चुंबक को खींचें, या इसे अपने आप कुंडली से होकर झूलने दें।
नियंत्रण
मापन
- कुंडली के केंद्र से दूरी, x
- -16.0cm
- चुंबक का वेग, v
- 0.00m/s
- प्रति फेरा चुंबकीय फ्लक्स, Φ
- 0.0μWb
- प्रेरित विद्युत वाहक बल, e
- 0.0mV
- प्रेरित धारा, I
- 0.0mA
- कुंडली के निकट फलक का ध्रुव
- —
- चुंबक अभी
- स्थिर है
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- पहले बस छोड़ दो: चुंबक अपने आप कुंडली से होकर झूलेगा, और दाईं ओर गैल्वेनोमीटर की सुई इधर-उधर हिलेगी।
- चुंबक को खुद पकड़कर खींचो: तेज़ खींचने पर सुई धीरे खींचने से ज़्यादा हिलती है — चुंबक का वेग v बढ़ने पर e भी बढ़ता है।
- "चुंबक को पलटें" दबाओ: अब सुई उल्टी दिशा में हिलेगी, क्योंकि कुंडली की ओर अब उल्टा ध्रुव है।
- कुंडली के फेरों की संख्या N बढ़ाओ: emf का मान सीधे N के अनुपात में बढ़ेगा — नीचे की सारणी में भी यही दिखता है।
- दाईं ओर के Φ–t और e–t ग्राफ़ मिलाकर देखो: जहाँ Φ सबसे तेज़ी से बदल रहा है, ठीक वहीं e सबसे ज़्यादा है — यही है e = −N dΦ/dt, चित्र में।
साइकिल का डायनेमो, वायरलेस चार्जर और मेटल डिटेक्टर
रात में साइकिल चलाओ तो पहिए से जुड़ा एक छोटा डायनेमो घूमता है, एक चुंबक कुंडली के पास घूमता है, और आगे की बत्ती बिना किसी बैटरी के जल उठती है। यह बिल्कुल यही सिमुलेशन है: कुंडली के पास चुंबक हिलने से उसमें से गुज़रने वाला फ्लक्स बदलता है, और यही बदलाव बत्ती जलाने वाला वि.वा.बल पैदा करता है।
फोन जब बिना तार के चार्जिंग पैड पर चार्ज होता है, वहाँ भी यही सिद्धांत काम करता है — दो कुंडलियाँ आमने-सामने होती हैं, एक में तेज़ी से बदलती धारा दूसरी में वि.वा.बल प्रेरित करती है, बीच में कोई तार नहीं। ज़मीन में सिक्का ढूँढने वाला मेटल डिटेक्टर, बर्तन को सीधे गरम करने वाला इंडक्शन चूल्हा, गिटार के तार की थरथराहट से आवाज़ बनाने वाला पिकअप — सबके पीछे एक ही बात है: बदलता चुंबकीय फ्लक्स वि.वा.बल पैदा करता है।
असली सवाल यह है कि कितना वि.वा.बल पैदा होगा, और प्रेरित धारा किस दिशा में बहेगी। इन्हीं दो सवालों के जवाब क्रमशः फैराडे का नियम और लेंज़ का नियम हैं। ऊपर के सिमुलेशन में चुंबक को पकड़कर खींचो और गैल्वेनोमीटर की प्रतिक्रिया देखो।
शुरुआत से: चुंबकीय फ्लक्स और "प्रेरित" का मतलब
किसी क्षेत्रफल से कितनी चुंबकीय क्षेत्र-रेखाएँ गुज़र रही हैं, इसे चुंबकीय फ्लक्स कहते हैं, प्रतीक Φ। यदि क्षेत्र B क्षेत्रफल A के लंबवत है, तो Φ = BA; यदि क्षेत्र लंब से θ कोण बनाता है, तो Φ = BA cosθ। N फेरों की कुंडली में कुल फ्लक्स-सम्बद्धता NΦ होती है, क्योंकि हर फेरे को अलग-अलग उतना ही फ्लक्स मिलता है।
असली बात यह है: सिर्फ फ्लक्स होने से कुछ नहीं होता। यदि चुंबक कुंडली के अंदर बिल्कुल स्थिर पड़ा रहे, तो फ्लक्स बड़ा होते हुए भी कुंडली में कोई वि.वा.बल प्रेरित नहीं होता। वि.वा.बल तभी पैदा होता है जब फ्लक्स समय के साथ बदले — चुंबक हिले, उसकी ताकत बदले, या कुंडली घूमे। इसी घटना को विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं, और इससे पैदा वि.वा.बल को प्रेरित वि.वा.बल।
