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द्विघात समीकरण: a, b, c बदलें और परवलय को हिलते देखें

जिस समीकरण में चर की सबसे बड़ी घात 2 हो, वह द्विघात समीकरण है: ax² + bx + c = 0, a ≠ 0। इसके मूल x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2a हैं। विविक्तकर D = b² − 4ac धनात्मक हो तो दो, शून्य हो तो बराबर, ऋणात्मक हो तो कोई वास्तविक मूल नहीं। ग्राफ़ परवलय है।

शीर्ष को खींचकर खिसकाएँ

ग्राफ़मूल (x-अक्ष पर प्रतिच्छेद)सममिति अक्षशीर्षy-अंतःखंड

पूर्ण वर्ग बनाना: मानक रूप से शीर्ष रूप

  1. 1. शुरुआती फलनy = x² − 2x − 3
गति

नियंत्रण

समीकरण का रूप

1.0
-2.0
-3.0

मापन

शीर्ष (h, k)
(1, −4)
सममिति अक्ष
x = 1
विविक्तकर, D = b² − 4ac
16
मूलों की प्रकृति
दो भिन्न वास्तविक मूल
द्विघाती सूत्र से मूल
x = (2 ± √16) / 2 = 3, −1
y-अंतःखंड
(0, −3)
परवलय का मुख
ऊपर की ओर (a > 0)
मूलों का योग, −b/a
2
मूलों का गुणनफल, c/a
−3
चलता बिंदु (x, y)
(0, −3)

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. पहले कुछ न छुएँ, बस देखें: स्क्रीन पर y = x² − 2x − 3 है। परवलय x-अक्ष को −1 और 3 पर काटता है; ये दो हरे बिंदु ही मूल हैं।
  2. a का स्लाइडर शून्य से नीचे ले जाएँ: परवलय पलटकर नीचे की ओर खुलने लगता है। a को ठीक 0 करें तो ग्राफ़ सीधी रेखा बन जाता है।
  3. c बढ़ाकर पूरे परवलय को ऊपर उठाएँ और मापन में विविक्तकर D देखें: x-अक्ष को छूते ही D = 0, और ऊपर निकल जाने पर D ऋणात्मक, यानी कोई वास्तविक मूल नहीं।
  4. नारंगी शीर्ष को उँगली या माउस से खींचें, या “शीर्ष रूप” चुनकर h और k स्लाइडर से खिसकाएँ। सममिति अक्ष भी साथ चलता है।
  5. “पूर्ण वर्ग बनाना चरण-दर-चरण दिखाएँ” चालू रखें: ग्राफ़ के नीचे आपकी ही संख्याओं से पाँच चरण एक-एक करके आते हैं, आखिरी चरण शीर्ष रूप है।
  6. “गुणनखंड रूप” चुनकर α और β सीधे सेट करें, फिर मापन में मूलों का योग −b/a और गुणनफल c/a मिलाकर देखें।

गेंद उछालो, फव्वारा देखो: हर जगह एक ही वक्र

मैदान में खड़े होकर एक गेंद ऊपर और थोड़ा आगे उछालिए। गेंद ऊपर जाते-जाते धीमी होती है, सबसे ऊँचे बिंदु पर पल भर रुकती है, फिर नीचे आ जाती है। उसका रास्ता बनाएँ तो एक उल्टे U जैसा सुंदर वक्र मिलता है। गणित में इसे परवलय कहते हैं, और इसके पीछे का समीकरण द्विघात समीकरण है।

पार्क के फव्वारे की धार, छत पर लगी डिश एंटीना, टॉर्च के अंदर का दर्पण, कुछ पुलों का मेहराब: ये सब एक ही परिवार के सदस्य हैं। सब y = ax² + bx + c जैसे एक नियम को मानते हैं।

दुकानदार भी बिना जाने यह गणित इस्तेमाल करते हैं। दाम बहुत कम रखें तो मुनाफ़ा कम, बहुत ज़्यादा रखें तो ग्राहक नहीं आते, मुनाफ़ा फिर कम। बीच में कहीं एक दाम है जहाँ मुनाफ़ा सबसे ज़्यादा है। मुनाफ़ा बनाम दाम का ग्राफ़ नीचे की ओर खुलने वाला परवलय है, और सबसे अच्छा दाम उसका शीर्ष है।

इस पेज पर आप ऊपर के सिमुलेशन में a, b, c बदलकर खुद देखेंगे कि परवलय कैसे हिलता है, कब x-अक्ष को दो जगह काटता है, कब सिर्फ़ छूता है और कब बिल्कुल नहीं छूता। फिर NCERT कक्षा 10 के अध्याय “द्विघात समीकरण” के तरीकों से समीकरण हल करना सीखेंगे और बोर्ड परीक्षा जैसे कई प्रश्न हल करेंगे।

