प्रेक्षक को खींचें, या दूरी और कोण के लिए स्लाइडर उपयोग करें
नियंत्रण
स्थिति
लक्ष्य
मापन
- क्षैतिज दूरी, d
- 20m
- कोण, θ
- 30°
- tan θ
- 0.5774
- प्रेक्षक की आँख की ऊँचाई
- 1.5m
- परिकलित ऊँचाई, H
- 13.05m
- दृष्टि रेखा की लंबाई
- 23.09m
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- शुरुआत "उन्नयन कोण" मोड में डिफ़ॉल्ट मानों पर होती है: दूरी 20 मी, कोण 30°, आँख की ऊँचाई 1.5 मी — नीचे परिकलित ऊँचाई H देखें।
- प्रेक्षक को खींचकर दूरी बदलें, या स्लाइडर उपयोग करें। Play दबाने पर कोण अपने-आप 10° से 80° के बीच घूमेगा — देखें H कैसे बदलता है।
- लक्ष्य को मीनार, पेड़ और इमारत में बदलें — तस्वीर बदलती है, गणित नहीं।
- "अवनमन कोण" मोड में जाएँ: अब प्रेक्षक ऊपर है, नाव नीचे। नाव खींचें और "एकांतर कोण" चालू करके देखें कि नाव से मापा गया उन्नयन कोण ठीक θ के बराबर ही रहता है।
- "दो बार अवलोकन" मोड में α, β और x बदलें और देखें मीनार की परिकलित ऊँचाई H कैसे बदलती है — यहाँ मीनार की असली ऊँचाई कभी सीधे नहीं दी जाती, सिर्फ दो कोण और चली गई दूरी से निकाली जाती है।
- माप पैनल के आँकड़े अपने कैलकुलेटर से मिलाकर देखें — परीक्षा की कॉपी में यही तरीका लिखना होता है।
जिस पेड़ को कभी किसी ने नापा नहीं
स्कूल के गेट के पास एक बहुत ऊँचा पेड़ है, जिसे आज तक किसी ने नहीं नापा — इतनी लंबी सीढ़ी किसी के पास नहीं, और तने के इर्द-गिर्द फीता लपेटने से भी कुछ पता नहीं चलता। फिर भी तुम पूरे भरोसे के साथ उसकी ऊँचाई बता सकते हो — सिर्फ मोबाइल के कोण-मापक ऐप और ज़मीन पर नापी गई एक सीधी दूरी से। यही तरकीब इस अध्याय में सीखनी है।
लगभग 600 ईसा पूर्व, यूनानी गणितज्ञ थेल्स ने मिस्र के महान पिरामिड की ऊँचाई बिना छुए ही नाप ली थी — बस इतना इंतज़ार किया कि जब उनकी अपनी परछाईं ठीक उनकी अपनी ऊँचाई जितनी लंबी हो गई, उसी पल पिरामिड की परछाईं नाप ली। आज की भाषा में यह समरूप त्रिभुजों की तरकीब थी; अब हम वही काम tan के अनुपात से सीधे कर लेते हैं।
जहाज़ का कप्तान प्रकाश स्तंभ की जानी-पहचानी ऊँचाई देखकर अपनी दूरी का अंदाज़ा लगाता है, विमान उतारते समय पायलट अपनी ऊँचाई और अवनमन कोण मिलाकर देखता है, और सड़क बनाने से पहले सर्वेक्षक पहाड़ी की ऊँचाई नापता है — तीनों एक ही त्रिभुज पढ़ रहे हैं। ऊपर के सिमुलेशन में खुद खींचकर देखो, संख्याएँ साथ-साथ कैसे बदलती हैं।
शुरुआत से: दृष्टि रेखा, उन्नयन कोण और अवनमन कोण
प्रेक्षक की आँख से जिस वस्तु को देखा जा रहा है, उस तक खींची गई सीधी रेखा को दृष्टि रेखा कहते हैं। जब यह रेखा आँख की ऊँचाई पर बनी क्षैतिज रेखा से ऊपर की ओर झुकी हो — क्योंकि वस्तु प्रेक्षक से ऊँची है — तो क्षैतिज रेखा और दृष्टि रेखा के बीच के कोण को उन्नयन कोण कहते हैं।
जब वस्तु प्रेक्षक से नीचे हो (जैसे ऊँचे प्रकाश स्तंभ से नीचे समुद्र में तैरती नाव), तो दृष्टि रेखा उसी क्षैतिज रेखा से नीचे की ओर झुकती है, और उस कोण को अवनमन कोण कहते हैं। दोनों ही स्थितियों में कोण हमेशा क्षैतिज रेखा से मापा जाता है, किसी और रेखा से नहीं — यही सबसे आम परीक्षा-भूल है।
