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उत्तल और अवतल लेंस का किरण आरेख: बिंब खिसकाएँ, प्रतिबिंब देखें

लेंस एक पारदर्शी माध्यम है जिसकी कम से कम एक सतह वक्रित होती है और जो अपवर्तन से प्रकाश को मोड़कर प्रतिबिंब बनाता है। उत्तल लेंस समांतर किरणों को एक बिंदु पर मिलाता है (अभिसारी), अवतल लेंस उन्हें फैला देता है (अपसारी)। नीचे बिंब खिसकाएँ और देखें प्रतिबिंब कहाँ, कितना बड़ा और कैसा बनता है।

बिंब के तीर को अक्ष के साथ खींचें

बिंबआपतित किरणअपवर्तित किरणपीछे बढ़ाई रेखाप्रतिबिंबचिह्न परिपाटी: नई कार्तीय (1/v − 1/u = 1/f), दूरियाँ प्रकाशिक केंद्र से। u ऋणात्मक; आभासी प्रतिबिंब का v ऋणात्मक।
गति

नियंत्रण

लेंस का प्रकार

30.0 cm
10.0 cm
5.0 cm

बिंब कहाँ रखें

मापन

बिंब दूरी, u
-30.0cm
प्रतिबिंब दूरी, v
15.0cm
फोकस दूरी, f
10.0cm
लेंस की क्षमता, P
10.00D
आवर्धन, m = v/u
-0.50
प्रतिबिंब की ऊँचाई, h′
-2.5cm
प्रतिबिंब की प्रकृति
वास्तविक, उल्टा, छोटा

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. "लेंस का प्रकार" से उत्तल या अवतल लेंस चुनें। लेंस के दोनों ओर F और 2F बिंदु चिह्नित हैं।
  2. नीले बिंब तीर को माउस या उँगली से मुख्य अक्ष के साथ खींचें, या "बिंब की दूरी" स्लाइडर का उपयोग करें।
  3. "बिंब कहाँ रखें" बटनों से NCERT की सभी स्थितियाँ एक क्लिक में देखें: बहुत दूर, 2F से परे, 2F पर, F और 2F के बीच, F पर, F और लेंस के बीच।
  4. नारंगी रेखाएँ आपतित किरणें और लाल रेखाएँ अपवर्तित किरणें हैं। अपवर्तित किरणें सच में मिलें तो हरा प्रतिबिंब ठोस (वास्तविक) बनता है; केवल पीछे बढ़ाई डैश रेखाएँ मिलें तो प्रतिबिंब डैश (आभासी) होता है।
  5. मापन पैनल में u, v, f, आवर्धन, क्षमता और प्रतिबिंब की प्रकृति पढ़ें और नीचे के हल किए गए प्रश्नों से मिलाएँ।

चश्मा, कैमरा और आवर्धक लेंस: लेंस हर जगह हैं

धूप में एक आवर्धक लेंस (मैग्निफाइंग ग्लास) पकड़कर कागज़ पर प्रकाश एक बिंदु पर इकट्ठा करें तो कागज़ जलने लगता है। वही लेंस आँख के पास रखकर चींटियों को देखें तो वे बहुत बड़ी दिखती हैं। एक ही काँच, दो बिलकुल अलग काम। फ़र्क़ बस इतना है कि वस्तु लेंस से कितनी दूर है, और यह पूरा पेज इसी एक बात के बारे में है।

चश्मा, मोबाइल कैमरा, स्कूल का सूक्ष्मदर्शी, सिनेमा का प्रोजेक्टर और आपकी अपनी आँख का लेंस, सभी एक ही छोटे से नियम-समूह का पालन करते हैं। नियम समझ में आ गए तो रूलर से खींची तीन सीधी रेखाएँ बता देंगी कि प्रतिबिंब कहाँ बनेगा, सीधा होगा या उल्टा, बड़ा होगा या छोटा।

किरण आरेख अक्सर रटने की चीज़ लगते हैं। ऐसा नहीं है। सिमुलेशन में बिंब को थोड़ा-थोड़ा खिसकाइए: प्रतिबिंब दूर भागेगा, उल्टा होगा, अनंत में खो जाएगा और फिर बिंब के पीछे सीधा होकर लौट आएगा। इस पेज के अंत तक आप जान जाएँगे कि ऐसा क्यों होता है।

