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कार्य, ऊर्जा और शक्ति: कार्ट छोड़ें और ऊर्जा का खेल देखें

जब बल किसी वस्तु को उसकी दिशा में विस्थापित करता है, तो कार्य होता है, W = Fs। ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है, और शक्ति उस कार्य के होने की दर है, P = W/t। तीनों राशियाँ आपस में जुड़ी हैं: ऊर्जा खर्च होकर कार्य होता है, और वह कार्य कितनी तेज़ी से हुआ — यही शक्ति है।

कार्ट को बाईं ढलान पर ऊपर-नीचे खींचकर छोड़ने की ऊँचाई बदलें

कार्टछोड़ने की ऊँचाई
गति

नियंत्रण

5.00 m
0.08
2.0 kg

मापन

समय, t
0.0s
तय की गई दूरी, s
0.0m
वेग, v
0.00m/s
वर्तमान ऊँचाई, h
5.00m
गतिज ऊर्जा, Eₖ
0.0J
स्थितिज ऊर्जा, Eₚ
98.0J
यांत्रिक ऊर्जा, E
98.0J
उत्पन्न ऊष्मा, Q
0.0J
औसत घर्षण बल, F = Q/s
0.00N
औसत शक्ति, P = Q/t
0.00W

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. पहले घर्षण शून्य रखकर कार्ट छोड़ें: बाईं ओर की स्थितिज ऊर्जा धीरे-धीरे गतिज ऊर्जा में बदलती है, दूसरी ओर चढ़ते हुए फिर स्थितिज ऊर्जा बन जाती है, और कुल ऊर्जा (E) वाली पट्टी हमेशा एक जैसी ऊँची रहती है।
  2. घर्षण बढ़ाएँ: हर बार तली पार करने पर ऊष्मा (Q) की पट्टी थोड़ी बढ़ती है, और कार्ट पहले जैसी ऊँचाई तक नहीं चढ़ पाती।
  3. कार्ट को सीधे पकड़कर बाईं ढलान पर ऊपर-नीचे खींचें: छोड़ने की ऊँचाई बदल जाएगी, और स्लाइडर भी वही मान दिखाएगा।
  4. घर्षण चालू रखते हुए कार्ट के तली में रुकने तक प्रतीक्षा करें, फिर पैनल में “औसत घर्षण बल” और “औसत शक्ति” पढ़ें — दोनों ऊष्मा (Q) को दूरी और समय से भाग देकर निकाली गई हैं।
  5. द्रव्यमान दोगुना करें: स्थितिज और गतिज ऊर्जा दोनों दोगुनी हो जाती हैं, पर वेग की रीडिंग वही रहती है — द्रव्यमान वेग नहीं बदलता, केवल ऊर्जा की मात्रा बदलता है।

सीढ़ी चढ़कर जाना और दौड़कर जाना — फ़र्क़ कहाँ है

दो दोस्त एक जैसा बैग लेकर एक ही पाँच मंज़िल की सीढ़ी चढ़ते हैं। एक धीरे-धीरे चलकर चढ़ता है, दूसरा दौड़कर। दोनों ने एक जैसा भार लेकर एक जैसी ऊँचाई तय की, इसलिए दोनों ने बराबर कार्य किया। लेकिन दौड़कर चढ़ने वाला ज़्यादा हांफ रहा है, क्योंकि उसने वही कार्य कम समय में पूरा किया। यही "तेज़ी" शक्ति कहलाती है।

एक अनोखा सवाल: क्या भारी किताबों का ढेर सिर पर रखकर बिना हिले खड़े रहने में कार्य होता है? भौतिकी की परिभाषा के अनुसार उत्तर है: नहीं। बल लगा रहे, पर विस्थापन न हो, तो उस बल द्वारा कोई कार्य नहीं होता — रोज़मर्रा में "मैं काम कर रहा हूँ" कहना और भौतिकी का "कार्य" अलग-अलग बातें हैं।

