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पाइथागोरस प्रमेय: त्रिभुज खींचें और प्रमाण अपनी आँखों से देखें

पाइथागोरस प्रमेय कहता है: समकोण त्रिभुज में कर्ण का वर्ग अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है, यानी कर्ण² = आधार² + लंब² (c² = a² + b²)। जैसे आधार 3 और लंब 4 हो तो कर्ण 5 होगा। नीचे त्रिभुज खींचें और तीनों वर्गों का क्षेत्रफल मिलता देखें।

त्रिभुज बदलने के लिए दोनों लाल बिंदु खींचें · ▶ दबाएँ: a² और b² का “पानी” c² में डाला जाएगा

a पर वर्गb पर वर्गc पर वर्ग
गति

नियंत्रण

क्या देखें

3.0
4.0

मापन

a
3
b
4
कर्ण, c
5
C
90°
a²
9
b²
16
c²
25
a² + b²
25
a² + b² − c²
0
कोण C के अनुसार त्रिभुज
समकोण
पूर्णांक त्रिक?
हाँ

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. दोनों लाल बिंदुओं को खींचें: दाईं ओर का बिंदु आधार a बदलता है, ऊपर का बिंदु लंब b। स्लाइडर से भी यही होता है।
  2. ▶ दबाएँ: a² और b² वर्गों का रंगीन “पानी” घटता है और c² वर्ग ठीक उतना ही भरता है। अंत में c² लबालब भर जाता है, न एक बूँद बाहर गिरती है, न कम पड़ती है।
  3. “पुनर्व्यवस्था से प्रमाण” चुनें: चार एक जैसे त्रिभुज बड़े वर्ग के अंदर खिसकते हैं, और खाली जगह एक बार c² और फिर a² + b² बनती है। खाली जगह का क्षेत्रफल नहीं बदला, इसलिए दोनों बराबर हैं।
  4. “विलोम” चुनकर कोण C को 90° से हटाएँ: a² + b² − c² शून्य नहीं रहता, और पानी डालने पर c² या तो छलक जाता है (न्यूनकोण) या खाली रह जाता है (अधिककोण)।
  5. “पाइथागोरस त्रिक पर रोकें” चालू करें: त्रिभुज केवल 3-4-5, 6-8-10, 5-12-13 जैसी पूर्णांक भुजाओं पर रुकेगा, और मापन पैनल में “पूर्णांक त्रिक? हाँ” दिखेगा।

सीढ़ी, टीवी और मैदान का शॉर्टकट: हर जगह पाइथागोरस

मान लीजिए दीवार से एक सीढ़ी टिकी है। मिस्त्री जानना चाहता है कि सीढ़ी दीवार पर कितनी ऊँचाई तक पहुँचेगी। वह फीता लेकर ऊपर नहीं चढ़ता; बस ज़मीन पर सीढ़ी के पैर से दीवार की दूरी नापता है, सीढ़ी की लंबाई उसे पता है, और बाकी हिसाब से निकाल लेता है। इसी हिसाब का नाम पाइथागोरस प्रमेय है।

दुकान पर “40 इंच का टीवी” कहने का मतलब न चौड़ाई है, न ऊँचाई; मतलब है स्क्रीन के एक कोने से सामने वाले कोने तक की विकर्ण लंबाई। चौड़ाई और ऊँचाई पता हो तो विकर्ण इसी सूत्र से निकलता है। और स्कूल के मैदान में किनारे-किनारे चलने के बजाय तिरछा काटकर चलने से कितने मीटर बचे, यह भी पाइथागोरस बताता है।

यह प्रमेय लगभग 2,500 साल पहले के यूनानी गणितज्ञ पाइथागोरस के नाम से जाना जाता है, लेकिन बेबीलोन, मिस्र, भारत और चीन के लोग इससे भी पहले यह संबंध इस्तेमाल करते थे। भारत के बौधायन शुल्बसूत्र में यज्ञ-वेदी बनाने के लिए यह नियम लिखा मिलता है। यानी यह केवल परीक्षा का सूत्र नहीं, हज़ारों साल पुराना काम का औज़ार है।