शुरुआत से: लेंस क्या है और प्रकाश क्यों मुड़ता है

जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे में (जैसे हवा से काँच में) तिरछा जाता है, तो उसकी दिशा बदल जाती है। इसे अपवर्तन कहते हैं। काँच में प्रकाश धीमा चलता है, इसलिए प्रवेश करते समय अभिलंब की ओर और निकलते समय अभिलंब से दूर मुड़ता है।

लेंस काँच या प्लास्टिक का ऐसा टुकड़ा है जिसकी कम से कम एक सतह गोलीय होती है। सतह वक्रित होने से लेंस के अलग-अलग भागों पर प्रकाश अलग-अलग मात्रा में मुड़ता है: किनारों पर ज़्यादा, बीच में लगभग नहीं। यही क्रमिक मोड़ समांतर प्रकाश को एक बिंदु पर इकट्ठा करता है या फैला देता है।

लेंस मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं। उत्तल लेंस बीच में मोटा और किनारों पर पतला होता है। यह समांतर किरणों को एक बिंदु पर मिलाता है, इसलिए इसे अभिसारी लेंस भी कहते हैं। अवतल लेंस बीच में पतला और किनारों पर मोटा होता है। यह समांतर किरणों को ऐसे फैलाता है मानो वे लेंस के सामने के एक बिंदु से आ रही हों, इसलिए इसे अपसारी लेंस कहते हैं।

याद रखने की ट्रिक: उत्तल लेंस बाहर फूला हुआ है और किरणों को अंदर खींचता है; अवतल लेंस अंदर धँसा है और किरणों को बाहर धकेलता है।

ज़रूरी शब्द

कुछ भी खींचने से पहले शब्दावली पक्की कर लें। परिभाषा वाले प्रश्न सीधे इसी सूची से आते हैं, और सिमुलेशन का हर चिह्न इन्हीं में से एक है।

शब्दचिह्नआसान भाषा में अर्थ
प्रकाशिक केंद्रOलेंस का केंद्र; इससे गुज़रने वाली किरण सीधी निकल जाती है
मुख्य अक्ष—प्रकाशिक केंद्र और दोनों वक्रता केंद्रों से गुज़रने वाली सीधी रेखा
वक्रता केंद्रCलेंस की हर सतह जिस गोले का भाग है, उसका केंद्र; लेंस के दो होते हैं
मुख्य फोकसFजहाँ अक्ष के समांतर किरणें अपवर्तन के बाद मिलती हैं (उत्तल) या जहाँ से आती प्रतीत होती हैं (अवतल)
फोकस दूरीfप्रकाशिक केंद्र से मुख्य फोकस की दूरी
बिंब दूरीuप्रकाशिक केंद्र से बिंब की दूरी
प्रतिबिंब दूरीvप्रकाशिक केंद्र से प्रतिबिंब की दूरी
आवर्धनmप्रतिबिंब की ऊँचाई ÷ बिंब की ऊँचाई = v/u
लेंस की क्षमताPलेंस प्रकाश को कितना मोड़ता है; P = 1/f (f मीटर में), मात्रक डाइऑप्टर (D)
वास्तविक प्रतिबिंब—जहाँ किरणें सच में मिलती हैं; पर्दे पर लिया जा सकता है; सदा उल्टा
आभासी प्रतिबिंब—किरणें केवल मिलती प्रतीत होती हैं; पर्दे पर नहीं आता; सीधा

किरण आरेख के तीन सुनहरे नियम

बिंब के सिरे से अनगिनत किरणें निकलती हैं, पर प्रतिबिंब खोजने के लिए हमें केवल दो चाहिए जिनका पथ हम पहले से जानते हैं। सिमुलेशन तीनों खींचता है ताकि आप देख सकें कि तीनों एक ही बिंदु पर मिलती हैं; परीक्षा में कोई भी दो काफ़ी हैं।

नियम 1: मुख्य अक्ष के समांतर किरण फोकस से होकर जाती है

उत्तल लेंस में मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरण अपवर्तन के बाद दूसरी ओर के मुख्य फोकस F से गुज़रती है। अवतल लेंस में यह ऐसे फैलती है मानो पास वाले (बिंब की ओर के) फोकस से आ रही हो। अवतल लेंस चुनकर आभासी रेखाएँ चालू रखें, डैश रेखा ठीक पास वाले F पर पहुँचेगी।