और एक जाना-पहचाना दृश्य: ऊँचाई से छोड़ी गई गेंद गिरते-गिरते तेज़ होती जाती है। छोड़ने के क्षण गेंद का वेग शून्य है, इसलिए गतिज ऊर्जा भी शून्य, पर ऊँचाई पर होने के कारण उसमें एक तरह की जमा ऊर्जा है, जिसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। गिरते हुए यही जमा ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलती जाती है। इस पेज के सिमुलेशन में यही बदलाव दो पट्टियों पर ऊपर-नीचे होते हुए दिखता है।

बिल्कुल शुरुआत से: कार्य किसे कहते हैं

जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाए और वस्तु उस बल की दिशा में या उसके किसी घटक की दिशा में विस्थापित हो, तो कहा जाता है कि उस बल द्वारा कार्य हुआ। कार्य की मात्रा बल और विस्थापन के गुणनफल के बराबर होती है, लेकिन केवल उस हिस्से का जो बल की दिशा में पड़ता है।

जब बल विस्थापन की ठीक दिशा में हो, तो सरल सूत्र है: कार्य = बल × दूरी, W = Fs। यहाँ F न्यूटन (N) में और s मीटर (m) में मापा जाता है, और कार्य का मात्रक न्यूटन-मीटर होता है, जिसे जूल (J) कहा जाता है। 1 जूल का मतलब है 1 न्यूटन बल लगाकर वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर खिसकाने का कार्य।

यदि बल विस्थापन के साथ कोई कोण θ बनाता है, तो पूरा बल काम में नहीं आता, केवल विस्थापन की दिशा वाला घटक काम में आता है। इसलिए पूर्ण सूत्र है W = Fs cosθ। θ = 0° पर cosθ = 1, तब सरल सूत्र मिल जाता है। θ = 90° पर cosθ = 0, तब कार्य शून्य — इसी कारण सिर पर बैग रखकर समतल ज़मीन पर चलने में उठाने वाले बल (ऊपर की दिशा) का कार्य शून्य होता है, क्योंकि विस्थापन आगे की दिशा में है, बल के लंबवत।

कार्य धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है। बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों तो कार्य धनात्मक (जैसे ट्रॉली आगे धकेलना)। बल विस्थापन के विपरीत हो तो कार्य ऋणात्मक (जैसे घर्षण बल, जो गति के विरुद्ध कार्य करके गतिज ऊर्जा घटाता है)। बल और विस्थापन लंबवत हों तो कार्य शून्य।

ज़रूरी शब्द एक नज़र में

सूत्रों से पहले शब्दावली पक्की कर लें; परीक्षा के परिभाषा वाले प्रश्न यहीं से आते हैं।

शब्दप्रतीकसरल अर्थमात्रक
कार्यWबल द्वारा वस्तु को विस्थापित करने पर सम्पन्न मात्राजूल (J)
ऊर्जाEकार्य करने की क्षमताजूल (J)
गतिज ऊर्जाEₖगतिमान वस्तु में उसकी गति के कारण मौजूद ऊर्जाजूल (J)
स्थितिज ऊर्जाEₚवस्तु में उसकी स्थिति के कारण संचित ऊर्जाजूल (J)
शक्तिPकार्य करने की दर, प्रति सेकंड कितना कार्यवाट (W)
ऊष्माQघर्षण द्वारा यांत्रिक ऊर्जा से रूपांतरित ऊर्जाजूल (J)
यांत्रिक ऊर्जाE = Eₖ + Eₚगतिज व स्थितिज ऊर्जा का योगजूल (J)

ऊर्जा किसे कहते हैं, और इसके दो यांत्रिक रूप

किसी वस्तु में कार्य करने की जो क्षमता होती है, उसे ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा के कई रूप हैं — प्रकाश, ऊष्मा, रासायनिक, विद्युत — पर इस पेज में मुख्यतः दो यांत्रिक रूपों की बात होगी: गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा।

गतिज ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी वस्तु में उसकी गति के कारण मौजूद होती है। विराम में वस्तु की गतिज ऊर्जा शून्य होती है; वेग बढ़ने पर गतिज ऊर्जा भी बढ़ती है, पर बराबर दर से नहीं — यह वेग के वर्ग के अनुपात में बढ़ती है। इसका सूत्र है Eₖ = ½mv²।