पाइथागोरस प्रमेय क्या है: कथन और सूत्र

NCERT की भाषा में कथन: “एक समकोण त्रिभुज में कर्ण का वर्ग शेष दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है।” परीक्षा में “पाइथागोरस प्रमेय का कथन लिखिए” आए तो यही वाक्य लिखें।

आसान शब्दों में: अगर त्रिभुज का एक कोण ठीक 90° है, तो उस कोण के सामने वाली भुजा (जो सबसे लंबी होती है) कर्ण है। समकोण बनाने वाली दोनों भुजाओं को आधार और लंब कहते हैं। अब हर भुजा पर एक-एक वर्ग बनाइए। दोनों छोटे वर्गों के क्षेत्रफल जोड़ें तो ठीक बड़े वर्ग का क्षेत्रफल मिलता है।

सिमुलेशन का शुरुआती त्रिभुज देखें: आधार a = 3, लंब b = 4। तब a² = 9, b² = 16, योग 25। और कर्ण c = 5 है, तो c² = 25। “इकाई वर्ग के खाने” चालू करके गिनिए: हरे वर्ग में 9 खाने, नारंगी में 16, और बड़े वर्ग में ठीक 25।

c² = a² + b²c कर्ण, a आधार, b लंब

c = √(a² + b²)कर्ण निकालने का सूत्र

a = √(c² − b²)कर्ण पता हो तो एक भुजा

b = √(c² − a²)दूसरी भुजा भी इसी तरह

शब्दअर्थसिमुलेशन में कहाँ
समकोण त्रिभुजजिस त्रिभुज का एक कोण ठीक 90° होC पर छोटा वर्ग चिह्न
कर्ण (c)समकोण के सामने की भुजा, सबसे लंबी भुजानीला वर्ग इस पर बना है
आधार (a)समकोण बनाने वाली एक भुजाहरा वर्ग इस पर बना है
लंब (b)समकोण बनाने वाली दूसरी भुजानारंगी वर्ग इस पर बना है
प्रमेयऐसा गणितीय सत्य जिसे तर्क से सिद्ध करना होता हैपूरा सिमुलेशन
पाइथागोरस त्रिकतीन पूर्णांक जो a² + b² = c² मानते हैं“त्रिक पर रोकें” टॉगल

प्रमाण 1: समरूप त्रिभुजों से (NCERT की विधि)

“पाइथागोरस प्रमेय सिद्ध कीजिए” का सबसे प्रचलित प्रमाण यही है, और कई राज्य बोर्डों की परीक्षा में यह लंबे प्रश्न के रूप में आता है। CBSE के युक्तिसंगत पाठ्यक्रम में इस प्रमाण की स्थिति बदली है, इसलिए अपना वर्तमान सिलेबस ज़रूर जाँचें। इसे दिया है, सिद्ध करना है, रचना और उपपत्ति के क्रम में लिखें।

दिया है और सिद्ध करना है

ABC एक समकोण त्रिभुज है जिसमें ∠B = 90°। सिद्ध करना है: AC² = AB² + BC²।

रचना

B से कर्ण AC पर लंब BD खींचिए, जो AC को D पर मिलता है।

उपपत्ति

चरण 1: ΔADB और ΔABC में, ∠A उभयनिष्ठ है और ∠ADB = ∠ABC = 90°। अतः AA समरूपता से ΔADB ~ ΔABC।

चरण 2: समरूप त्रिभुजों की संगत भुजाएँ समानुपाती होती हैं: AD/AB = AB/AC, अर्थात AB² = AD · AC।

चरण 3: इसी प्रकार ΔBDC ~ ΔABC (∠C उभयनिष्ठ, ∠BDC = ∠ABC = 90°), इसलिए CD/BC = BC/AC, अर्थात BC² = CD · AC।

चरण 4: दोनों को जोड़ने पर AB² + BC² = AC(AD + CD) = AC · AC = AC²। अतः AC² = AB² + BC²। (इति सिद्धम्)