एक खूबसूरत तथ्य: A से B का उन्नयन कोण हमेशा B से A के अवनमन कोण के बराबर होता है। A और B, दोनों जगह की क्षैतिज रेखाएँ आपस में समांतर हैं, और दृष्टि रेखा एक तिर्यक रेखा की तरह दोनों को काटती है — इसलिए एकांतर कोण के नियम से दोनों कोण हमेशा बराबर रहते हैं।
ज़मीन हमेशा क्षैतिज होती है और मीनार या चट्टान हमेशा ऊर्ध्वाधर, इसलिए दोनों जहाँ मिलते हैं वहाँ हमेशा एक समकोण बनता है। इसी वजह से "ऊँचाई पता करो" वाला हर सवाल दरअसल एक समकोण त्रिभुज का सवाल है, और वहाँ sin-cos-tan तीनों काम आते हैं।
सूत्रों से पहले, ज़रूरी शब्दावली
एक झलक में शब्दावली — परीक्षा के "परिभाषा लिखो" सवाल यहीं से आते हैं।
| शब्द | चिह्न | सरल भाषा में अर्थ | इकाई |
|---|---|---|---|
| दृष्टि रेखा | — | प्रेक्षक की आँख से देखी जा रही वस्तु तक खींची गई सीधी रेखा | m |
| क्षैतिज रेखा | — | आँख की ऊँचाई पर ज़मीन के समांतर काल्पनिक रेखा, जहाँ से कोण मापा जाता है | — |
| उन्नयन कोण | θ | वस्तु ऊपर होने पर क्षैतिज रेखा से ऊपर की ओर झुका हुआ कोण | ° |
| अवनमन कोण | θ | वस्तु नीचे होने पर क्षैतिज रेखा से नीचे की ओर झुका हुआ कोण | ° |
| लंब | H | कोण के सामने वाली भुजा — यहाँ ऊँचाई H | m |
| आधार | d | कोण से सटी भुजा — यहाँ क्षैतिज दूरी d | m |
| कर्ण | — | समकोण के सामने वाली भुजा — यहाँ दृष्टि रेखा स्वयं | m |
| आँख की ऊँचाई | e | ज़मीन पर खड़े प्रेक्षक की आँख तक की ऊँचाई; न दी हो तो प्रेक्षक को एक बिंदु मान लिया जाता है | m |
सूत्र, और दो बार अवलोकन की व्युत्पत्ति
समकोण त्रिभुज में कोण θ के लिए tan θ = लंब ÷ आधार। उन्नयन कोण में लंब है (H − आँख की ऊँचाई) और आधार है d, इसलिए नीचे का सूत्र बनता है।
tan θ = (H − e) / dउन्नयन कोण: H देखी गई ऊँचाई, e आँख की ऊँचाई, d दूरी
H = e + d·tan θसीधे ऊँचाई निकालने का रूप — माप पैनल यही सूत्र चलाता है
d = H / tan θअवनमन कोण: मीनार की ज्ञात ऊँचाई H से नाव की दूरी d
दो बार अवलोकन: बिना जाने भी मीनार की ऊँचाई
मान लो मीनार की ऊँचाई H अज्ञात है। दूर वाले बिंदु A से उन्नयन कोण α है; वहाँ से x मीटर पास आकर बिंदु B से कोण β हो जाता है (β हमेशा α से बड़ा होता है, क्योंकि पास आने पर सिर और ऊपर उठाना पड़ता है)।
A से क्षैतिज दूरी d₁ = H·cot α, और B से दूरी d₂ = H·cot β। चूँकि A और B के बीच की दूरी ही x है, इसलिए d₁ − d₂ = x, यानी H(cot α − cot β) = x।
इससे H = x ÷ (cot α − cot β) मिलता है। इसे tan में भी लिखा जा सकता है: H = x·tan α·tan β ÷ (tan β − tan α) — दोनों एक ही सूत्र के दो रूप हैं।
H = x / (cot α − cot β) = x·tan α·tan β / (tan β − tan α)
सिमुलेशन में यह करके देखो
नीचे के हल किए गए सवालों तक पहुँचने से पहले इन सबको सिमुलेशन में खुद करके देखो — फिर संख्याएँ अजनबी नहीं लगेंगी।
1. प्रेक्षक को खींचकर दूरी बदलो