स्थितिज ऊर्जा वह ऊर्जा है जो वस्तु में उसकी स्थिति के कारण संचित रहती है। गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा वस्तु के द्रव्यमान, गुरुत्वीय त्वरण और किसी निश्चित तल से ऊँचाई पर निर्भर करती है। इसका सूत्र है Eₚ = mgh।

इन दोनों का योग यांत्रिक ऊर्जा कहलाता है, E = Eₖ + Eₚ। घर्षण और वायु प्रतिरोध न हो तो यह योग कभी नहीं बदलता, केवल Eₖ और Eₚ के बीच का बँटवारा बदलता रहता है। यही यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम है, जिसकी विस्तृत चर्चा आगे है।

सूत्र कहाँ से आए: Eₖ और Eₚ की व्युत्पत्ति

दोनों सूत्र कार्य-ऊर्जा प्रमेय से निकलते हैं: किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, W = ΔEₖ।

Eₖ = ½mv² कैसे निकला

मान लीजिए कोई वस्तु विराम से शुरू होकर एक अचर बल F के अधीन दूरी s तय करके वेग v प्राप्त करती है। गति के सूत्र से v² = 2as, इसलिए a = v²/2s। F = ma से किया गया कार्य, W = Fs = mas = m × (v²/2s) × s = ½mv²।

वस्तु शुरुआत में विराम में थी, इसलिए उसकी शुरुआती गतिज ऊर्जा शून्य थी। तो यह पूरा कार्य ही उसकी अंतिम गतिज ऊर्जा बन जाता है: Eₖ = ½mv²। बल हटने के बाद भी यह गतिज ऊर्जा वस्तु में बनी रहती है, जब तक कोई और बल उस पर कार्य न करे।

Eₖ = ½mv²विराम से अचर त्वरण द्वारा वेग v तक

Eₚ = mgh कैसे निकला

किसी वस्तु को उसके भार mg के विरुद्ध धीरे-धीरे (लगभग अचर वेग से) ऊँचाई h तक उठाने के लिए बराबर बल लगाना पड़ता है। इस उठाने वाले बल द्वारा किया गया कार्य, W = (mg) × h = mgh।

यह कार्य नष्ट नहीं होता, वस्तु में ऊँचाई के रूप में संचित रहता है। वस्तु को अब छोड़ दिया जाए, तो यही संचित कार्य गतिज ऊर्जा में बदल जाता है। इस संचित कार्य को ही स्थितिज ऊर्जा कहते हैं, Eₚ = mgh, जो किसी बताए गए संदर्भ तल से मापी जाती है — आमतौर पर ज़मीन या मेज़ की सतह।

Eₚ = mghh किसी निश्चित संदर्भ तल से ऊँचाई

शक्ति: कार्य करने की दर

दो लोग बराबर कार्य कर सकते हैं, फिर भी जो कम समय में पूरा करता है उसे अधिक शक्तिशाली कहा जाता है। शक्ति कार्य करने की दर मापती है — प्रति इकाई समय में कितना कार्य हुआ।

सूत्र है P = W/t। W जूल में और t सेकंड में हो, तो P जूल प्रति सेकंड में आता है, जिसे वाट (W) कहा जाता है। 1 वाट का मतलब है प्रति सेकंड 1 जूल कार्य। बड़ी मशीनों की रेटिंग किलोवाट (1000 W) में होती है, और पुराना मात्रक अश्वशक्ति (horsepower, hp) आज भी वाहनों के विज्ञापन में दिखता है; 1 hp ≈ 746 W।

अचर वेग v से चलती किसी वस्तु पर अचर बल F लगे, तो छोटे समय Δt में विस्थापन Δs = vΔt होता है। इसलिए शक्ति P = W/Δt = FΔs/Δt = Fv। यह छोटा सूत्र कई शक्ति के प्रश्न बिना समय या दूरी अलग से निकाले हल कर देता है, खासकर स्थिर वेग से चलती गाड़ियों या मोटरों में।