इसे सबसे पहले अंग्रेज़ वैज्ञानिक माइकल फैराडे ने 1831 में खोजा था। उन्होंने एक कुंडली के पास चुंबक हिलाया और गैल्वेनोमीटर की सुई हिलती देखी — मगर तभी, जब चुंबक सच में हिल रहा था। चुंबक स्थिर करते ही सुई भी रुक जाती थी। लगभग उसी समय अमेरिकी वैज्ञानिक जोसेफ हेनरी ने भी स्वतंत्र रूप से यही असर देखा था। फैराडे की इसी खोज से आज के जनरेटर, ट्रांसफार्मर और बिजलीघरों की नींव पड़ी।
सिमुलेशन में चुंबक को बिल्कुल स्थिर रखो (खींचना और अपने-आप झूलना, दोनों रोककर): गैल्वेनोमीटर की सुई ठीक बीच में, शून्य पर टिकी रहती है। चुंबक हिलते ही सुई फिर जवाब देना शुरू करती है।
विद्युत चुंबकीय प्रेरण के ज़रूरी शब्द
सूत्रों से पहले शब्दावली साफ़ कर लें; परीक्षा के परिभाषा-प्रश्न यहीं से आते हैं।
| शब्द | प्रतीक | सरल अर्थ | SI मात्रक |
|---|---|---|---|
| चुंबकीय फ्लक्स | Φ | किसी क्षेत्रफल से गुज़रने वाला चुंबकीय क्षेत्र, Φ = BA cosθ | वेबर (Wb) |
| चुंबकीय फ्लक्स घनत्व | B | प्रति इकाई क्षेत्रफल चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता | टेस्ला (T) |
| फ्लक्स-सम्बद्धता | NΦ | N फेरों की कुंडली में कुल फ्लक्स, प्रति फेरे के Φ का N गुना | वेबर-फेरा |
| प्रेरित वि.वा.बल | e | फ्लक्स बदलने से कुंडली में पैदा वि.वा.बल | वोल्ट (V) |
| प्रेरित धारा | I | प्रेरित वि.वा.बल के कारण बंद परिपथ में बहने वाली धारा | ऐम्पियर (A) |
| फेरों की संख्या | N | कुंडली में तार के लपेटों की संख्या | — |
| गैल्वेनोमीटर | — | छोटी धाराएँ मापने का यंत्र; सेंटर-ज़ीरो वाला दिशा भी बताता है | — |
| भंवर धारा | — | बदलते फ्लक्स से किसी ठोस चालक के अंदर ही पैदा भँवर जैसी धारा | ऐम्पियर (A) |
फैराडे का नियम: e = −N dΦ/dt
फैराडे का विद्युत चुंबकीय प्रेरण का नियम कहता है: किसी कुंडली में प्रेरित वि.वा.बल फ्लक्स-सम्बद्धता के परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है, और उससे विपरीत दिशा में: e = −N dΦ/dt। यहाँ dΦ/dt बताता है कि प्रति फेरे फ्लक्स कितनी तेज़ी से बदल रहा है, और N से गुणा करने पर पूरी कुंडली का प्रेरित वि.वा.बल मिलता है।
इस नियम से तीन बातें सीधे निकलती हैं। पहली, फ्लक्स जितनी तेज़ी से बदले (चुंबक तेज़ खींचो, या तेज़ घुमाओ), e उतना बड़ा होगा। दूसरी, फेरों की संख्या N ज़्यादा होने पर उसी दर से फ्लक्स बदलने पर भी कुल e सीधे N के अनुपात में बढ़ता है — सिमुलेशन में फेरों की स्लाइडर बदलकर यह खुद जाँचा जा सकता है। तीसरी, फ्लक्स का बड़ा होना ज़रूरी नहीं, बस बदलना चाहिए — एक कमज़ोर चुंबक तेज़ी से हिलाकर एक मज़बूत मगर स्थिर चुंबक से ज़्यादा emf दे सकता है, क्योंकि स्थिर चुंबक का e ठीक शून्य होता है।
परीक्षा में dΦ/dt को अक्सर औसत दर ΔΦ/Δt के रूप में भी लिखा जाता है, जब फ्लक्स एक समान दर से बदलता हो। नीचे के अधिकतर हल किए गए उदाहरणों में यही औसत रूप इस्तेमाल हुआ है, क्योंकि स्कूल-कॉलेज के अधिकतर सवालों में फ्लक्स के एक समान दर से बदलने की धारणा मानी जाती है।
e = −N dΦ/dtतात्क्षणिक प्रेरित वि.वा.बल