नियम 2: प्रकाशिक केंद्र से जाने वाली किरण बिना मुड़े निकलती है

प्रकाशिक केंद्र के पास पतले लेंस की दोनों सतहें लगभग समांतर होती हैं, एक पतली काँच की पट्टी जैसी, इसलिए यह किरण दिशा बदले बिना निकल जाती है। यह सबसे आसान किरण है: रूलर को बिंब के सिरे और बिंदु O पर रखें और खींच दें।

नियम 3: फोकस से होकर आने वाली किरण अक्ष के समांतर निकलती है

उत्तल लेंस में बिंब की ओर के फोकस से गुज़रकर आने वाली किरण अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है। यह नियम 1 का उल्टा है, क्योंकि प्रकाश का पथ उत्क्रमणीय होता है। अवतल लेंस में दूसरी ओर के फोकस की दिशा में जाती किरण समांतर होकर निकलती है।

उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिंब: बिंब की छह स्थितियाँ

यह तालिका लगभग हर परीक्षा में आती है। हर पंक्ति में सिमुलेशन के डिफ़ॉल्ट लेंस (f = 10 cm) के लिए नई कार्तीय चिह्न परिपाटी में गणना किया गया उदाहरण भी है। "बिंब कहाँ रखें" बटन दबाकर हर पंक्ति अपनी आँखों से जाँचें।

बिंब की स्थितिप्रतिबिंब की स्थितिप्रतिबिंब की प्रकृति और आकारउदाहरण (f = 10 cm)
अनंत परF परवास्तविक, उल्टा, अत्यधिक छोटा (बिंदु जैसा)v → अनंत
2F से परेF और 2F के बीचवास्तविक, उल्टा, छोटाu = -30, v = 15, m = -0.50
2F पर2F परवास्तविक, उल्टा, समान आकारu = -20, v = 20, m = -1
F और 2F के बीच2F से परेवास्तविक, उल्टा, आवर्धितu = -15, v = 30, m = -2
F परअनंत परवास्तविक, उल्टा, अत्यधिक आवर्धित (व्यावहारिक प्रतिबिंब नहीं)v → अनंत
F और O के बीचबिंब की ओर हीआभासी, सीधा, आवर्धितu = -6, v = -15, m = 2.50

अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब: हमेशा एक जैसा

अवतल लेंस की कहानी सरल है। बिंब अनंत पर हो तो प्रतिबिंब फोकस पर, बिंदु जैसा बनता है। बिंब अनंत और लेंस के बीच कहीं भी हो तो प्रतिबिंब फोकस और लेंस के बीच, बिंब की ओर ही बनता है। हर बार प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बिंब से छोटा होता है।

अवतल लेंस चुनकर बिंब को दूर से लेंस तक खींचें। हरा डैश प्रतिबिंब कभी F पार नहीं करता, कभी उल्टा नहीं होता। बिंब पास आने पर थोड़ा बड़ा होता है पर बिंब के बराबर कभी नहीं। दरवाज़े का "पीप होल" ठीक यही चौड़ा, छोटा दृश्य देता है।

लेंस सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f

किरण आरेख बताता है प्रतिबिंब कहाँ है; लेंस सूत्र से उसकी गणना होती है। NCERT की नई कार्तीय चिह्न परिपाटी में सभी दूरियाँ प्रकाशिक केंद्र से मापी जाती हैं: प्रकाश की दिशा में धनात्मक, विपरीत दिशा में ऋणात्मक। इसलिए बाईं ओर रखे बिंब की u ऋणात्मक, उत्तल लेंस की f धनात्मक और अवतल लेंस की f ऋणात्मक होती है।

1/v − 1/u = 1/fलेंस सूत्र, नई कार्तीय चिह्न परिपाटी

v = uf / (u + f)प्रतिबिंब दूरी के लिए व्यवस्थित

m = h′/h = v/uआवर्धन; ऋणात्मक = वास्तविक और उल्टा, धनात्मक = आभासी और सीधा

P = 1/f (f मीटर में) = 100/f (f cm में)लेंस की क्षमता, मात्रक डाइऑप्टर (D)

सूत्र कहाँ से आता है (संक्षेप में)

मान लें बिंब AB अक्ष पर खड़ा है और उसका सिरा A है। A से प्रकाशिक केंद्र O से गुज़रने वाली किरण सीधी जाती है; A से अक्ष के समांतर किरण अपवर्तन के बाद F से गुज़रती है। दोनों प्रतिबिंब के सिरे A′ पर मिलती हैं। त्रिभुज ABO और A′B′O समरूप हैं, इसलिए A′B′/AB = OB′/OB।