P = W/tऔसत शक्ति

P = Fvअचर वेग पर तात्क्षणिक शक्ति

ऊर्जा संरक्षण का नियम, और घर्षण होने पर क्या बदलता है

ऊर्जा संरक्षण का नियम कहता है कि ऊर्जा न बनाई जा सकती है, न नष्ट की जा सकती है, केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदल सकती है। घर्षण और वायु प्रतिरोध न हों तो यांत्रिक ऊर्जा E = Eₖ + Eₚ कभी नहीं बदलती। सिमुलेशन में घर्षण स्लाइडर शून्य पर रखें तो यही दिखता है: कार्ट ढलान पर उतरते समय Eₚ घटती है, Eₖ ठीक उतनी ही बढ़ती है, और कुल-ऊर्जा (E) वाली पट्टी हर समय एक जैसी ऊँची रहती है।

घर्षण होने पर तस्वीर बदल जाती है। घर्षण बल गति के विरुद्ध कार्य करता है, इसलिए यह यांत्रिक ऊर्जा से लगातार कुछ ऊर्जा छीनकर ऊष्मा में बदल देता है — जैसे हाथ रगड़ने पर गर्मी लगना। इस ऊष्मा को Q = f × s लिखा जा सकता है, जहाँ f घर्षण बल और s तय की गई दूरी है। तब हिसाब बनता है: शुरुआती यांत्रिक ऊर्जा = अंतिम यांत्रिक ऊर्जा + उत्पन्न ऊष्मा — ऊर्जा खोई नहीं, केवल रूप बदला।

सिमुलेशन की "औसत घर्षण बल" और "औसत शक्ति" रीडिंग इसी ऊष्मा Q से निकलती हैं: F = Q/s (ऊष्मा ÷ दूरी) और P = Q/t (ऊष्मा ÷ समय)। इस तरह W = Fs और P = W/t दोनों सूत्र एक ही सिमुलेशन में जीवंत हो जाते हैं, क्योंकि Q भी एक तरह का कार्य ही है — घर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य।

सिमुलेशन में स्वयं आज़माएँ

हर प्रयोग का परिणाम पहले अनुमान लगाएँ, फिर चलाकर मिलाएँ।

  • घर्षण शून्य रखकर कार्ट को 5 m से छोड़ें, फिर तली में वेग पढ़ें। यह v = √(2gh) = 9.90 m/s के बराबर आना चाहिए।
  • घर्षण 0.05 पर रखकर कार्ट को कई बार आगे-पीछे झूलने दें। हर झूले की अधिकतम ऊँचाई पिछले से कम होती जाती है, जबकि ऊष्मा (Q) की पट्टी कभी नहीं घटती, केवल बढ़ती है।
  • घर्षण अधिकतम 0.30 पर ले जाएँ और कार्ट के रुकने तक प्रतीक्षा करें। फिर "औसत घर्षण बल" और "औसत शक्ति" पढ़ें — दोनों ऊष्मा को दूरी और समय से भाग देकर निकाली गई हैं।
  • द्रव्यमान दोगुना करें। स्थितिज और गतिज ऊर्जा दोनों दोगुनी हो जाती हैं, पर वेग की रीडिंग वही रहती है — द्रव्यमान वेग नहीं बदलता (जैसे मुक्त पतन में), केवल ऊर्जा की मात्रा बदलता है।
  • कार्ट को खींचकर पहले कम ऊँचाई पर, फिर अधिक ऊँचाई पर रखें। हर बार स्थितिज-ऊर्जा पट्टी की अधिकतम ऊँचाई बदल जाती है, क्योंकि Eₚ शुरुआती ऊँचाई के अनुपात में होती है।

हल किए गए प्रश्न

पहले दिया गया लिखें, फिर सूत्र, फिर मान रखें। परीक्षा में भी इस क्रम से लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं।

प्रश्न 1: गति की दिशा में बल द्वारा कार्य

एक मज़दूर 250 N बल से एक बक्से को बल की ही दिशा में 6 m खिसकाता है। किया गया कार्य ज्ञात करें।

W = Fs = 250 × 6 = 1,500 J।

प्रश्न 2: कोण पर बल द्वारा कार्य

एक लड़की क्षैतिज से 30° के कोण पर रस्सी से 40 N बल लगाकर एक स्लेज को 10 m खींचती है। किया गया कार्य ज्ञात करें।