बिल्कुल शुरू से: द्विघात समीकरण किसे कहते हैं

“घात” का मतलब है कि चर खुद से कितनी बार गुणा हुआ है। x की घात 1, x² की घात 2, x³ की घात 3। जिस समीकरण में चर की सबसे बड़ी घात 2 हो, उसे द्विघात समीकरण कहते हैं। “द्वि” यानी दो। जैसे x² − 5x + 6 = 0 एक द्विघात समीकरण है।

एक चर वाले द्विघात समीकरण का मानक रूप ax² + bx + c = 0 है। यहाँ a, x² का गुणांक है, b, x का गुणांक है और c अचर पद है। a, b, c वास्तविक संख्याएँ हैं, और एक शर्त बहुत ज़रूरी है: a ≠ 0। क्योंकि a = 0 होते ही x² पद गायब हो जाता है और समीकरण bx + c = 0 यानी रैखिक समीकरण बन जाता है।

b या c शून्य हो सकते हैं, इसमें कोई दिक्कत नहीं। x² − 9 = 0 (यहाँ b = 0) और x² − 4x = 0 (यहाँ c = 0) दोनों द्विघात समीकरण हैं। सिर्फ़ a शून्य नहीं हो सकता। सिमुलेशन में a को 0 करें तो परवलय सीधी रेखा बन जाता है और ऊपर लिखा आता है कि अब यह द्विघात नहीं रहा।

समीकरण और फलन का फ़र्क भी समझ लें। ax² + bx + c = 0 एक समीकरण है: यह पूछता है “x के किन मानों पर बायाँ पक्ष शून्य होता है?” वहीं y = ax² + bx + c एक फलन है: हर x के लिए एक y देता है। NCERT के अध्याय “बहुपद” में इसे द्विघात बहुपद कहा गया है, और इसके ग्राफ़ (परवलय) के x-अक्ष को काटने वाले बिंदुओं के x-निर्देशांक बहुपद के शून्यक कहलाते हैं। यही शून्यक समीकरण के मूल हैं।

मूल या हल वह संख्या है जिसे x की जगह रखने पर समीकरण सत्य हो जाए। किसी द्विघात समीकरण के अधिकतम दो मूल होते हैं। कभी दो अलग मूल, कभी दो बराबर मूल, और कभी कोई वास्तविक मूल नहीं। कौन-सी स्थिति है, यह विविक्तकर बताता है, जो आप थोड़ी देर में सीखेंगे।

ज़रूरी शब्द एक जगह

परिभाषा वाले प्रश्न सीधे इन्हीं शब्दों से आते हैं, इसलिए तालिका ध्यान से देख लें।

पदप्रतीकअर्थ
द्विघात समीकरणax² + bx + c = 0चर की सबसे बड़ी घात 2, और a ≠ 0
गुणांकa, bx² और x के साथ गुणा होने वाली संख्याएँ
अचर पदcजिस पद में कोई चर नहीं
मूल (हल)α, βवे मान जिनसे समीकरण सत्य होता है
शून्यकα, βबहुपद के वे मान जहाँ उसका मान शून्य है (ग्राफ़ पर x-अक्ष से कटान)
विविक्तकरD = b² − 4acमूलों की प्रकृति तय करता है
परवलय—y = ax² + bx + c का ग्राफ़, U या उल्टा U
शीर्ष(h, k)परवलय का सबसे नीचा या सबसे ऊँचा बिंदु
सममिति अक्षx = hशीर्ष से गुज़रने वाली खड़ी रेखा जो परवलय को दो दर्पण-प्रतिबिंब भागों में बाँटती है
पूर्ण वर्ग बनाना(x + p)²व्यंजक को एक पूर्ण वर्ग के रूप में लिखने की विधि

पहली विधि: गुणनखंड द्वारा हल

NCERT कक्षा 10 में द्विघात समीकरण हल करने की पहली विधि गुणनखंडन है, और जब यह चले तो सबसे तेज़ भी यही है। आधार एक सरल तथ्य है: दो संख्याओं का गुणनफल शून्य हो तो कम से कम एक संख्या शून्य होगी। 3 × 0 = 0, 0 × 7 = 0, पर 3 × 7 कभी शून्य नहीं।

तो अगर ax² + bx + c को दो रैखिक गुणनखंडों के गुणनफल (x − p)(x − q) = 0 के रूप में लिख सकें, तो या तो x − p = 0 या x − q = 0, यानी x = p या x = q। एक द्विघात समीकरण दो छोटे रैखिक समीकरणों में टूट गया।