AB² = AD · ACΔADB ~ ΔABC से

BC² = CD · ACΔBDC ~ ΔABC से

AB² + BC² = AC(AD + CD) = AC²जोड़कर

प्रमाण 2: चार त्रिभुजों की पुनर्व्यवस्था (जो सिमुलेशन में चलता है)

भुजा a + b का एक बड़ा वर्ग बनाइए। हर भुजा को a और b लंबाई के दो भागों में बाँटिए और विभाजन बिंदुओं को क्रम से मिलाइए। चारों कोनों पर चार समकोण त्रिभुज बनते हैं, जिनकी भुजाएँ a, b और कर्ण c है। ये चारों मूल त्रिभुज के सर्वांगसम हैं (SAS)।

अंदर का चतुर्भुज c भुजा वाला वर्ग है, क्योंकि उसकी चारों भुजाएँ c हैं और हर कोण 180° − 90° = 90° है। अब क्षेत्रफल दो तरह से गिनिए: (a + b)² = c² + 4 × ½ab = c² + 2ab। विस्तार करने पर a² + 2ab + b² = c² + 2ab, यानी a² + b² = c²।

सिमुलेशन में “पुनर्व्यवस्था से प्रमाण” चुनिए। त्रिभुज केवल खिसकते हैं, न घूमते हैं, न छोटे-बड़े होते हैं। बड़े वर्ग और चारों त्रिभुजों का क्षेत्रफल वही रहता है, इसलिए खाली जगह का क्षेत्रफल भी वही रहना चाहिए: पहले वह एक तिरछा वर्ग c² है, फिर दो वर्ग a² + b²। यही पूरा प्रमाण है।

(a + b)² = c² + 4 · ½abएक ही क्षेत्रफल दो तरह से

a² + b² = c²दोनों ओर से 2ab घटाकर

प्रमाण 3: समलंब चतुर्भुज से (गारफ़ील्ड का प्रमाण)

समकोण त्रिभुज ABC लीजिए जिसमें ∠B = 90°, BC = a, AB = b, AC = c। BC को D तक बढ़ाइए ताकि CD = b, और D पर DE ⊥ BD खींचिए ताकि DE = a। A और E को मिलाइए। ABDE एक समलंब चतुर्भुज है, जिसकी समांतर भुजाएँ b और a हैं और ऊँचाई a + b।

समलंब का क्षेत्रफल ½(a + b)² है, और इसके अंदर के तीन त्रिभुजों का योग ½ab + ½ab + ½c² है (∠ACE = 90° होता है)। दोनों को बराबर करके 2 से गुणा करें: (a + b)² = 2ab + c², अतः a² + b² = c²। रोचक तथ्य: यह प्रमाण अमेरिका के 20वें राष्ट्रपति जेम्स गारफ़ील्ड ने 1876 में प्रकाशित किया था।

पाइथागोरस प्रमेय का विलोम

विलोम कहता है: “यदि किसी त्रिभुज में एक भुजा का वर्ग अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर हो, तो पहली भुजा का सम्मुख कोण समकोण होता है।” यानी केवल तीन भुजाएँ नापकर बताया जा सकता है कि त्रिभुज समकोण है या नहीं।

बराबर न हो तब भी जानकारी मिलती है। यदि a² + b² > c², तो c के सामने का कोण 90° से छोटा है, त्रिभुज न्यूनकोण है। यदि a² + b² < c², वह कोण 90° से बड़ा है, त्रिभुज अधिककोण है। कारण सीधा है: कोण खोलने पर सामने की भुजा लंबी होती है, बंद करने पर छोटी।

सिमुलेशन के “विलोम” मोड में यही दिखता है। C को 120° कीजिए: c बढ़ जाता है और a² व b² का पूरा पानी डालकर भी c² नहीं भरता। C को 60° कीजिए: c छोटा होता है और पानी छलककर लाल हो जाता है। केवल ठीक 90° पर पानी लबालब मिलता है।

c² = a² + b² − 2ab·cos Cकोसाइन नियम (कक्षा 11); C = 90° पर cos C = 0

पाइथागोरस त्रिक: जब तीनों भुजाएँ पूर्णांक हों

ज़्यादातर समकोण त्रिभुजों का कर्ण दशमलव में आता है, जैसे भुजाएँ 1 और 1 हों तो कर्ण √2 ≈ 1.414। लेकिन कुछ खास त्रिभुजों में तीनों भुजाएँ पूर्णांक होती हैं। ऐसे तीन अंकों को पाइथागोरस त्रिक कहते हैं। सबसे प्रसिद्ध है 3, 4, 5।

