्थायी विषय है: नियम की परिभाषा और व्युत्पत्ति, प्रत्यास्थ व अप्रत्यास्थ संघट्ट के बीच अंतर पर वैचारिक प्रश्न, और प्रत्यावस्थान सूत्रों पर आधारित संख्यात्मक प्रश्न — तीनों आम हैं। JEE/NEET में अक्सर द्वि-आयामी (oblique) संघट्ट भी पूछे जाते हैं, इसलिए यहाँ की एक-आयामी नींव मज़बूत होना ज़रूरी है।
एक सामान्य परीक्षा-प्रकार का प्रश्न
स्थिति: 2 kg की एक गाड़ी 4 m/s से और 3 kg की एक गाड़ी विपरीत दिशा से 1 m/s से आकर टकराती हैं। टक्कर के बाद दोनों गाड़ियाँ v₁′ = -0.50 m/s और v₂′ = 2.00 m/s से चलती पाई गईं।
सामान्य प्रश्न: (क) संवेग संरक्षण का नियम लिखो। (ख) प्रत्यावस्थान गुणांक की परिभाषा दो। (ग) इस संघट्ट का प्रत्यावस्थान गुणांक निकालो। (घ) टिप्पणी करो कि यह संघट्ट प्रत्यास्थ है, अप्रत्यास्थ है, या पूर्णतः अप्रत्यास्थ है।
(ग) और (घ) का उत्तर: e = (v₂′−v₁′)/(u₁−u₂) में मान रखने पर e = 0.50 मिलता है, जो 0 और 1 के बीच है — इसलिए यह संघट्ट अप्रत्यास्थ है पर पूर्णतः अप्रत्यास्थ नहीं; कुछ गतिज ऊर्जा नष्ट होती है, पर गाड़ियाँ साथ नहीं चलतीं।
रिवीज़न: एक स्क्रीन का सारांश
परीक्षा से एक रात पहले बस यह सूची और ऊपर की सारणी देख लेना काफ़ी है।
- संवेग p = mv एक सदिश राशि है। बाहरी बल न हो तो कुल संवेग हमेशा संरक्षित रहता है।
- प्रत्यावस्थान गुणांक e = (v₂′−v₁′)/(u₁−u₂); e = 1 प्रत्यास्थ है, e = 0 पूर्णतः अप्रत्यास्थ है।
- सामान्य सूत्र: v₁′ = [(m₁−em₂)u₁+(1+e)m₂u₂]/(m₁+m₂), v₂′ = [(1+e)m₁u₁+(m₂−em₁)u₂]/(m₁+m₂)।
- e = 0 पर v₁′ = v₂′ = (m₁u₁+m₂u₂)/(m₁+m₂); e = 1 पर गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है।
- बराबर द्रव्यमान के प्रत्यास्थ संघट्ट में (एक शुरू में स्थिर) वेग पूरी तरह आपस में बदल जाते हैं।
- गतिज ऊर्जा केवल प्रत्यास्थ संघट्ट में संरक्षित रहती है; अप्रत्यास्थ संघट्ट में कुछ ऊष्मा-ध्वनि में नष्ट होती है, e = 0 पर सबसे ज़्यादा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संवेग संरक्षण का नियम क्या कहता है?
यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी परिणामी बल न लगे, तो किसी भी संघट्ट या अंतःक्रिया से पहले और बाद में उसका कुल संवेग बिल्कुल एक जैसा रहता है।
प्रत्यास्थ और अप्रत्यास्थ संघट्ट में क्या अंतर है?
प्रत्यास्थ संघट्ट (e = 1) में संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहते हैं। अप्रत्यास्थ संघट्ट (e < 1) में संवेग तो संरक्षित रहता है, पर कुछ गतिज ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि या विरूपण में नष्ट हो जाती है।
प्रत्यावस्थान गुणांक (coefficient of restitution) किसे कहते हैं?
संघट्ट के बाद दो वस्तुओं के दूर जाने की आपेक्षिक गति और संघट्ट से पहले पास आने की आपेक्षिक गति के अनुपात को प्रत्यावस्थान गुणांक e कहते हैं, e = (v₂′−v₁′)/(u₁−u₂)।
पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट (e = 0) में क्या होता है?
टक्कर के बाद दोनों वस्तुएँ अलग नहीं होतीं, एक ही साझा वेग से साथ चलती हैं: v₁′ = v₂′ = (m₁u₁+m₂u₂)/(m₁+m₂)। यहीं गतिज-ऊर्जा हानि सबसे ज़्यादा होती है।
सिमुलेशन की डिफ़ॉल्ट टक्कर (m₁ = 2 kg, u₁ = 4 m/s, m₂ = 3 kg, u₂ = -1 m/s, e = 0.50) में अंतिम वेग क्या हैं?
सूत्र में रखने पर v₁′ = -0.50 m/s और v₂′ = 2.00 m/s मिलता है। संवेग पहले और बाद दोनों में 5 kg·m/s रहता है, जबकि गतिज ऊर्जा 17.50 J से घटकर 6.25 J हो जाती है।
बराबर द्रव्यमान की दो वस्तुओं के प्रत्यास्थ संघट्ट में क्या होता है?
यदि एक शुरू में स्थिर हो, तो चलती हुई वस्तु पूरी तरह रुक जाती है और स्थिर वस्तु पहली वाली के पूरे वेग से चलने लगती है — वेग बिल्कुल आपस में बदल जाते हैं। बिलियर्ड्स में यही दिखता है।
क्या केवल वेग से, द्रव्यमान जाने बिना, प्रत्यावस्थान गुणांक e निकाला जा सकता है?
हाँ। टक्कर से पहले और बाद के वेग मापकर सीधे e = (v₂′−v₁′)/(u₁−u₂) सूत्र में रखने पर e मिल जाता है, द्रव्यमान जानने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
अप्रत्यास्थ संघट्ट में नष्ट हुई गतिज ऊर्जा कहाँ जाती है?
यह नष्ट नहीं होती — संवेग की तरह, कुल ऊर्जा भी संरक्षित रहती है। गति से "खोई" गतिज ऊर्जा ऊष्मा, ध्वनि और टकराने वाली वस्तुओं के स्थायी विरूपण में बदल जाती है।
क्या बंदूक का प्रतिक्षेप (recoil) संवेग संरक्षण का उदाहरण है?
हाँ। गोली चलने से पहले कुल संवेग शून्य था, इसलिए बाद में भी शून्य रहना चाहिए — इसीलिए गोली आगे जाने पर बंदूक को पीछे हटना ही पड़ता है, ताकि कुल संवेग शून्य बना रहे।
इस विषय पर और पढ़ाई
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परमाणु की संरचना
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अम्ल, क्षारक और pH मान
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गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT
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समसूत्री कोशिका विभाजन
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प्रकाश संश्लेषण
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डीएनए प्रतिकृति
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नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
जीव विज्ञान
अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)
जीव विज्ञान
पाचन तंत्र
गणित
पाइथागोरस प्रमेय
गणित
त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त
गणित
द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़
गणित
वृत्त के प्रमेय
गणित
ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
गणित
प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
गणित
समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
गणित






