मध्य पद को तोड़ने की तरकीब: ऐसी दो संख्याएँ खोजें जिनका गुणनफल a × c और योग b हो। फिर bx को उन्हीं दो पदों में तोड़ें और चारों पदों को जोड़ियों में समूहित करें। a = 1 हो तो गुणनफल सीधे c है।

इस विधि की सीमा भी है। अगर मूल भिन्न या अपरिमेय हों (जैसे 2 + √3), तो पूर्णांक गुणनखंड नहीं मिलेंगे। तब द्विघाती सूत्र काम आता है। इसीलिए सिमुलेशन का “गुणनखंड रूप” सिर्फ़ वास्तविक मूल होने पर चलता है।

ax² + bx + c = a(x − α)(x − β)α, β मूल हैं

pq = 0 ⇒ p = 0 या q = 0शून्य गुणनफल नियम

दूसरी विधि: पूर्ण वर्ग बनाना

पूर्ण वर्ग बनाने का मतलब है समीकरण को इस तरह सजाना कि एक तरफ़ पूर्ण वर्ग (x + p)² हो। क्यों? क्योंकि (x + p)² = r हो तो वर्गमूल लेकर x + p = ±√r मिलता है, और x निकालना एक लाइन का काम है।

तरकीब सर्वसमिका (x + p)² = x² + 2px + p² से आती है। x का गुणांक 2p है और अंतिम पद p²। यानी x के गुणांक का आधा लेकर उसका वर्ग जोड़ दें, तो पूर्ण वर्ग बन जाता है। x² + 6x में (6/2)² = 9 जोड़ें तो x² + 6x + 9 = (x + 3)²।

चरण हमेशा एक जैसे: (1) पूरे समीकरण को a से भाग दें ताकि x² का गुणांक 1 हो; (2) अचर पद को दाईं ओर ले जाएँ; (3) दोनों ओर (x के गुणांक का आधा)² जोड़ें; (4) बाएँ पक्ष को (x + p)² लिखें; (5) वर्गमूल लें, ± चिह्न न भूलें।

यह विधि हर द्विघात समीकरण पर चलती है, गुणनखंड मिलें या न मिलें। ध्यान दें: NCERT की संशोधित (rationalised) कक्षा 10 की किताब में यह विधि अलग प्रश्नावली के रूप में नहीं रही, इसलिए अपना मौजूदा CBSE सिलेबस देख लें। पर द्विघाती सूत्र इसी से निकलता है, और कक्षा 11 में वृत्त, शंकु-परिच्छेद और JEE में अधिकतम-न्यूनतम के प्रश्नों में यह सीधे काम आती है।

तीसरी विधि: द्विघाती सूत्र, उपपत्ति सहित

प्राचीन भारतीय गणितज्ञ श्रीधराचार्य ने पूर्ण वर्ग बनाने की विधि से द्विघात समीकरण हल करने का नियम दिया था, इसलिए इसे श्रीधराचार्य सूत्र भी कहते हैं। NCERT इसे द्विघाती सूत्र कहती है। नीचे सामान्य समीकरण ax² + bx + c = 0 पर पूर्ण वर्ग बनाकर सूत्र सिद्ध किया गया है। हर पंक्ति पिछली से निकलती है, रटें नहीं, समझें।

पहली पंक्ति में a से भाग दिया गया (a ≠ 0 है, इसलिए भाग दे सकते हैं)। दूसरी में c/a दाईं ओर गया। तीसरी में दोनों ओर (b/2a)² जोड़ा, क्योंकि x के गुणांक b/a का आधा b/2a है। चौथी में बायाँ पक्ष पूर्ण वर्ग बन गया और दायाँ पक्ष एक हर 4a² पर आ गया।

अंत में दोनों ओर वर्गमूल लेने पर ± आता है, क्योंकि हर धनात्मक संख्या के दो वर्गमूल होते हैं (9 के वर्गमूल +3 और −3)। फिर b/2a दाईं ओर ले जाएँ, सूत्र तैयार। ध्यान दें, वर्गमूल के अंदर b² − 4ac है, यही विविक्तकर है। यह ऋणात्मक हो तो वर्गमूल वास्तविक नहीं, इसलिए वास्तविक मूल भी नहीं।

ax² + bx + c = 0a ≠ 0

x² + (b/a)x + c/a = 0a से भाग

x² + (b/a)x = −c/aअचर दाईं ओर

x² + (b/a)x + (b/2a)² = (b/2a)² − c/aदोनों ओर (b/2a)² जोड़ें

(x + b/2a)² = (b² − 4ac) / 4a²पूर्ण वर्ग

x + b/2a = ±√(b² − 4ac) / 2aवर्गमूल, ± सहित

x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2aद्विघाती सूत्र

विविक्तकर: हल किए बिना मूलों की प्रकृति

सूत्र में वर्गमूल के अंदर वाला व्यंजक b² − 4ac विविक्तकर कहलाता है, इसे D से लिखते हैं। यह मूलों के प्रकारों में “विवेक” (भेद) करता है: पूरा हल किए बिना सिर्फ़ D के चिह्न से पता चल जाता है कि मूल कितने और कैसे हैं।