उन्नयन कोण मोड में प्रेक्षक को बाएँ-दाएँ खींचो। कोण स्लाइडर स्थिर रखने पर, दूरी बढ़ने के साथ परिकलित ऊँचाई H भी बढ़ेगी। यहाँ असली वस्तु की ऊँचाई नहीं बदल रही — बदल रहा है "कितनी दूर से, किस कोण पर देखने से कितनी ऊँचाई निकलती है" वाला रिश्ता। असली सवाल में d और θ दोनों नापी गई जानकारी होती हैं, H अज्ञात राशि।
2. लक्ष्य बदलो
मीनार, पेड़ और इमारत के बीच बदलो — तस्वीर बदलती है पर त्रिभुज और सूत्र नहीं बदलते। गणित को वस्तु की आकृति से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, सिर्फ उसकी ऊँचाई और दूरी मायने रखती है।
3. अवनमन कोण में एकांतर कोण जाँचो
"एकांतर कोण" चालू रखो। प्रकाश स्तंभ की चोटी से नाव की ओर अवनमन कोण, और नाव से चोटी की ओर उन्नयन कोण — दोनों चाप हमेशा बराबर नापे जाएँगे, चाहे नाव को कितनी भी दूरी पर खींचो।
4. दो बार अवलोकन में α, β, x बदलो
β को α से छोटा सेट करना संभव ही नहीं है — स्लाइडर की सीमा यही सुनिश्चित करती है, क्योंकि पास आने पर कोण सिर्फ बढ़ता है, घटता कभी नहीं। समान α और β पर बड़ा x एक लंबी मीनार साबित करता है।
5. हाथ से हिसाब मिलाओ
माप पैनल से tan θ का मान लो, अपने कैलकुलेटर में डिग्री मोड में डालो, और H = e + d·tan θ निकालो। मिल जाए तो यही तरीका परीक्षा की कॉपी में लिखना है।
हल किए गए सवाल
नौ सवाल — उन्नयन कोण, अवनमन कोण और दो बार अवलोकन से तीन-तीन, और अंत में एक पतंग वाला बोनस सवाल। हर संख्या इसी पेज के कोड से निकाली गई है, हाथ से टाइप नहीं की गई।
सवाल 1 (उन्नयन कोण, सिमुलेशन का डिफ़ॉल्ट): d = 20 मी, θ = 30°, आँख की ऊँचाई 1.5 मी
tan 30° = 0.5774। आँख की ऊँचाई से ऊपर का हिस्सा = d·tan θ = 20 × 0.5774 = 11.55 मी।
कुल ऊँचाई H = आँख की ऊँचाई + यह हिस्सा = 1.5 + 11.55 = 13.05 मीटर — पेज खुलते ही माप पैनल में यही संख्या दिखती है।
सवाल 2 (उन्नयन कोण, मानक 45° कोण): d = 15 मी, θ = 45°
45° पर tan ठीक 1 होता है, इसलिए प्रेक्षक को बिंदु मानकर H = d × tan 45° = 15 × 1 = 15 मीटर। यही कोण परीक्षा में सबसे ज़्यादा आता है क्योंकि इसे कैलकुलेटर के बिना भी हल किया जा सकता है।
सवाल 3 (उन्नयन कोण, मानक 60° कोण): d = 12 मी, θ = 60°, आँख की ऊँचाई 1.6 मी
tan 60° = √3 ≈ 1.732। H = 1.6 + 12 × 1.732 = 22.38 मीटर। सवाल 2 से तुलना करो — एक जैसी दूरी पर 60° का कोण 45° से कहीं ज़्यादा ऊँचाई दिखाता है।
सवाल 4 (उल्टा सवाल — परछाईं): एक खंभा 6 मी ऊँचा है, सूर्य का उन्नयन कोण 30° है; परछाईं की लंबाई निकालो
अब H पता है, d नहीं। d = H ÷ tan θ = 6 ÷ 0.5774 = 10.39 मीटर। यहीं सबसे ज़्यादा गलती होती है — पहले लिख लो कौन सी राशि H है और कौन सी d, फिर सूत्र में डालो।
सवाल 5 (अवनमन कोण, प्रकाश स्तंभ): ऊँचाई 50 मी, नाव का अवनमन कोण 30°; नाव की दूरी निकालो
d = H ÷ tan θ = 50 ÷ 0.5774 = 86.60 मीटर। सूत्र वही है — बस तस्वीर उल्टी है, इस बार प्रेक्षक ऊपर है।
सवाल 6 (अवनमन कोण, दो बार नापा): एक ही 75 मी ऊँचे प्रकाश स्तंभ से नाव का अवनमन कोण पहले 45°, फिर बाद में 30°; नाव कितनी दूर गई?