W = Fs cosθ = 40 × 10 × cos30° = 40 × 10 × 0.866 = 346.4 J। केवल गति की दिशा वाला घटक ही काम में आया।

प्रश्न 3: समतल पर ढोने में कार्य शून्य क्यों

एक कुली 20 kg का बक्सा 1.5 m ऊँचाई तक उठाता है, फिर उसे समतल रास्ते पर 8 m तक ढोता है। उठाने का कार्य और ढोने का कार्य अलग-अलग निकालें।

उठाने में, W₁ = mgh = 20 × 9.8 × 1.5 = 294 J। ढोने में सहारा देने वाला बल ऊर्ध्वाधर है, पर विस्थापन क्षैतिज — दोनों लंबवत हैं, इसलिए W₂ = 0 J। कुल कार्य केवल उठाने का कार्य है।

प्रश्न 4: कार्य-ऊर्जा प्रमेय से रुकने की दूरी

800 kg द्रव्यमान की कार 20 m/s से चल रही है। ब्रेक 4,000 N घर्षण बल लगाते हैं। रुकने की दूरी ज्ञात करें।

गतिज ऊर्जा, Eₖ = ½mv² = 0.5 × 800 × 20² = 1,60,000 J। कार्य-ऊर्जा प्रमेय से, ब्रेक का कार्य गतिज ऊर्जा के परिवर्तन के बराबर है: Fs = Eₖ, इसलिए s = 1,60,000 / 4,000 = 40 m।

प्रश्न 5: सिमुलेशन के डिफ़ॉल्ट मान से स्थितिज ऊर्जा और तली पर वेग (बिना घर्षण)

सिमुलेशन में कार्ट का द्रव्यमान 2 kg है, छोड़ने की ऊँचाई 5 m है, और घर्षण शून्य है। शुरुआती स्थितिज ऊर्जा और तली पर वेग ज्ञात करें।

Eₚ = mgh = 2 × 9.8 × 5 = 98 J। घर्षण न होने से तली पर यह पूरी ऊर्जा गतिज ऊर्जा बन जाती है: ½mv² = 98, इसलिए v = √(98 × 2 / 2) = 9.90 m/s। सिमुलेशन में घर्षण शून्य रखकर मिलाएँ।

प्रश्न 6: सिमुलेशन के अपने μ पर घर्षण से उत्पन्न ऊष्मा

सिमुलेशन का डिफ़ॉल्ट घर्षण गुणांक μ = 0.08 है। इस गुणांक पर एक 10 kg का बक्सा अचर वेग से समतल फर्श पर 5 m धकेला जाता है (लगाया गया बल घर्षण बल के बराबर है)। घर्षण बल और उत्पन्न ऊष्मा ज्ञात करें।

घर्षण बल, f = μmg = 0.08 × 10 × 9.8 = 7.84 N। उत्पन्न ऊष्मा, Q = fs = 7.84 × 5 = 39.2 J। यह Q वास्तव में घर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य है।

प्रश्न 7: उठाने वाली मोटर का कार्य और शक्ति

एक मोटर 50 kg का भार 10 s में 6 m ऊँचाई तक उठाती है। किया गया कार्य और शक्ति ज्ञात करें।

W = mgh = 50 × 9.8 × 6 = 2,940 J। P = W/t = 2,940 / 10 = 294 W।

प्रश्न 8: वाट को अश्वशक्ति में बदलना

प्रश्न 7 की मोटर की शक्ति अश्वशक्ति (hp) में कितनी है? (1 hp ≈ 746 W)

hp = 294 / 746 = 0.394 hp — यह दिखाता है कि एक सामान्य मोटर भी पूरी एक अश्वशक्ति तक नहीं पहुँच पाती।

प्रश्न 9: P = Fv से साइकिल चलाने की शक्ति

एक साइकिल चालक अचर 5 m/s गति बनाए रखने के लिए पैडल पर स्थिर 150 N बल लगाता है। शक्ति ज्ञात करें।