D > 0 हो तो √D एक धनात्मक वास्तविक संख्या है, इसलिए + और − से दो भिन्न वास्तविक मूल मिलते हैं। ग्राफ़ पर परवलय x-अक्ष को दो अलग बिंदुओं पर काटता है। अगर D पूर्ण वर्ग हो (16, 25 आदि) और a, b, c परिमेय हों, तो मूल परिमेय होते हैं और गुणनखंड आसानी से बनते हैं; नहीं तो मूल अपरिमेय।

D = 0 हो तो √D = 0, इसलिए + और − एक ही उत्तर देते हैं: x = −b/2a। NCERT इसे “दो बराबर वास्तविक मूल” कहती है। ग्राफ़ पर परवलय x-अक्ष को ठीक शीर्ष पर छूता है, काटता नहीं।

D < 0 हो तो ऋणात्मक संख्या का वर्गमूल चाहिए, जो वास्तविक नहीं। इसलिए कोई वास्तविक मूल नहीं, परवलय x-अक्ष को छूता ही नहीं। कक्षा 10 में इतना कहना काफ़ी है। कक्षा 11 में सम्मिश्र संख्याएँ पढ़ने के बाद कहा जाता है कि मूल सम्मिश्र संयुग्मी युग्म हैं।

विविक्तकरमूलों की प्रकृतिग्राफ़ पर क्या दिखेगा
D > 0, पूर्ण वर्गवास्तविक, भिन्न और परिमेयx-अक्ष को दो बिंदुओं पर काटता है
D > 0, पूर्ण वर्ग नहींवास्तविक, भिन्न और अपरिमेयx-अक्ष को दो बिंदुओं पर काटता है
D = 0दो बराबर वास्तविक मूलx-अक्ष को शीर्ष पर छूता है
D < 0कोई वास्तविक मूल नहीं (सम्मिश्र मूल)x-अक्ष से नहीं मिलता

मूलों और गुणांकों का संबंध: योग और गुणनफल

ax² + bx + c = 0 के मूल α और β हों, तो सूत्र के दोनों उत्तर जोड़ने पर ± वाला हिस्सा कट जाता है और α + β = −b/a बचता है। गुणा करने पर (p + q)(p − q) = p² − q² से αβ = c/a मिलता है। NCERT कक्षा 10 के अध्याय “बहुपद” में यही संबंध शून्यकों और गुणांकों के बीच पढ़ाया जाता है।

इसका फ़ायदा यह है कि मूल अलग-अलग निकाले बिना उनसे जुड़े कई प्रश्न हल हो जाते हैं। जैसे α² + β² = (α + β)² − 2αβ, या 1/α + 1/β = (α + β)/αβ। JEE में ऐसे सममित व्यंजक बहुत आते हैं।

उल्टी दिशा में भी काम होता है। मूल पता हों तो समीकरण: x² − (मूलों का योग)x + मूलों का गुणनफल = 0, क्योंकि (x − α)(x − β) का गुणा करने पर ठीक x² − (α + β)x + αβ मिलता है।

α + β = −b/aमूलों का योग

αβ = c/aमूलों का गुणनफल

x² − (α + β)x + αβ = 0मूलों से समीकरण बनाना

ग्राफ़: परवलय, शीर्ष और सममिति अक्ष

y = ax² + bx + c का ग्राफ़ हमेशा एक परवलय होता है। a > 0 हो तो यह ऊपर की ओर खुलता है (U आकार), शीर्ष सबसे निचला बिंदु होता है और फलन का एक न्यूनतम मान होता है। a < 0 हो तो नीचे की ओर खुलता है (उल्टा U), शीर्ष सबसे ऊँचा बिंदु और फलन का अधिकतम मान होता है।

|a| जितना बड़ा, परवलय उतना पतला और खड़ा; |a| जितना छोटा, उतना चौड़ा और चपटा। सिमुलेशन में a को 3 से 0.5 तक घटाकर देखें कि वक्र कैसे फैलता है।