समांतर किरण लेंस पर बिंदु P पर पड़ती है जिसकी ऊँचाई A के बराबर है, इसलिए त्रिभुज POF और A′B′F भी समरूप हैं: A′B′/AB = B′F/OF। दोनों अनुपात बराबर रखकर और चिह्नों सहित दूरियाँ (OB = −u, OB′ = v, OF = f) लिखने पर v/(−u) = (v − f)/f मिलता है। uvf से भाग देकर सरल करने पर 1/v − 1/u = 1/f।

दूसरी परिपाटी: वास्तविक धनात्मक (1/u + 1/v = 1/f)

कुछ पाठ्यक्रम, जैसे बांग्लादेश की NCTB किताबें, "वास्तविक धनात्मक" परिपाटी अपनाते हैं: वास्तविक दूरियाँ धनात्मक और आभासी ऋणात्मक, इसलिए सूत्र 1/u + 1/v = 1/f बनता है। एक ही प्रश्न में दोनों परिपाटियाँ समान दूरी देती हैं, केवल चिह्नों का अर्थ बदलता है। CBSE और JEE/NEET के लिए नई कार्तीय परिपाटी ही लिखें और दोनों को कभी न मिलाएँ।

सिमुलेशन में ये करके देखें

पढ़ी हुई बात कुछ दिन याद रहती है, करके देखी हुई सालों तक। इन्हें एक-एक करके करें और हर बार पहले अनुमान लगाएँ।

  • बिंब को 20 cm (2F) पर रखें। मापन में v = 20 cm और m = -1 दिखेगा: प्रतिबिंब ठीक बिंब के बराबर, बस उल्टा।
  • बिंब को धीरे-धीरे F की ओर खींचें। प्रतिबिंब दाईं ओर भागता है और बड़ा होता है; ठीक F पर अपवर्तित किरणें समांतर हो जाती हैं और प्रतिबिंब अनंत पर।
  • F के ज़रा अंदर लाएँ: प्रतिबिंब अचानक बिंब के पीछे आ जाता है, सीधा और डैश वाला। यही आवर्धक लेंस है।
  • फोकस दूरी बढ़ाएँ: उसी बिंब दूरी पर प्रतिबिंब और दूर चला जाता है। मोटे, ज़्यादा वक्रित लेंस की फोकस दूरी कम और क्षमता ज़्यादा होती है।
  • अवतल लेंस में बिंब कहीं भी रखें, प्रकृति वाली पंक्ति नहीं बदलती: आभासी, सीधा, छोटा।
  • "प्रकाश स्पंद" चालू रखकर गति 0.25× करें। प्रकाश बिंब से लेंस तक और फिर आगे जाता है; डैश रेखाओं पर प्रकाश कभी नहीं चलता, वे केवल आँख का भ्रम दिखाती हैं।

हल किए गए प्रश्न (नई कार्तीय परिपाटी)

नीचे की हर संख्या सूत्र से गणना की गई है, और पहला प्रश्न सिमुलेशन की डिफ़ॉल्ट स्थिति है। हर प्रश्न के बाद वही मान सिमुलेशन में डालकर मिलाएँ।

प्रश्न 1: 10 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस से 30 cm दूर बिंब

u = −30 cm, f = +10 cm। 1/v = 1/f + 1/u = 1/10 − 1/30 = 1/15 प्रति cm।

अतः v = +15 cm, और m = v/u = 15/(−30) = -0.50। धनात्मक v मतलब दूसरी ओर वास्तविक प्रतिबिंब; ऋणात्मक m मतलब उल्टा, और |m| < 1 मतलब छोटा। बिंब 2F से परे, प्रतिबिंब F और 2F के बीच, ठीक तालिका के अनुसार।

प्रश्न 2: बिंब 2F पर (20 cm)

1/v = 1/10 − 1/20, अतः v = +20 cm और m = -1। प्रतिबिंब दूसरी ओर 2F पर: वास्तविक, उल्टा और समान आकार का। फ़ोटोकॉपी मशीन का लेंस 1:1 कॉपी ऐसे ही बनाता है।

प्रश्न 3: बिंब F और 2F के बीच (15 cm)