e = −N ΔΦ/Δtजब फ्लक्स एक समान दर से बदले
लेंज़ का नियम: ऋणात्मक चिह्न का असली मतलब
फैराडे के नियम में ऋणात्मक चिह्न सिर्फ सजावट नहीं है, यही लेंज़ का नियम है: प्रेरित धारा हमेशा उसी दिशा में बहती है जो उस बदलाव का विरोध करे जिसने उसे पैदा किया। जब चुंबक पास आता है, फ्लक्स बढ़ता है, इसलिए प्रेरित धारा ऐसा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है जो इस बढ़ोतरी का विरोध करे — कुंडली के निकट फलक पर चुंबक के अगले ध्रुव जैसा ही ध्रुव बन जाता है, ताकि समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करें और कुंडली चुंबक के पास आने का विरोध करे।
चुंबक दूर जाने पर उल्टा होता है: फ्लक्स घटता है, इसलिए प्रेरित धारा अब ऐसा ध्रुव बनाती है जो चुंबक के पीछे जा रहे ध्रुव के विपरीत हो, ताकि विपरीत ध्रुव आकर्षित करें और कुंडली चुंबक को वापस खींचने की कोशिश करे। इसी कारण सिमुलेशन में चुंबक पास आने पर एक ध्रुव और दूर जाने पर उल्टा ध्रुव दिखता है — कुंडली हमेशा चुंबक की गति के विरुद्ध लड़ रही होती है।
लेंज़ का नियम असल में ऊर्जा-संरक्षण के सिद्धांत का ही एक रूप है। अगर उल्टा होता — प्रेरित धारा चुंबक को रोकने के बजाय आगे बढ़ने में मदद करती — तो चुंबक अपने-आप तेज़ होता जाता, बिना किसी मेहनत के ऊर्जा पैदा होती, जो प्रकृति में कभी नहीं होता। इसीलिए चुंबक को हिलाने के लिए तुम्हें बल लगाना पड़ता है, और उस विरोध के खिलाफ किया गया काम ही विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
सिमुलेशन में खुद प्रयोग करो
हर प्रयोग से पहले अनुमान लगाओ कि क्या होगा, फिर मिलाकर देखो।
- चुंबक को बहुत धीरे खींचो, फिर वही रास्ता बहुत तेज़ खींचो। तेज़ खींचने पर सुई कितनी ज़्यादा हिलती है?
- "चुंबक को पलटें" दबाकर वही गति फिर दोहराओ। सुई अब किस दिशा में हिल रही है, पहले की तुलना में?
- बाकी सब वही रखते हुए फेरों की संख्या N दोगुनी करो। क्या emf का पाठ सच में दोगुना हुआ?
- चुंबक की ताकत सबसे कम करो, फिर सबसे ज़्यादा। Φ–t ग्राफ़ की चोटी की ऊँचाई कैसे बदलती है?
- चुंबक को ठीक कुंडली के केंद्र पर पकड़कर स्थिर कर दो। वहाँ Φ अब भी बड़ा है — तो e शून्य क्यों दिखता है?
- दोलन की गति सबसे कम कर दो। क्या e–t ग्राफ़ पहले से चपटा दिखता है या तीखा?
हल किए गए उदाहरण
हर हल में पहले दिया गया, फिर सूत्र, फिर मान रखा गया है — परीक्षा में भी इसी क्रम में लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।
उदाहरण 1: सिमुलेशन की कुंडली में अधिकतम फ्लक्स
सिमुलेशन की कुंडली की त्रिज्या 2 सेमी है, यानी क्षेत्रफल A = πr² ≈ 12.57 cm²। चुंबक केंद्र में हो और ताकत 1× हो, तो वहाँ क्षेत्र B = 0.05 T है। प्रति फेरा फ्लक्स कितना है?
Φ = BA = 0.05 × (12.57 × 10⁻⁴ m²) ≈ 62.83 μWb। सिमुलेशन में चुंबक को कुंडली के केंद्र पर लाने पर फ्लक्स रीडिंग ठीक यही अधिकतम मान दिखाती है।
उदाहरण 2: एक समान दर से बदलता क्षेत्र
150 फेरों की एक कुंडली, क्षेत्रफल 0.02 m², एक चुंबकीय क्षेत्र में है जो 0.50 सेकंड में 0.20 T से 0.50 T तक बढ़ता है। औसत प्रेरित वि.वा.बल कितना है?