शीर्ष (h, k) है, जहाँ h = −b/2a और k = c − b²/4a (या x = h रखकर y निकालें)। शीर्ष से गुज़रने वाली खड़ी रेखा x = h सममिति अक्ष है: इस रेखा पर मोड़ें तो परवलय की दोनों भुजाएँ बिल्कुल मिल जाती हैं। इसलिए दो मूल हों तो वे अक्ष से बराबर दूरी पर होते हैं, और h उनका औसत है।

पूर्ण वर्ग बनाकर लिखा गया रूप y = a(x − h)² + k शीर्ष रूप कहलाता है। (x − h)² कभी ऋणात्मक नहीं होता, इसलिए a > 0 हो तो y का सबसे छोटा मान x = h पर आता है और वह k है। शीर्ष एक नज़र में पढ़ने का यह सबसे आसान रूप है।

b का असर थोड़ा मज़ेदार है: b बदलने से शीर्ष एक वक्र रास्ते पर खिसकता है, पूरा परवलय बगल में नहीं सरकता। और c हमेशा y-अंतःखंड है, क्योंकि x = 0 रखने पर y = c। शुरुआती ग्राफ़ पर यह (0, −3) है।

h = −b / 2a, k = c − b² / 4aशीर्ष (h, k)

y = a(x − h)² + kशीर्ष रूप

x = hसममिति अक्ष का समीकरण

xy = x² − 2x − 3अक्ष से दूरी, x − h
−25−3
−10−2
0−3−1
1−40
2−31
302
453

सिमुलेशन में खुद करके देखें

हर प्रयोग एक-दो मिनट का है। पहले अनुमान लगाएँ, फिर जाँचें।

प्रयोग 1: c से परवलय को ऊपर-नीचे करें

मानक रूप में रहकर सिर्फ़ c बढ़ाएँ। पूरा परवलय ऊपर उठता है, आकार नहीं बदलता। दोनों मूल पास आते हैं, एक हो जाते हैं (D = 0), फिर गायब (D < 0)।

किस c पर ठीक छूता है? b² − 4ac = 0 से c = b²/4a। शुरुआती a और b के लिए हिसाब लगाकर स्लाइडर से मिलाएँ।

प्रयोग 2: a से पतला, चौड़ा और उल्टा

a को 3 से धीरे-धीरे घटाएँ। परवलय चौड़ा होता है, 0 के पास लगभग सपाट, ठीक 0 पर सीधी रेखा, और ऋणात्मक होते ही नीचे की ओर खुलता है।

a = 0 पर शीर्ष और सममिति अक्ष गायब, क्योंकि सीधी रेखा का कोई शीर्ष नहीं। तब मूल एक ही है: x = −c/b।

प्रयोग 3: शीर्ष को खींचें

a > 0 रखकर नारंगी शीर्ष पकड़ें और x-अक्ष से ऊपर उठाएँ। मूल मिलकर गायब हो जाते हैं और “कोई वास्तविक मूल नहीं” लिखा आता है। वापस नीचे लाएँ, मूल लौट आते हैं।

खींचते समय b और c कैसे बदलते हैं देखें: शीर्ष रूप से b = −2ah और c = ah² + k।

प्रयोग 4: मूल रखकर समीकरण बनाएँ

“गुणनखंड रूप” चुनें और α = 2, β = 5 रखें। a = 1 पर समीकरण x² − 7x + 10 = 0 बनता है। मापन में योग 7 और गुणनफल 10 जाँचें।

अब a = 2 करें: मूल वही रहते हैं पर परवलय पतला हो जाता है। एक ही मूलों वाले अनगिनत द्विघात समीकरण होते हैं, सिर्फ़ a अलग।

प्रयोग 5: चलते बिंदु से सममिति देखें

चलता बिंदु चालू रखें और मापन में (x, y) देखें। बिंदु जब अक्ष के दोनों ओर बराबर दूरी पर हो, y एक ही होता है। शीर्ष पार करते समय y घटने से बढ़ने में (या उल्टा) मुड़ता है।

हल किए गए उदाहरण (हर संख्या गणना से)

हर प्रश्न बोर्ड परीक्षा के चरणों में सजाया गया है। पहला प्रश्न सिमुलेशन का शुरुआती ग्राफ़ है, इसलिए स्क्रीन के मापन से मिलाकर देख सकते हैं।

उदाहरण 1: y = x² − 2x − 3 की सारी विशेषताएँ

यहाँ a = 1, b = −2, c = −3। विविक्तकर D = b² − 4ac = 4 − (−12) = 16 > 0 और पूर्ण वर्ग है, इसलिए मूल वास्तविक, भिन्न और परिमेय हैं।