P = Fv = 150 × 5 = 750 W। समय या दूरी अलग से निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ी — अचर वेग पर P = Fv सीधे उत्तर देता है।

एक नज़र में: आसपास के उपकरणों की शक्ति

नीचे दिए गोल किए गए, सामान्य मान बताते हैं कि रोज़मर्रा के उपकरणों की शक्ति कितनी अलग हो सकती है। मोटरसाइकिल की शक्ति अश्वशक्ति में भी दिखाई गई है, क्योंकि यह मात्रक अब भी वाहन विज्ञापनों में उपयोग होता है।

उपकरणसामान्य शक्ति
LED बल्ब9 W
सीलिंग फ़ैन70 W
इलेक्ट्रिक आयरन1,000 W
फ्रिज (कंप्रेसर चलते समय)150 W
माइक्रोवेव ओवन1,000 W
छोटी मोटरसाइकिल का इंजन11,000 W ≈ 14.7 hp

सब जो ग़लतियाँ करते हैं

इन ग़लतियों से बचने पर कार्य, ऊर्जा और शक्ति के प्रश्नों में अंक कटने का डर नहीं रहता।

  • रोज़मर्रा के "काम करना" और भौतिकी के "कार्य" को गड्डमड्ड कर देना। भारी चीज़ पकड़कर खड़े रहना थकाता है, पर विस्थापन शून्य होने से कार्य भी शून्य है।
  • यह भूल जाना कि गति के लंबवत बल का कार्य शून्य होता है — जैसे सिर पर बैग रखकर समतल ज़मीन पर चलना।
  • गतिज ऊर्जा के सूत्र में वेग का वर्ग भूल जाना। वेग दोगुना होने पर गतिज ऊर्जा दोगुनी नहीं, चार गुनी होती है।
  • स्थितिज ऊर्जा बताते समय संदर्भ तल न बताना। एक ही वस्तु की स्थितिज ऊर्जा ज़मीन से मापने पर और मेज़ से मापने पर अलग होती है।
  • शक्ति और ऊर्जा को एक समान मान लेना। ऊर्जा कार्य करने की कुल क्षमता है, शक्ति यह बताती है कि वह क्षमता कितनी तेज़ी से खर्च हो रही है।
  • घर्षण होने पर भी यांत्रिक ऊर्जा को अचर मान लेना। घर्षण यांत्रिक ऊर्जा को ऊष्मा में बदल देता है; यांत्रिक ऊर्जा घटती है, पर कुल ऊर्जा (यांत्रिक + ऊष्मा) संरक्षित रहती है।
  • वाट और वाट-घंटे को गड्डमड्ड करना। वाट शक्ति (दर) का मात्रक है; वाट-घंटा या किलोवाट-घंटा ऊर्जा का मात्रक है — यही बिजली के बिल में दिखता है।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कार्य, ऊर्जा और शक्ति

ये नियम सिर्फ़ परीक्षा की किताब तक सीमित नहीं हैं — आसपास की कई मशीनों के पीछे भी यही नियम काम कर रहे होते हैं।

  • जल-विद्युत बांध: ऊँचाई पर रुके पानी की स्थितिज ऊर्जा गिरते समय गतिज ऊर्जा में बदलती है और टरबाइन घुमाती है, जो इसे विद्युत ऊर्जा में बदल देता है।
  • कार के ब्रेक: घर्षण के कारण गतिज ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है, इसीलिए लगातार तेज़ ब्रेक लगाने से ब्रेक गरम हो जाते हैं।
  • बिजली का बिल: बिजली की एक "यूनिट" वह ऊर्जा है जो एक किलोवाट क्षमता का उपकरण एक घंटे में उपयोग करता है। अधिक शक्ति वाला उपकरण उतने ही समय में ज़्यादा ऊर्जा खर्च करता है।
  • रोलर कोस्टर: एक मोटर गाड़ियों को पहली पहाड़ी पर चढ़ाकर स्थितिज ऊर्जा जमा करती है; बाकी सवारी में यही ऊर्जा गतिज और स्थितिज के बीच बार-बार बदलती है, हर बार घर्षण से थोड़ी-थोड़ी कम होती जाती है।
  • घड़ी की कमानी: चाबी घुमाने से कमानी में स्थितिज ऊर्जा जमा होती है, जो धीरे-धीरे गतिज ऊर्जा में बदलकर सुइयों को घुमाती है।
  • क्रेन: जो क्रेन एक ही भार को कम समय में उठा सकती है, वह वही कार्य तेज़ी से कर रही है — यही उसे अधिक शक्तिशाली बनाता है।