किसी त्रिक को किसी भी पूर्णांक से गुणा करें तो नया त्रिक मिलता है: 3-4-5 से 6-8-10, 9-12-15। NCERT में त्रिक बनाने का सूत्र है: किसी भी प्राकृत संख्या m > 1 के लिए 2m, m² − 1, m² + 1 एक त्रिक है। व्यापक सूत्र (यूक्लिड): m > n हो तो m² − n², 2mn, m² + n²। नीचे की तालिका का हर पंक्ति कोड से गणना की गई है, अंतिम स्तंभ में जाँच।

(m² − n²)² + (2mn)² = (m² + n²)²यूक्लिड सूत्र, m > n > 0

(2m)² + (m² − 1)² = (m² + 1)²NCERT कक्षा 8 का सूत्र (n = 1)

m, na = m² − n²b = 2mnc = m² + n²a² + b² = c²?
2, 134525 = 25 ✓
3, 251213169 = 169 ✓
4, 115817289 = 289 ✓
4, 372425625 = 625 ✓
5, 2212029841 = 841 ✓
5, 4940411,681 = 1,681 ✓
6, 13512371,369 = 1,369 ✓

दूरी सूत्र असल में पाइथागोरस ही है

निर्देशांक ज्यामिति में दो बिंदुओं (x₁, y₁) और (x₂, y₂) के बीच दूरी का सूत्र रटने की ज़रूरत नहीं; पाइथागोरस से खुद बना सकते हैं। दोनों बिंदुओं के बीच क्षैतिज अंतर x₂ − x₁ और ऊर्ध्वाधर अंतर y₂ − y₁ एक समकोण त्रिभुज का आधार और लंब हैं, और सीधी दूरी उसका कर्ण।

इसी तरह सदिश का परिमाण (|v| = √(x² + y²)), त्रिविमीय डिब्बे का विकर्ण, और त्रिकोणमिति की सर्वसमिका sin²θ + cos²θ = 1 भी पाइथागोरस प्रमेय के ही रूप हैं। यह अध्याय अच्छी तरह समझ लिया तो कक्षा 11-12 गणित, भौतिकी और JEE के बहुत से सवाल आसान हो जाते हैं।

d = √[(x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)²]दो बिंदुओं के बीच दूरी

sin²θ + cos²θ = 1इकाई वृत्त पर पाइथागोरस

सिमुलेशन में ये प्रयोग करके देखें

केवल पढ़ने से प्रमेय याद नहीं रहता; अपने हाथ से बदलकर देखने से रहता है। ये प्रयोग एक-एक करके करें और नतीजे कॉपी में लिखें।

  • a और b दोनों आधे करें: c भी आधा होता है, लेकिन हर वर्ग का क्षेत्रफल एक-चौथाई हो जाता है। लंबाई और क्षेत्रफल का अंतर देखिए।
  • a स्थिर रखकर b बढ़ाते जाइए: c बढ़ता है, पर कभी a + b के बराबर नहीं होता। त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी से बड़ा होता है।
  • a = b कीजिए (समद्विबाहु समकोण त्रिभुज): कर्ण a × √2 होता है, और c² वाला वर्ग ठीक दो छोटे वर्गों के बराबर।
  • पुनर्व्यवस्था मोड में a और b बदलिए: हर माप पर खाली जगह दोनों स्थितियों में बराबर रहती है। एक उदाहरण प्रमाण नहीं होता; हर त्रिभुज पर लागू होना प्रमाण है।
  • विलोम मोड में कोण C को धीरे-धीरे 90° के पार ले जाइए और “a² + b² − c²” को धनात्मक से शून्य और फिर ऋणात्मक होते देखिए।