सूत्र से x = (2 ± √16) / 2 = (2 ± 4) / 2, अतः x = 3 या x = −1। गुणनखंड रूप y = (x + 1)(x − 3)।

शीर्ष h = −b/2a = 1, k = −4; सममिति अक्ष x = 1; a > 0 इसलिए ऊपर की ओर खुलता है और न्यूनतम मान −4। y-अंतःखंड (0, −3)। योग −b/a = 2, गुणनफल c/a = −3।

उदाहरण 2: गुणनखंड से x² − 5x + 6 = 0 हल करें

ऐसी दो संख्याएँ चाहिए जिनका गुणनफल 6 और योग −5 हो। ये −2 और −3 हैं। मध्य पद तोड़ें: x² − 2x − 3x + 6 = 0।

समूहित करने पर (x − 2)(x − 3) = 0, अतः x = 2 या x = 3। जाँच: इन मूलों का योग और गुणनफल −b/a और c/a से मिलता है।

उदाहरण 3: पूर्ण वर्ग बनाकर 2x² + 8x − 10 = 0 हल करें

2 से भाग देने पर x² + 4x − 5 = 0, यानी x² + 4x = 5। x के गुणांक का आधा 2 है, उसका वर्ग 4; दोनों ओर जोड़ें: x² + 4x + 4 = 5 + 4।

अतः (x + 2)² = 9, वर्गमूल लेकर x + 2 = ±3। इसलिए x = 1 या x = −5।

उदाहरण 4: सूत्र से x² − 4x + 1 = 0 (अपरिमेय मूल)

D = 12, पूर्ण वर्ग नहीं, इसलिए मूल अपरिमेय। x = (4 ± √12) / 2 = 2 ± √3।

दशमलव में √12 ≈ 3.46, इसलिए x ≈ 3.73 या x ≈ 0.27। यह पूर्णांक गुणनखंडों में नहीं टूटता, इसलिए यहाँ सूत्र ही सही रास्ता है।

उदाहरण 5: विविक्तकर से मूलों की प्रकृति और बराबर मूलों की शर्त

नीचे के तीन समीकरणों के मूल कैसे हैं, हल किए बिना D से बता सकते हैं:

2x² − 6x + 3 = 0: D = 36 − 24 = 12 > 0, पूर्ण वर्ग नहीं, इसलिए वास्तविक, भिन्न और अपरिमेय मूल। 4x² − 12x + 9 = 0: D = 144 − 144 = 0, इसलिए दो बराबर वास्तविक मूल। x² + x + 1 = 0: D = 1 − 4 = −3 < 0, इसलिए कोई वास्तविक मूल नहीं।

k के किस मान के लिए x² + kx + 16 = 0 के मूल बराबर होंगे? D = 0 रखें: k² − 64 = 0, अतः k = ±8।

उदाहरण 6: 3x² − 7x + 2 = 0 के मूल α, β हों तो α² + β² और 1/α + 1/β

α + β = −b/a = 7/3 और αβ = c/a = 2/3।

α² + β² = (α + β)² − 2αβ = 49/9 − 12/9 = 37/9 ≈ 4.11। और 1/α + 1/β = (α + β)/αβ = 7/2 = 3.5।

जाँच: सूत्र से मूल 2 और लगभग 0.333 हैं; इनके वर्गों का योग भी यही आता है।

उदाहरण 7: वह समीकरण जिसके मूल 4 और −3 हैं

योग = 1, गुणनफल = −12। x² − (योग)x + गुणनफल = 0 में रखने पर समीकरण: x² − x − 12 = 0।

उदाहरण 8: क्षेत्रफल से आयत की भुजाएँ

एक आयताकार बगीचे की लंबाई उसकी चौड़ाई से 3 m अधिक है और क्षेत्रफल 40 m² है। चौड़ाई x मानें: x(x + 3) = 40, यानी x² + 3x − 40 = 0।

D = 169, √D = 13, इसलिए x = (−3 ± 13) / 2 = 5 या −8। लंबाई ऋणात्मक नहीं हो सकती, इसलिए चौड़ाई 5 m और लंबाई 8 m। जाँच: 5 × 8 = 40।

उदाहरण 9: ऊपर फेंकी गई गेंद की ऊँचाई

एक गेंद 20 m/s वेग से सीधे ऊपर फेंकी गई। g ≈ 10 m/s² लें तो t सेकंड बाद ऊँचाई h = 20t − 5t²। गेंद कब 15 m ऊँचाई पर होगी?