1/v = 1/10 − 1/15, अतः v = +30 cm और m = -2। प्रतिबिंब 2F से परे: वास्तविक, उल्टा और आवर्धित। प्रोजेक्टर यही स्थिति इस्तेमाल करता है, इसलिए स्लाइड उल्टी लगाई जाती है।

प्रश्न 4: आवर्धक लेंस, बिंब 6 cm पर

अब u = −6 cm, जो f = 10 cm से कम है। 1/v = 1/10 − 1/6 ऋणात्मक है, अतः v = -15 cm।

ऋणात्मक v मतलब प्रतिबिंब आभासी, बिंब की ओर, लेंस से 15 cm दूर। m = v/u = 2.50: धनात्मक, इसलिए सीधा, और 1 से बड़ा, इसलिए आवर्धित। चींटी इसीलिए बड़ी और सीधी दिखती है।

प्रश्न 5: 15 cm फोकस दूरी का अवतल लेंस, बिंब 30 cm पर

अवतल लेंस के लिए f = -15 cm और u = −30 cm। 1/v = 1/f + 1/u = −1/15 − 1/30, अतः v = -10 cm।

प्रतिबिंब आभासी, बिंब की ओर लेंस से 10 cm दूर, m = 0.33: सीधा और छोटा। सिमुलेशन में अवतल, |f| = 15 cm और बिंब 30 cm रखकर जाँचें।

प्रश्न 6: क्षमता, और दो लेंस एक साथ

25 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस की क्षमता P = 100/25 = +4 D। 50 cm फोकस दूरी के अवतल लेंस की क्षमता P = 100/(-50) = -2 D।

संपर्क में रखे पतले लेंसों की क्षमताएँ जुड़ती हैं: 4 + (-2) = 2 D। संयोजन की फोकस दूरी 100/2 = 50 cm, और कुल क्षमता धनात्मक होने से यह उत्तल लेंस जैसा व्यवहार करता है।

प्रश्न 7: पर्दे पर प्रतिबिंब से फोकस दूरी

प्रयोगशाला में उत्तल लेंस के सामने 24 cm पर मोमबत्ती रखने से पीछे 40 cm पर पर्दे पर स्पष्ट प्रतिबिंब मिला। u = −24, v = +40: 1/f = 1/40 + 1/24, अतः f = 15 cm और P = 6.67 D। "उत्तल लेंस की फोकस दूरी ज्ञात करना" प्रयोग ठीक यही है।

प्रश्न 8: प्रतिबिंब की ऊँचाई

प्रश्न 3 का बिंब 2 cm ऊँचा हो तो प्रतिबिंब की ऊँचाई h′ = m × h = -2 × 2 = -4 cm। ऋण चिह्न का अर्थ है प्रतिबिंब नीचे की ओर, इसलिए अक्ष के नीचे बनाएँ। सिमुलेशन में बिंब की ऊँचाई 2 cm रखकर पढ़ें।

उत्तल लेंस और अवतल लेंस में अंतर

"अंतर लिखिए" प्रश्नों के लिए पूरी तुलना एक नज़र में:

आधारउत्तल लेंसअवतल लेंस
आकृतिबीच में मोटा, किनारों पर पतलाबीच में पतला, किनारों पर मोटा
प्रकाश पर प्रभावअभिसारीअपसारी
फोकसवास्तविक फोकसआभासी फोकस
f और P का चिह्नधनात्मकऋणात्मक
प्रतिबिंबबिंब की स्थिति पर वास्तविक या आभासीसदा आभासी, सीधा, छोटा
उपयोगआवर्धक लेंस, कैमरा, प्रोजेक्टर, दूरदृष्टि का चश्मानिकटदृष्टि का चश्मा, पीप होल, गैलीलियन दूरबीन

आम ग़लतियाँ

परीक्षक ये ग़लतियाँ बार-बार देखते हैं। अपने उत्तरों में इन्हें ज़रूर जाँचें।

  • नई कार्तीय परिपाटी में u को ऋणात्मक लेना भूल जाना, जिससे v का चिह्न ग़लत आता है।
  • अवतल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक लेना। अवतल लेंस के f और P दोनों ऋणात्मक होते हैं।
  • P = 1/f में f सेंटीमीटर में रखना। डाइऑप्टर के लिए f मीटर में चाहिए, या P = 100/f (f cm में) लिखें।
  • किरणों पर तीर न लगाना, या आभासी भाग ठोस रेखा से बनाना। आभासी भाग सदा डैश से बनते हैं।
  • बिंब F पर हो तो प्रतिबिंब "F पर" लिखना। अपवर्तित किरणें समांतर निकलती हैं, प्रतिबिंब अनंत पर होता है।
  • वास्तविक प्रतिबिंब को सीधा कहना। एक लेंस का वास्तविक प्रतिबिंब सदा उल्टा होता है।