पहली दूरी d₁ = 75 ÷ tan 45° = 75 ÷ 1 = 75 मी। दूसरी दूरी d₂ = 75 ÷ tan 30° = 75 ÷ 0.577 ≈ 129.90 मी।
नाव d₂ − d₁ = 129.90 − 75 ≈ 54.90 मीटर गई। यह असल में दो बार अवलोकन वाला ही सवाल है, बस इस बार H पता है और x अज्ञात है।
सवाल 7 (दो बार अवलोकन, सिमुलेशन का डिफ़ॉल्ट): α = 30°, β = 60°, x = 20 मी
cot 30° ≈ 1.732, cot 60° ≈ 0.577। H = 20 ÷ (1.732 − 0.577) = 20 ÷ 1.155 ≈ 17.32 मीटर।
d₁ = H·cot 30° ≈ 30 मी (A से), d₂ = H·cot 60° ≈ 10 मी (B से) — इनका अंतर ठीक 20 मीटर है, जो x से मेल खाता है।
सवाल 8 (दो बार अवलोकन, दूसरी जोड़ी कोण): α = 30°, β = 45°, x = 40 मी
cot 30° ≈ 1.732, cot 45° = 1। H = 40 ÷ (1.732 − 1) = 40 ÷ 0.732 ≈ 54.64 मीटर।
जाँच: d₁ ≈ 94.64 मी, d₂ ≈ 54.64 मी, इनका अंतर ठीक 40 मीटर है — मेल खाने पर हिसाब सही है।
बोनस सवाल 9 (पतंग): डोर 100 मी लंबी है और ज़मीन से 60° का कोण बनाती है; पतंग की ऊँचाई और क्षैतिज दूरी निकालो
यहाँ डोर खुद कर्ण है, इसलिए इस बार tan नहीं, sin और cos चाहिए।
ऊँचाई = डोर × sin θ = 100 × sin 60° ≈ 86.60 मीटर। क्षैतिज दूरी = डोर × cos θ = 100 × cos 60° = 50 मीटर।
आम गलतियाँ
इस अध्याय में ज़्यादातर नंबर समझ की कमी से नहीं, छोटी लापरवाहियों से कटते हैं। परीक्षा से पहले एक बार इस सूची पर नज़र डालो।
- कोण हमेशा क्षैतिज रेखा से मापा जाता है — वस्तु की दिशा वाली रेखा से नहीं। बिना चित्र बनाए सीधे सूत्र में डालने पर यही गलती सबसे ज़्यादा होती है।
- उन्नयन कोण और अवनमन कोण को गड्डमड्ड कर देना: वस्तु ऊपर हो तो उन्नयन, नीचे हो तो अवनमन — दोनों छोटे चित्र में एक जैसे दिखते हैं।
- आँख की ऊँचाई जोड़ना भूल जाना (या जहाँ दी ही नहीं गई वहाँ बेवजह जोड़ देना) — न दी हो तो प्रेक्षक को बिंदु मानना ही नियम है।
- कैलकुलेटर को रेडियन मोड में छोड़कर डिग्री का मान डालना — जवाब पूरी तरह गलत आता है, पर दिखने में एक सामान्य संख्या जैसा ही लगता है।
- उल्टे सवाल में (H पता है, d नहीं) गुणा की जगह भाग करना भूल जाना, या इसका उल्टा।
- दो बार अवलोकन में d₁ − d₂ की जगह सीधे दोनों कर्णों (दृष्टि रेखाओं) को घटा देना — चली गई दूरी x हमेशा ज़मीन के साथ-साथ होती है, दृष्टि रेखा के साथ नहीं।
- अवनमन कोण में एकांतर कोण की बराबरी भूलकर दो अलग अज्ञात कोण मानकर उलझ जाना, जबकि दोनों असल में एक ही कोण हैं।