हल सहित उदाहरण

नीचे का हर अंक इस पेज के कोड में सूत्र से गणना किया गया है। हर सवाल कॉपी में खुद हल करके मिलाइए।

उदाहरण 1: आधार 7 सेमी, लंब 9 सेमी; कर्ण ज्ञात कीजिए

c² = 7² + 9² = 49 + 81 = 130, अतः c = √130 ≈ 11.40 सेमी। यह पूर्णांक नहीं है, इसलिए 7, 9 किसी पाइथागोरस त्रिक का हिस्सा नहीं।

उदाहरण 2: कर्ण 13 सेमी, एक भुजा 5 सेमी; दूसरी भुजा ज्ञात कीजिए

b² = c² − a² = 169 − 25 = 144, अतः b = 12 सेमी। ध्यान दें: यहाँ वर्ग घटाने हैं, जोड़ने नहीं, क्योंकि छोटी भुजा ढूँढ रहे हैं।

उदाहरण 3: 10 मीटर लंबी सीढ़ी, जिसका पैर दीवार से 2.8 मीटर दूर है

सीढ़ी कर्ण है (दीवार और ज़मीन समकोण बनाते हैं)। ऊँचाई h² = 100 − 7.84 = 92.16, अतः h ≈ 9.60 मीटर।

अगर पैर खिसककर दीवार से 6 मीटर दूर हो जाए, तो ऊँचाई √(100 − 36) = 8.00 मीटर रह जाती है: सीढ़ी का ऊपरी सिरा 1.60 मीटर नीचे खिसक गया।

उदाहरण 4: स्क्रीन 88.6 सेमी चौड़ी और 49.8 सेमी ऊँची है; टीवी कितने इंच का है?

विकर्ण² = 7,849.96 + 2,480.04 = 10,330.00, अतः विकर्ण ≈ 101.64 सेमी। 1 इंच = 2.54 सेमी, इसलिए 101.64 ÷ 2.54 ≈ 40 इंच। दुकान इसी को “40 इंच का टीवी” कहती है।

उदाहरण 5: 6 सेमी भुजा वाले घन का फलक विकर्ण और घन विकर्ण

फलक विकर्ण = √(6² + 6²) = √72 ≈ 8.49 सेमी। फलक विकर्ण और एक खड़ा किनारा मिलकर दूसरा समकोण त्रिभुज बनाते हैं: घन विकर्ण = √(72 + 36) = √108 ≈ 10.39 सेमी। दो बार पाइथागोरस, और त्रिविमीय दूरी मिल गई।

उदाहरण 6: m = 5, n = 2 से पाइथागोरस त्रिक बनाइए

a = 5² − 2² = 21, b = 2 × 5 × 2 = 20, c = 5² + 2² = 29। जाँच: 441 + 400 = 841 = 29²। अतः 21, 20, 29 एक त्रिक है।

उदाहरण 7: त्रिभुज समकोण, न्यूनकोण या अधिककोण?

भुजाएँ 7, 24, 25: 7² + 24² = 625 और 25² = 625, इसलिए त्रिभुज समकोण है।

भुजाएँ 6, 7, 9: 6² + 7² = 85 और 9² = 81, इसलिए त्रिभुज न्यूनकोण है।

भुजाएँ 5, 8, 11: 5² + 8² = 89 और 11² = 121, इसलिए त्रिभुज अधिककोण है।

उदाहरण 8: बिंदु (2, -1) और (7, 11) के बीच दूरी

क्षैतिज अंतर 5, ऊर्ध्वाधर अंतर 12। दूरी = √(25 + 144) = 13 इकाई। ध्यान दीजिए, यह 5-12-13 त्रिक है!

उदाहरण 9: समद्विबाहु समकोण त्रिभुज और समबाहु त्रिभुज की ऊँचाई

दो बराबर भुजाएँ 5 सेमी हों तो कर्ण = 5√2 ≈ 7.07 सेमी। 10 सेमी भुजा वाले समबाहु त्रिभुज में ऊँचाई आधार को 5 + 5 में बाँटती है, इसलिए ऊँचाई = √(10² − 5²) ≈ 8.66 सेमी।

उदाहरण 10: 12 किमी उत्तर, फिर 9 किमी पूर्व चलने पर शुरुआत से कितनी दूर?