परीक्षा कॉर्नर: CBSE बोर्ड और JEE/NEET

CBSE बोर्ड में परिभाषा वाले प्रश्न कार्य, गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा और शक्ति की स्पष्ट परिभाषा और मात्रक माँगते हैं। संख्यात्मक प्रश्नों में अक्सर कार्य-ऊर्जा प्रमेय सीधे सूत्र से ज़्यादा काम आता है। JEE और NEET में घर्षण के साथ ऊर्जा संरक्षण, और वेग-निर्भर बलों के अंतर्गत कार्य के प्रश्न भी पूछे जाते हैं, जहाँ सीधे सूत्र से पहले कार्य-ऊर्जा प्रमेय लागू करना तेज़ रास्ता होता है।

एक विशिष्ट संरचित प्रश्न

परिस्थिति: 2 kg की एक कार्ट को एक चिकने घुमावदार पथ पर 5 m से छोड़ा जाता है।

(क) कार्य की परिभाषा दें। (ख) ऊर्जा संरक्षण का नियम लिखें। (ग) पथ की तली पर पहुँचने पर कार्ट का वेग ज्ञात करें। (घ) "यदि पथ पर घर्षण है, तो कार्ट दूसरी ओर अपनी मूल ऊँचाई तक नहीं चढ़ पाएगी" — इस कथन की जाँच करें।

(ग) का उत्तर: Eₚ = mgh = 98 J, और घर्षण न होने पर तली पर यह पूरी गतिज ऊर्जा बन जाती है, इसलिए v = 9.90 m/s। (घ) का उत्तर: घर्षण होने पर नीचे जाते समय कुछ यांत्रिक ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है, इसलिए दूसरी ओर स्थितिज ऊर्जा के लिए पहले से कम ऊर्जा बचती है, और कार्ट पहले से कम ऊँचाई तक पहुँचती है — कथन सही है।

रिवीज़न: आख़िरी समय का सारांश

परीक्षा से पहले सिर्फ़ इस सूची पर एक नज़र डाल लेना ही काफ़ी है।

  • कार्य: बल गति की दिशा में हो तो W = Fs, सामान्यतः W = Fs cosθ। मात्रक जूल (J)।
  • गतिज ऊर्जा: Eₖ = ½mv²। स्थितिज ऊर्जा: Eₚ = mgh। यांत्रिक ऊर्जा: E = Eₖ + Eₚ।
  • शक्ति: P = W/t = Fv (अचर वेग पर)। मात्रक वाट (W); 1 hp ≈ 746 W।
  • घर्षण और वायु प्रतिरोध न हों तो यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है; घर्षण होने पर कुछ ऊर्जा ऊष्मा (Q) में बदलती है, पर कुल ऊर्जा फिर भी संरक्षित रहती है।
  • सिमुलेशन में औसत घर्षण बल F = Q/s और औसत शक्ति P = Q/t — दोनों ऊष्मा से सीधे निकाली गई हैं, ठीक सूत्र जैसा।
  • बल गति के लंबवत हो, या गति ही न हो, तो कार्य शून्य रहता है — बल कितना भी बड़ा क्यों न हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भौतिकी में कार्य किसे कहते हैं?

जब कोई बल किसी वस्तु को अपनी दिशा में या उसके किसी घटक में विस्थापित करे, तब कार्य होता है। W = Fs cosθ, जहाँ θ बल और विस्थापन के बीच का कोण है।

कार्य का SI मात्रक क्या है?

कार्य का SI मात्रक जूल (J) है। 1 जूल वह कार्य है जो 1 न्यूटन बल किसी वस्तु को अपनी दिशा में 1 मीटर विस्थापित करने में करता है।

गतिज और स्थितिज ऊर्जा के सूत्र क्या हैं?