रोज़मर्रा में इस्तेमाल
ऊँचाई-दूरी का यह हिसाब सिर्फ परीक्षा की कॉपी तक सीमित नहीं — कई पेशों में यह रोज़ का औज़ार है।
- सर्वेक्षण और सिविल इंजीनियरिंग: थियोडोलाइट असल में एक कोण-मापक यंत्र है, जिससे सड़क या इमारत बनने से पहले ज़मीन की ऊँच-नीच नापी जाती है।
- नौवहन: नाविक प्रकाश स्तंभ की जानी-पहचानी ऊँचाई और उसे देखने के कोण से अपनी नाव की दूरी का अंदाज़ा लगाते हैं।
- विमानन: उतरते समय पायलट रनवे से अपनी ऊँचाई और अवनमन कोण मिलाकर देखता है कि उतरने का रास्ता सही है या नहीं।
- वानिकी: क्लिनोमीटर से पेड़ पर चढ़े बिना उसकी ऊँचाई नापी जाती है — बिल्कुल इस सिमुलेशन के पेड़ की तरह।
- वास्तुकला: किसी इमारत की परछाईं साल के किस समय कहाँ तक पड़ेगी, यह सूर्य के उन्नयन कोण से पहले ही अनुमानित कर लिया जाता है।
- रक्षा और खोज-बचाव कार्य: रडार या निगरानी चौकी से किसी लक्ष्य की दूरी सिर्फ नापे गए कोण से निकाल ली जाती है।
परीक्षा कॉर्नर
CBSE बोर्ड (कक्षा 10, "त्रिकोणमिति के कुछ अनुप्रयोग") में आमतौर पर सीधे सवाल (कोण और दूरी देकर ऊँचाई पूछना), उल्टे सवाल (ऊँचाई देकर दूरी या कोण पूछना) और दो बार अवलोकन वाला लंबा, ज़्यादा अंकों का सवाल — तीनों तरह के सवाल आते हैं।
JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में यह अध्याय सीधे कम आता है, पर त्रिकोणमितीय अनुपात और सर्वसमिकाओं की जो पकड़ यहाँ बनती है, वही आगे त्रिकोणमिति के भारी सवालों में काम आती है — इसलिए इसे सिर्फ़ बोर्ड परीक्षा का अध्याय मानकर हल्के में मत लो।
पूरे अंक पाने के लिए तीन चीज़ें कॉपी में ज़रूर होनी चाहिए: एक लेबल लगा हुआ चित्र (कोण, दूरी और ऊँचाई चिह्नित), सही सूत्र, और आखिरी हिसाब दिखाना — सिर्फ़ जवाब लिख देने से विधि के अंक कट जाते हैं, भले ही संख्या सही हो।
एक नज़र में रिवीज़न
परीक्षा से ठीक पहले यह टेबल एक बार देख लो।
| स्थिति | ज्ञात राशियाँ | अज्ञात राशि | सूत्र |
|---|---|---|---|
| उन्नयन कोण | d, θ, आँख की ऊँचाई e | ऊँचाई H | H = e + d·tan θ |
| अवनमन कोण (ऊँचाई ज्ञात) | H, θ | दूरी d | d = H / tan θ |
| परछाईं / उल्टा सवाल | H, θ | दूरी d | d = H / tan θ |
| दो बार अवलोकन | α, β, x | ऊँचाई H | H = x / (cot α − cot β) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उन्नयन कोण और अवनमन कोण में क्या फ़र्क़ है?