उत्तर और पूर्व परस्पर लंब हैं, इसलिए दूरी = √(12² + 9²) = 15 किमी। इसी तरह 40 मी × 30 मी मैदान के किनारे-किनारे चलने में 70 मी लगते हैं, पर विकर्ण 50 मी है; शॉर्टकट से 20 मी बचते हैं।

सबसे आम गलतियाँ

अंक सूत्र न जानने से कम कटते हैं, इन छोटी-छोटी भूलों से ज़्यादा।

  • गलत भुजा को कर्ण मान लेना। कर्ण हमेशा समकोण के सामने और सबसे लंबा होता है; पहले उसे पहचानिए।
  • c = a + b लिख देना। वर्गों का योग भुजाओं का योग नहीं: 3 + 4 = 7, पर कर्ण 5 है।
  • वर्गमूल लेना भूल जाना: c² = 25 पाकर उत्तर 25 लिख देना। अंतिम चरण में √ लगाना है।
  • ऐसे त्रिभुज पर सूत्र लगाना जो समकोण नहीं है। शर्त है एक कोण ठीक 90°; वरना कोसाइन नियम चाहिए।
  • प्रमाण में कारण न लिखना। “क्यों” के बिना चरणों को पूरे अंक नहीं मिलते।
  • इकाइयों की गड़बड़: एक भुजा सेमी में, दूसरी मीटर में। पहले इकाई एक कीजिए।

असल ज़िंदगी में पाइथागोरस

वास्तुकार और राजमिस्त्री 3-4-5 से कोनों की जाँच करते हैं। भूमि सर्वेक्षण में तिरछी दूरियाँ इसी से नापी जाती हैं। छोटी दूरियों के लिए मैप ऐप दो जगहों की दूरी निकालते समय असल में यही हिसाब करता है। वीडियो गेम में दो पात्रों के बीच की दूरी, या माउस और बटन के बीच की दूरी, सब √(dx² + dy²) है।

भौतिकी में दो लंबवत वेगों या बलों का परिणामी पाइथागोरस से आता है: नदी पार करती नाव का वास्तविक वेग, प्रक्षेप्य का किसी भी क्षण का वेग। विद्युत इंजीनियरिंग में AC परिपथ की प्रतिबाधा भी इसी सूत्र से निकलती है। यह केवल ज्यामिति का एक अध्याय नहीं, पूरे गणित के सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले सूत्रों में से एक है।

परीक्षा कॉर्नर: कक्षा 7-8, कक्षा 10 और JEE

कक्षा 7 और 8 में पाइथागोरस गुण और त्रिक आते हैं: कर्ण या भुजा ज्ञात करना, और “ऐसा त्रिक लिखिए जिसका एक सदस्य 6 हो” जैसे प्रश्न (2m = 6 ⇒ m = 3 ⇒ 6, 8, 10)। कक्षा 10 में सीढ़ी, खंभे और विमान वाले शब्द-प्रश्न, त्रिभुज का प्रकार पहचानना और (जिन बोर्डों के सिलेबस में है) प्रमेय व उसके विलोम का प्रमाण आते हैं; CBSE के युक्तिसंगत सिलेबस में प्रमाण की स्थिति पहले जाँच लें।

कक्षा 11-12 और JEE में प्रमेय का नाम कम आता है, पर वह हर जगह है: दूरी सूत्र, सदिश परिमाण, त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ, कोसाइन नियम। प्रतियोगी परीक्षाओं में पाइथागोरस त्रिक तुरंत पहचान लेना असली समय बचाता है।