दैनिक जीवन में लेंस

आँख: आँख का लेंस उत्तल है और रेटिना पर वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब बनाता है, जिसे मस्तिष्क सीधा समझता है। पक्ष्माभी पेशियाँ लेंस की मोटाई बदलकर फोकस दूरी बदलती हैं; इसे समंजन क्षमता कहते हैं।

चश्मा: निकटदृष्टि दोष (मायोपिया) में दूर की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है, इसलिए ऋणात्मक क्षमता वाला अवतल लेंस दिया जाता है। दूरदृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) में पास की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है, इसलिए धनात्मक क्षमता वाला उत्तल लेंस लगता है। पर्चे पर −1.5 या +2.0 डाइऑप्टर में लेंस की क्षमता ही है।

कैमरा और मोबाइल: दृश्य दूर (2F से परे) होता है, इसलिए सेंसर पर छोटा, वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब बनता है। फ़ोकस करते समय लेंस थोड़ा आगे-पीछे होता है ताकि प्रतिबिंब ठीक सेंसर पर पड़े।

आवर्धक लेंस और सूक्ष्मदर्शी: F के अंदर रखा बिंब सीधा, आवर्धित आभासी प्रतिबिंब देता है। संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में दो उत्तल लेंस एक के बाद एक काम करते हैं।

प्रोजेक्टर: F और 2F के बीच रखी छोटी स्लाइड दूर के पर्दे पर बड़ा वास्तविक प्रतिबिंब बनाती है।

परीक्षा कॉर्नर: CBSE, JEE और NEET

लेंस हर साल कक्षा 10 विज्ञान ("प्रकाश: परावर्तन तथा अपवर्तन") और कक्षा 12 भौतिकी ("किरण प्रकाशिकी") में आते हैं, और JEE व NEET में भी। प्रश्न कुछ तय ढाँचों में आते हैं:

  • परिभाषाएँ: मुख्य फोकस, फोकस दूरी, प्रकाशिक केंद्र, लेंस की क्षमता और उसका SI मात्रक।
  • किरण आरेख: दी गई स्थिति (अक्सर F और 2F के बीच या F के अंदर) के बिंब का प्रतिबिंब बनाइए और प्रकृति लिखिए।
  • आंकिक प्रश्न: u और f दिए हों तो सही चिह्नों के साथ v, m और प्रतिबिंब की ऊँचाई (प्रश्न 1–5 और 8 जैसे)।
  • क्षमता: f से P, या संपर्क में दो पतले लेंसों की संयुक्त क्षमता (प्रश्न 6)।
  • अनुप्रयोग: निकटदृष्टि या दूरदृष्टि दोष कौन सा लेंस ठीक करता है और क्यों।

झटपट पुनरावृत्ति

परीक्षा से पहले की रात सिर्फ़ एक खंड पढ़ना हो तो यह पढ़ें।

  • उत्तल लेंस अभिसारी, अवतल लेंस अपसारी।
  • तीन किरणें: समांतर → F से; O से → सीधी; F से → समांतर।
  • लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f (नई कार्तीय); आवर्धन m = v/u = h′/h।
  • P = 1/f (f मीटर में), मात्रक डाइऑप्टर; उत्तल के लिए धनात्मक, अवतल के लिए ऋणात्मक।
  • उत्तल लेंस: बिंब F के बाहर → वास्तविक और उल्टा; F के अंदर → आभासी, सीधा, आवर्धित।
  • 2F पर बिंब → 2F पर समान आकार का प्रतिबिंब; F पर बिंब → प्रतिबिंब अनंत पर।
  • अवतल लेंस → प्रतिबिंब सदा आभासी, सीधा, छोटा, F और लेंस के बीच।
  • सिमुलेशन के डिफ़ॉल्ट लेंस (f = 10 cm) की क्षमता +10 D है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तल लेंस किसे कहते हैं?