दोनों आँख की ऊँचाई पर बनी क्षैतिज रेखा से मापे जाते हैं। वस्तु प्रेक्षक से ऊपर हो तो ऊपर की ओर झुका कोण उन्नयन कोण कहलाता है, नीचे हो तो नीचे की ओर झुका कोण अवनमन कोण।
दृष्टि रेखा किसे कहते हैं?
प्रेक्षक की आँख से देखी जा रही वस्तु तक खींची गई काल्पनिक सीधी रेखा को दृष्टि रेखा कहते हैं। यही समकोण त्रिभुज का कर्ण होती है।
आँख की ऊँचाई क्यों जोड़नी पड़ती है?
ज़मीन पर खड़े व्यक्ति की आँखें ज़मीन से थोड़ी ऊपर होती हैं (आमतौर पर 1.5-1.6 मी), और कोण उसी आँख की ऊँचाई से मापा जाता है, ज़मीन से नहीं। इसलिए वस्तु की पूरी ऊँचाई पाने के लिए d·tan θ में आँख की ऊँचाई जोड़नी पड़ती है। सवाल में न दी हो तो प्रेक्षक को ज़मीन पर एक बिंदु मान लिया जाता है।
हमेशा tan ही क्यों इस्तेमाल होता है, sin या cos क्यों नहीं?
क्योंकि ज़्यादातर सवालों में जो दो भुजाएँ शामिल होती हैं (ऊँचाई और क्षैतिज दूरी) वे लंब और आधार हैं, और tan θ = लंब ÷ आधार यही जोड़ता है। जहाँ कर्ण दिया गया हो (जैसे पतंग की डोर), वहाँ sin और cos काम आते हैं।
दो बार अवलोकन में β हमेशा α से बड़ा क्यों होता है?
किसी ऊँची वस्तु के पास जाने पर उसकी चोटी देखने के लिए सिर और ऊपर उठाना पड़ता है, इसलिए कोण सिर्फ़ बढ़ता है। दूर वाले बिंदु का कोण α हमेशा पास वाले बिंदु के कोण β से छोटा या बराबर होगा।
क्या A से B का उन्नयन कोण हमेशा B से A के अवनमन कोण के बराबर होता है?
हाँ। A और B, दोनों जगह की क्षैतिज रेखाएँ आपस में समांतर हैं, और दृष्टि रेखा एक तिर्यक रेखा की तरह दोनों को काटती है — इसलिए एकांतर कोण के नियम से दोनों कोण हमेशा बराबर रहते हैं।
इन सवालों के लिए कैलकुलेटर किस मोड में रखना चाहिए?
डिग्री (DEG) मोड में। रेडियन मोड में डिग्री का मान डालने पर जवाब पूरी तरह गलत आता है, लेकिन देखने में एक सामान्य संख्या जैसा ही लगता है, इसलिए गलती पकड़ में नहीं आती।
tan 30°, tan 45° और tan 60° का मान क्या है?
tan 30° = 1/√3 ≈ 0.577, tan 45° = 1, और tan 60° = √3 ≈ 1.732। ये तीन मान याद हों तो ज़्यादातर परीक्षा के सवाल बिना कैलकुलेटर के ही हल हो जाते हैं।
सिमुलेशन में मीनार की ऊँचाई सीधे क्यों नहीं बदल सकते?
क्योंकि असली सवाल में मीनार की ऊँचाई ही अज्ञात राशि होती है (उन्नयन कोण और दो बार अवलोकन मोड में) या पहले से दी गई एक स्थिर संख्या (अवनमन कोण मोड में) — सिमुलेशन तुम्हें बिल्कुल वैसे ही दूरी और कोण से ऊँचाई निकालना सिखाता है, जैसे असली सवाल में करना पड़ता है।
क्या दो बार अवलोकन में चली गई दूरी x हमेशा सीधी रेखा में होनी चाहिए?
हाँ, x को ज़मीन के साथ-साथ, मीनार के आधार की सीध में चली गई सीधी दूरी माना जाता है। टेढ़े-मेढ़े रास्ते से चलने पर या आधार की सीध में न चलने पर यह सूत्र सीधे लागू नहीं होता।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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HSC Higher Mathematics: syllabus and preparation
Textbook
Class 9-10 Higher Mathematics textbook
Admission
Engineering admission test preparation
Admission
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English
Paragraph: Artificial Intelligence
Bangla
রচনা: কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তা (बांग्ला में)
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