  • कथन शब्दशः याद रखें: “एक समकोण त्रिभुज में कर्ण का वर्ग …”।
  • प्रमाण में चित्र बनाइए, दिया है, सिद्ध करना है और रचना लिखिए, और हर चरण का कारण दीजिए।
  • कम से कम दो प्रमाण (समरूप त्रिभुज और पुनर्व्यवस्था) लिखकर अभ्यास करें।
  • उत्तर में इकाई ज़रूर लिखें, और वर्गमूल दशमलव में आए तो दो स्थानों तक दें।

एक नज़र में पुनरावृत्ति

परीक्षा से पहली रात केवल यह हिस्सा पढ़ लें तो पूरा अध्याय याद आ जाएगा।

  • शर्त: त्रिभुज का एक कोण ठीक 90° हो।
  • सूत्र: कर्ण² = आधार² + लंब², c² = a² + b²।
  • कर्ण: c = √(a² + b²); भुजा: a = √(c² − b²)।
  • विलोम: a² + b² = c² तो समकोण; बड़ा हो तो न्यूनकोण; छोटा हो तो अधिककोण।
  • त्रिक: 3-4-5, 5-12-13, 8-15-17, 7-24-25; सूत्र: m² − n², 2mn, m² + n²।
  • दूरी: d = √[(x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)²]।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाइथागोरस प्रमेय क्या है?

एक समकोण त्रिभुज में कर्ण का वर्ग शेष दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है: कर्ण² = आधार² + लंब², यानी c² = a² + b²।

पाइथागोरस प्रमेय का सूत्र क्या है?

c² = a² + b²। कर्ण निकालने के लिए c = √(a² + b²), और एक भुजा निकालने के लिए a = √(c² − b²) का उपयोग करें।

पाइथागोरस प्रमेय सिद्ध कैसे करें?

समरूप त्रिभुज विधि: समकोण शीर्ष से कर्ण पर लंब डालिए, बने दोनों त्रिभुज मूल त्रिभुज के समरूप हैं, जिससे AB² = AD·AC और BC² = CD·AC मिलते हैं; जोड़ने पर AC² = AB² + BC²।

पाइथागोरस प्रमेय का विलोम क्या है?

यदि किसी त्रिभुज में एक भुजा का वर्ग अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर हो, तो उस भुजा का सम्मुख कोण समकोण होता है। जैसे 7, 24, 25 भुजाओं वाला त्रिभुज समकोण है क्योंकि 49 + 576 = 625।

पाइथागोरस त्रिक क्या होता है?

तीन धनात्मक पूर्णांक a, b, c जिनके लिए a² + b² = c² हो, जैसे 3-4-5 या 5-12-13। किसी भी m > 1 के लिए 2m, m² − 1, m² + 1 एक त्रिक देते हैं।

क्या पाइथागोरस प्रमेय हर त्रिभुज पर लागू होता है?

नहीं, केवल समकोण त्रिभुज पर। अन्य त्रिभुजों के लिए कोसाइन नियम c² = a² + b² − 2ab·cos C लगता है; C = 90° पर cos C = 0 होकर यही पाइथागोरस प्रमेय बन जाता है।

कर्ण कैसे पहचानें?

कर्ण वह भुजा है जो 90° कोण के ठीक सामने होती है, और यह हमेशा सबसे लंबी भुजा होती है। चित्र में छोटे वर्ग से चिह्नित कोण ढूँढिए और उसके सामने की भुजा लीजिए।

पाइथागोरस प्रमेय किस कक्षा में आता है?

NCERT की किताबों में पाइथागोरस गुण और पाइथागोरस त्रिक कक्षा 7-8 में आते हैं, और कक्षा 10 में समरूप त्रिभुजों के साथ इसका प्रयोग होता है; संस्करण के अनुसार अध्याय बदल सकता है। आगे कक्षा 11-12, JEE और NEET में इसका उपयोग हर जगह होता है।

पाइथागोरस प्रमेय की खोज किसने की?

यह यूनानी गणितज्ञ पाइथागोरस (ईसा पूर्व छठी शताब्दी) के नाम पर है, पर भारत में बौधायन शुल्बसूत्र में यह नियम उससे पहले से वेदी-निर्माण के लिए लिखा मिलता है; बेबीलोन और मिस्र के लोग भी इसे जानते थे।

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