ΔΦ = ΔB × A = (0.50 − 0.20) × 0.02 = 6.0 mWb। e = N ΔΦ/Δt = 150 × 6.0 mWb / 0.50 s = 1.80 V।
उदाहरण 3: चलती हुई छड़ (गति-प्रेरित वि.वा.बल)
0.50 मीटर लंबी एक सीधी चालक छड़ 0.30 T के एक समान चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत 4.0 m/s की गति से चल रही है। इसके सिरों के बीच कितना वि.वा.बल प्रेरित होगा?
गति-प्रेरित वि.वा.बल का सूत्र e = BLv है। मान रखने पर e = 0.30 × 0.50 × 4.0 = 0.60 V। यह भी वही प्रेरण है, बस कुंडली की जगह एक छड़ के नज़रिए से देखा गया।
e = BLvजब B, L और v परस्पर लंबवत हों
उदाहरण 4: एक फेरे का फ्लक्स रैखिक रूप से बदलना
एक फेरे वाली कुंडली का फ्लक्स 0.20 सेकंड में 2.0 mWb से 8.0 mWb तक बढ़ता है। प्रेरित वि.वा.बल कितना है?
N = 1 लेते हुए, e = ΔΦ/Δt = (8.0 − 2.0) mWb / 0.20 s = 6.0 mWb/s = 30.0 mV। इतना छोटा वि.वा.बल संवेदनशील गैल्वेनोमीटर पर आसानी से दिखता है, पर बल्ब जलाने के लिए कहीं ज़्यादा फेरे चाहिए — इसीलिए असली जनरेटर में सैकड़ों फेरे लपेटे जाते हैं।
उदाहरण 5: लेंज़ का नियम और ओम का नियम एक साथ
2 ओम प्रतिरोध की एक कुंडली में एक चुंबक के पास आने से क्षण भर के लिए 6 V वि.वा.बल प्रेरित होता है। कितनी धारा बहेगी, और किस दिशा में?
I = e/R = 6 / 2 = 3.0 A। लेंज़ के नियम के अनुसार यह धारा ऐसी दिशा में बहेगी कि कुंडली का निकट फलक चुंबक के आते हुए ध्रुव जैसा ही बन जाए, ताकि चुंबक का आना रुके।
उदाहरण 6: AC जनरेटर का अधिकतम वि.वा.बल
एक AC जनरेटर में 500 फेरों की एक कुंडली, क्षेत्रफल 0.05 m², 0.40 T के क्षेत्र में 50 Hz (हमारी बिजली आपूर्ति जैसी आवृत्ति) पर घूम रही है। अधिकतम प्रेरित वि.वा.बल कितना है?
कोणीय वेग ω = 2πf = 2π × 50 ≈ 314.16 rad/s। घूमती कुंडली का अधिकतम वि.वा.बल e₀ = NBAω = 500 × 0.40 × 0.05 × 314.16 ≈ 3,141.6 V, यानी लगभग 3.14 kV। इतना बड़ा वोल्टेज सीधे घरों में न भेजकर ट्रांसफार्मरों से चरणबद्ध रूप से घटाया जाता है।
e₀ = NBAωω = 2πf, घूमती हुई कुंडली के लिए
उदाहरण 7: प्रतिरोध में क्षय होने वाली शक्ति
एक कुंडली में प्रेरित वि.वा.बल 12 V है, और उसका प्रतिरोध 6 ओम है। कुंडली में ऊष्मा के रूप में कितनी शक्ति क्षय होती है?
P = e²/R = 12² / 6 = 24.0 W। यही ऊष्मा भंवर धाराओं के कारण ट्रांसफार्मर के क्रोड में क्षय होती है, इसीलिए क्रोड को पतली-पतली परतों से बनाया जाता है ताकि भंवर धाराएँ कम हों।
उदाहरण 8: कुंडली से गुज़रने वाला कुल आवेश
300 फेरों की एक कुंडली में प्रति फेरा फ्लक्स 4.0 mWb बदलता है, और कुंडली का कुल प्रतिरोध 5 ओम है। इस बदलाव के दौरान कुंडली से कितना आवेश गुज़रेगा?