20t − 5t² = 15 से 5t² − 20t + 15 = 0, और 5 से भाग देने पर t² − 4t + 3 = 0। अतः t = 1 s (ऊपर जाते समय) और t = 3 s (नीचे आते समय)। दोनों उत्तर सार्थक हैं।

अधिकतम ऊँचाई शीर्ष पर: t = 2 s पर h = 20 m। और h = 0 होता है t = 0 और t = 4 s पर, यानी गेंद 4 सेकंड बाद हाथ में लौटती है। NEET और JEE की शुद्ध गतिकी में यही द्विघात बार-बार आता है।

उदाहरण 10: अधिकतम लाभ वाला दाम

किसी वस्तु का दाम x रुपये हो तो दैनिक लाभ P = −2x² + 40x − 150 (हज़ार रुपये में)। a < 0 है, इसलिए परवलय नीचे की ओर खुलता है और शीर्ष पर लाभ अधिकतम है।

x = −b/2a = 10 रुपये पर लाभ अधिकतम, P = 50 हज़ार रुपये। लाभ शून्य (न लाभ न हानि) तब, जब x² − 20x + 75 = 0, यानी x = 5 या 15 रुपये; इस सीमा के बाहर दाम रखने पर हानि।

उदाहरण 11: y = 2x² − 12x + 13 को शीर्ष रूप में लिखें

x वाले पदों से 2 बाहर निकालें: y = 2(x² − 6x) + 13। कोष्ठक में x के गुणांक का आधा −3, वर्ग 9; जोड़-घटाकर सजाने पर y = 2(x − 3)² − 5।

इसलिए शीर्ष (3, −5), न्यूनतम मान −5। D = 40 > 0, मूल x ≈ 4.58 और 1.42, दोनों अक्ष x = 3 से बराबर दूरी पर।

आम गलतियाँ

इन गलतियों से हर साल अंक कटते हैं, पहले से सावधान रहें।

  • सूत्र में −b लिखते समय चिह्न की गलती: b = −2 हो तो −b = +2, −2 नहीं।
  • c ऋणात्मक हो तो −4ac धनात्मक बन जाता है, यह भूल जाना।
  • वर्गमूल लेते समय ± न लगाकर सिर्फ़ धनात्मक मूल लिखना, जिससे एक मूल छूट जाता है।
  • पूरे अंश की जगह सिर्फ़ √ वाले हिस्से को 2a से भाग देना।
  • x² = 5x में दोनों ओर x से भाग दे देना: इससे x = 0 मूल खो जाता है। इसकी जगह x(x − 5) = 0 लिखें।
  • समीकरण को पहले ax² + bx + c = 0 रूप में लाए बिना a, b, c पढ़ लेना।
  • शाब्दिक प्रश्नों में अर्थहीन मूल (ऋणात्मक लंबाई, ऋणात्मक समय) को न छोड़ना।
  • शीर्ष का x-निर्देशांक b/2a लिखना, जबकि सही −b/2a है।

असली ज़िंदगी में द्विघात समीकरण

परवलय और द्विघात समीकरण हमारे आसपास छिपे हैं:

  • क्रिकेट की गेंद, फुटबॉल की किक या फेंके गए पत्थर का रास्ता, वायु प्रतिरोध नगण्य हो तो परवलय होता है।
  • डिश एंटीना और टॉर्च के परावर्तक परवलयाकार होते हैं, क्योंकि परवलय समांतर किरणों को एक बिंदु (फोकस) पर इकट्ठा करता है।
  • व्यापार में अधिकतम लाभ या न्यूनतम लागत का हिसाब: ग्राफ़ का शीर्ष।
  • ज़मीन, कमरे या फ्रेम की लंबाई-चौड़ाई क्षेत्रफल से निकालना।
  • गाड़ी की ब्रेकिंग दूरी चाल के वर्ग के साथ बढ़ती है, इसलिए दोगुनी चाल पर लगभग चौगुनी दूरी।
  • झूला पुल के तार और कई मेहराबों का आकार लगभग परवलय होता है।

परीक्षा कॉर्नर: CBSE बोर्ड, JEE और NEET

CBSE कक्षा 10 बोर्ड में अध्याय 4 “द्विघात समीकरण” से गुणनखंड द्वारा हल, द्विघाती सूत्र, विविक्तकर से मूलों की प्रकृति और शाब्दिक प्रश्न (क्षेत्रफल, आयु, चाल-दूरी, संख्याएँ) आते हैं। “k का वह मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए मूल बराबर हों” लगभग हर साल पूछा जाता है। अध्याय 2 “बहुपद” से शून्यकों और गुणांकों का संबंध और ग्राफ़ पढ़कर शून्यकों की संख्या बताने वाले प्रश्न आते हैं।