जो लेंस बीच में मोटा और किनारों पर पतला हो, उसे उत्तल लेंस कहते हैं। यह मुख्य अक्ष के समांतर किरणों को अपवर्तन के बाद एक बिंदु पर मिलाता है, इसलिए इसे अभिसारी लेंस भी कहते हैं।

अवतल लेंस किसे कहते हैं?

जो लेंस बीच में पतला और किनारों पर मोटा हो, उसे अवतल लेंस कहते हैं। यह समांतर किरणों को फैला देता है, इसलिए इसे अपसारी लेंस कहते हैं।

लेंस की क्षमता क्या है और इसका SI मात्रक क्या है?

लेंस की क्षमता बताती है कि वह प्रकाश को कितना अभिसरित या अपसरित करता है। यह मीटर में फोकस दूरी का व्युत्क्रम है, P = 1/f, और इसका SI मात्रक डाइऑप्टर (D) है।

उत्तल लेंस आभासी प्रतिबिंब कब बनाता है?

जब बिंब मुख्य फोकस और प्रकाशिक केंद्र के बीच हो। तब प्रतिबिंब बिंब की ओर, सीधा और आवर्धित बनता है। आवर्धक लेंस इसी सिद्धांत पर काम करता है।

क्या अवतल लेंस वास्तविक प्रतिबिंब बना सकता है?

वास्तविक बिंब का नहीं। अकेला अवतल लेंस बिंब कहीं भी हो, सदा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।

ऋणात्मक आवर्धन का क्या अर्थ है?

नई कार्तीय परिपाटी में ऋणात्मक m का अर्थ है प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा, और धनात्मक m का अर्थ आभासी और सीधा। "वास्तविक धनात्मक" परिपाटी में अर्थ उल्टा हो जाता है, इसलिए पहले तय करें कि किस परिपाटी में गणना कर रहे हैं।

बिंब 2F पर हो तो प्रतिबिंब कहाँ बनता है?

लेंस की दूसरी ओर 2F पर: वास्तविक, उल्टा और बिंब के बराबर। f = 10 cm और बिंब 20 cm पर हो तो v = +20 cm और m = -1।

निकटदृष्टि दोष ठीक करने के लिए कौन सा लेंस लगता है?

अवतल लेंस। निकटदृष्टि वाली आँख दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनाती है; अवतल लेंस किरणों को थोड़ा फैलाकर प्रतिबिंब को पीछे रेटिना पर ले आता है।

उत्तल लेंस की फोकस दूरी कैसे ज्ञात करें?

सबसे सरल तरीक़ा: दूर की वस्तु (जैसे खिड़की) का स्पष्ट प्रतिबिंब पर्दे पर लें; लेंस से पर्दे की दूरी लगभग फोकस दूरी है। सटीक मान के लिए u और v मापकर 1/f = 1/v − 1/u का उपयोग करें (प्रश्न 7 देखें)।

इस विषय पर और पढ़ाई

एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।

भौतिकी के और एनिमेशन

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कक्षा 10 · 12

विद्युत चुंबकीय प्रेरण

विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं? चुंबक को कुंडली से गुज़ारो और सेंटर-ज़ीरो गैल्वेनोमीटर देखो। फैराडे का नियम e = −N dΦ/dt और लेंज़ का नियम हल किए गए उदाहरणों के साथ।

कक्षा 9 · 11

संवेग संरक्षण और संघट्ट

संवेग संरक्षण का नियम क्या है? दो गाड़ियों को टकराओ और प्रत्यावस्थान गुणांक e को 0 (चिपकना) से 1 (प्रत्यास्थ) तक बदलो। संवेग और गतिज ऊर्जा के बार-चार्ट लाइव देखो, हल किए गए उदाहरणों के साथ।

कक्षा 9 · 11

कार्य, ऊर्जा और शक्ति

कार्य किसे कहते हैं, गतिज व स्थितिज ऊर्जा और शक्ति के सूत्र क्या हैं: घुमावदार पथ पर लुढ़कती कार्ट की सिमुलेशन में ऊर्जा का रूपांतरण देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।

कक्षा 11 · JEE

आनत तल

ढलान पर भार कैसे दो भागों में बँटता है, विराम कोण क्या है, घर्षण ब्लॉक को कब रोकता है और कब फिसलने देता है — कोण बदलकर बल-चित्र में स्वयं देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।

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द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़

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प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता

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समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी

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माध्य, माध्यिका और बहुलक