गतिज ऊर्जा Eₖ = ½mv² है, जहाँ m द्रव्यमान और v वेग है। स्थितिज ऊर्जा Eₚ = mgh है, जहाँ h किसी बताए गए संदर्भ तल से ऊँचाई है।

शक्ति किसे कहते हैं और इसका मात्रक क्या है?

शक्ति कार्य करने की दर है, P = W/t। इसका SI मात्रक वाट (W) है: 1 वाट का मतलब प्रति सेकंड 1 जूल कार्य। 1 अश्वशक्ति (hp) लगभग 746 वाट के बराबर है।

ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या कहता है?

ऊर्जा न बनाई जा सकती है, न नष्ट की जा सकती है, केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदल सकती है। घर्षण न हो तो किसी वस्तु की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज + स्थितिज) अचर रहती है।

क्या घर्षण होने पर ऊर्जा संरक्षण का नियम टूट जाता है?

नहीं। यांत्रिक ऊर्जा ज़रूर घटती है, पर घटी हुई मात्रा ऊष्मा ऊर्जा के रूप में फिर सामने आती है। यांत्रिक ऊर्जा और ऊष्मा को जोड़ने पर कुल मात्रा वैसे ही संरक्षित रहती है।

बल लगने पर भी कार्य शून्य कब होता है?

दो स्थितियों में: जब कोई विस्थापन ही न हो (दीवार को धकेलना जो हिलती नहीं), या जब विस्थापन बल के ठीक लंबवत हो (सिर पर बैग रखकर समतल ज़मीन पर चलना)।

द्रव्यमान दोगुना होने पर गतिज ऊर्जा कैसे बदलती है?

वेग वही रहे तो गतिज ऊर्जा भी दोगुनी होती है, क्योंकि Eₖ = ½mv² द्रव्यमान के सीधे अनुपात में है। पर वेग दोगुना होने पर गतिज ऊर्जा चार गुनी होती है, क्योंकि यह v² पर निर्भर करती है।

वाट और वाट-घंटे में क्या अंतर है?

वाट (W) शक्ति का मात्रक है — कार्य करने की दर। वाट-घंटा, या किलोवाट-घंटा (kWh), ऊर्जा का मात्रक है: वह ऊर्जा जो एक किलोवाट का उपकरण एक घंटे में उपयोग करता है। बिजली का बिल इसी kWh को "यूनिट" कहकर गिनता है।

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कक्षा 9 · 11

न्यूटन के गति के नियम

न्यूटन के गति के तीनों नियम, जड़त्व, संवेग, F = ma, आवेग और क्रिया-प्रतिक्रिया: ट्रॉली धकेलकर खुद देखें, उदाहरण और हल किए गए प्रश्नों के साथ (कक्षा 9, 11)।

कक्षा 10 · 12

गोलीय दर्पण किरण आरेख

अवतल और उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनना, ध्रुव, वक्रता केंद्र, मुख्य फोकस, दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u: बिंब खींचकर किरण आरेख ख़ुद देखें।

कक्षा 10 · 12

विद्युत चुंबकीय प्रेरण

विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं? चुंबक को कुंडली से गुज़ारो और सेंटर-ज़ीरो गैल्वेनोमीटर देखो। फैराडे का नियम e = −N dΦ/dt और लेंज़ का नियम हल किए गए उदाहरणों के साथ।

कक्षा 9 · 11

संवेग संरक्षण और संघट्ट

संवेग संरक्षण का नियम क्या है? दो गाड़ियों को टकराओ और प्रत्यावस्थान गुणांक e को 0 (चिपकना) से 1 (प्रत्यास्थ) तक बदलो। संवेग और गतिज ऊर्जा के बार-चार्ट लाइव देखो, हल किए गए उदाहरणों के साथ।

कक्षा 11 · JEE

आनत तल

ढलान पर भार कैसे दो भागों में बँटता है, विराम कोण क्या है, घर्षण ब्लॉक को कब रोकता है और कब फिसलने देता है — कोण बदलकर बल-चित्र में स्वयं देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।

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