JEE Main में द्विघात समीकरण एक बड़ा अध्याय है: मूलों के सममित व्यंजक, उभयनिष्ठ मूल, मूलों की स्थिति (किसी संख्या से बड़े या छोटे), और द्विघात व्यंजक का चिह्न (a > 0 और D < 0 हो तो व्यंजक हर x के लिए धनात्मक)। ये सब ग्राफ़ को मन में देखकर तुरंत हल हो जाते हैं, इसलिए सिमुलेशन में परवलय की स्थिति ध्यान से समझें।

NEET भौतिकी में गतिकी के s = ut + ½at² वाले प्रश्न सीधे द्विघात समीकरण बन जाते हैं, जैसे उदाहरण 9 में। दो धनात्मक उत्तर आएँ तो दोनों का भौतिक अर्थ समझें (ऊपर जाते और नीचे आते समय), और ऋणात्मक समय को छोड़ दें।

एक स्क्रीन में रिवीज़न

परीक्षा से पहली रात बस इतना देख लें:

  • मानक रूप: ax² + bx + c = 0, शर्त a ≠ 0।
  • तीन विधियाँ: गुणनखंडन, पूर्ण वर्ग बनाना, द्विघाती सूत्र।
  • सूत्र: x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2a।
  • विविक्तकर D = b² − 4ac: > 0 दो भिन्न वास्तविक, = 0 दो बराबर, < 0 कोई वास्तविक मूल नहीं।
  • α + β = −b/a, αβ = c/a; मूलों से समीकरण x² − (α + β)x + αβ = 0।
  • ग्राफ़ परवलय; a > 0 ऊपर की ओर खुलता है, a < 0 नीचे की ओर।
  • शीर्ष (−b/2a, c − b²/4a); सममिति अक्ष x = −b/2a; y-अंतःखंड (0, c)।
  • शीर्ष रूप y = a(x − h)² + k।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्विघात समीकरण किसे कहते हैं?

जिस समीकरण में चर की सबसे बड़ी घात 2 हो, उसे द्विघात समीकरण कहते हैं। मानक रूप ax² + bx + c = 0 है, जहाँ a, b, c वास्तविक संख्याएँ हैं और a ≠ 0।

द्विघाती सूत्र क्या है?

x = (−b ± √(b² − 4ac)) / 2a। इसे श्रीधराचार्य सूत्र भी कहते हैं और यह पूर्ण वर्ग बनाने की विधि से सिद्ध होता है।

विविक्तकर किसे कहते हैं?

ax² + bx + c = 0 में b² − 4ac को विविक्तकर कहते हैं। इसके चिह्न से बिना हल किए मूलों की प्रकृति पता चलती है।

D = 0 हो तो मूल कैसे होते हैं?

दो बराबर वास्तविक मूल, दोनों −b/2a। ग्राफ़ पर परवलय x-अक्ष को शीर्ष पर सिर्फ़ छूता है।

D < 0 हो तो क्या होता है?

कोई वास्तविक मूल नहीं होता, क्योंकि ऋणात्मक संख्या का वर्गमूल वास्तविक नहीं। परवलय x-अक्ष को नहीं छूता। कक्षा 11 में इन्हें सम्मिश्र मूल कहते हैं।

मूलों का योग और गुणनफल क्या है?

ax² + bx + c = 0 के मूल α, β हों तो α + β = −b/a और αβ = c/a।

मूल दिए हों तो समीकरण कैसे बनाएँ?

x² − (मूलों का योग)x + मूलों का गुणनफल = 0 लिखें। जैसे मूल 2 और 3 हों तो x² − 5x + 6 = 0।

परवलय का शीर्ष कैसे निकालें?

h = −b/2a निकालें, फिर x = h रखकर k = y निकालें। शीर्ष (h, k) है और सममिति अक्ष x = h।

a = 0 हो तो क्या होता है?

x² पद नहीं रहता, समीकरण रैखिक bx + c = 0 बन जाता है और ग्राफ़ सीधी रेखा। इसलिए द्विघात समीकरण की परिभाषा में a ≠ 0 की शर्त है।

क्या पूर्ण वर्ग विधि CBSE कक्षा 10 में है?

संशोधित NCERT पुस्तक में इसे अलग विधि के रूप में हटाया गया है, इसलिए अपना मौजूदा सिलेबस देखें। फिर भी द्विघाती सूत्र इसी से निकलता है और कक्षा 11 व JEE में यह सीधे काम आती है।

इस विषय पर और पढ़ाई

एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।

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