q = NΔΦ/R = 300 × 4.0 mWb / 5 = 0.24 C। ध्यान दो, इस सूत्र में समय कहीं नहीं आता — आवेश केवल कुल फ्लक्स-परिवर्तन पर निर्भर करता है, यह कितनी तेज़ी से हुआ इस पर नहीं।
फेरों की संख्या बढ़ाने पर प्रेरित वि.वा.बल कैसे बढ़ता है
फ्लक्स की दर स्थिर रखते हुए (यहाँ 5.0 mWb/s), e सीधे N के अनुपात में बढ़ता है, क्योंकि सूत्र में N सीधे गुणा होता है। सिमुलेशन में फेरों की स्लाइडर बदलकर यह अनुपात खुद जाँचा जा सकता है।
| फेरों की संख्या, N | फ्लक्स-परिवर्तन की दर | प्रेरित वि.वा.बल, e |
|---|---|---|
| 100 | 5.0 mWb/s | 0.50 V |
| 200 | 5.0 mWb/s | 1.00 V |
| 300 | 5.0 mWb/s | 1.50 V |
| 400 | 5.0 mWb/s | 2.00 V |
ये गलतियाँ सब करते हैं
इन गलतियों से बचने पर संख्यात्मक और वैचारिक, दोनों तरह के प्रश्नों में अंक कटने का डर नहीं रहता।
- बड़ा फ्लक्स होने का मतलब बड़ा वि.वा.बल समझ लेना। असल में ज़रूरी है परिवर्तन की दर; एक बड़ा मगर स्थिर फ्लक्स e = 0 ही देता है।
- ऋणात्मक चिह्न भूल जाना, या उसे सिर्फ सजावट समझना। यही चिह्न लेंज़ का नियम है — यही प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
- फ्लक्स Φ (प्रति फेरा) और फ्लक्स-सम्बद्धता NΦ (पूरी कुंडली) को गड्डमड्ड कर देना। कुंडली का कुल असर N के अनुपात में बढ़ता है।
- शर्त जाँचे बिना e = BLv लगा देना। यह तभी लागू होता है जब क्षेत्र, छड़ की लंबाई और वेग तीनों परस्पर लंबवत हों।
- गति-प्रेरित वि.वा.बल (e = BLv) और फैराडे के सामान्य नियम (e = −N dΦ/dt) को दो अलग-अलग सूत्र समझना। दोनों एक ही भौतिकी को अलग-अलग तरीके से बताते हैं।
- भंवर धाराओं को हमेशा नुकसानदेह समझना। ट्रांसफार्मर के क्रोड में ये ऊर्जा बर्बाद करती हैं, पर इंडक्शन चूल्हे या भंवर-धारा ब्रेक में यही धाराएँ काम आती हैं।
- यह मान लेना कि सुई हमेशा एक ही दिशा में झुकती रहेगी। चुंबक के कुंडली से गुज़रते ही झुकाव की दिशा पलट जाती है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में विद्युत चुंबकीय प्रेरण
परीक्षा से परे भी आधुनिक बिजली की दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी एक सिद्धांत पर टिका है।
- बिजलीघर के जनरेटर: टर्बाइन एक कुंडली या चुंबक घुमाता है, फ्लक्स बदलता है और भारी मात्रा में वि.वा.बल पैदा होता है।
- ट्रांसफार्मर: एक कुंडली का बदलता फ्लक्स पास की दूसरी कुंडली में वि.वा.बल प्रेरित करता है, फेरों के अनुपात में वोल्टेज घटाता-बढ़ाता है।
- वायरलेस चार्जिंग: दो कुंडलियों के बीच बदलता चुंबकीय क्षेत्र बिना किसी तार के ऊर्जा भेजता है।
- इंडक्शन चूल्हा: तेज़ी से बदलता क्षेत्र बर्तन के तले में सीधे भंवर धाराएँ पैदा करता है, धातु को खुद गरम करता है।
- मेटल डिटेक्टर और कॉन्टैक्टलेस कार्ड: बदलता क्षेत्र पास की धातु या चिप में धारा प्रेरित कर संकेत भेजता है।
- इलेक्ट्रिक कारों की रीजनरेटिव ब्रेकिंग: धीमा होते समय मोटर को जनरेटर की तरह चलाकर गतिज ऊर्जा वापस बैटरी में जमा की जाती है।
- गिटार पिकअप और कुछ माइक्रोफोन: कंपन करता तार या डायाफ्राम पास की कुंडली में फ्लक्स बदलकर गति को विद्युत संकेत में बदल देता है।
परीक्षा कॉर्नर
CBSE बोर्ड और JEE/NEET दोनों में विद्युत चुंबकीय प्रेरण एक स्थायी विषय है: फैराडे और लेंज़ के नियम की परिभाषा और व्युत्पत्ति, ऋणात्मक चिह्न के महत्व पर वैचारिक प्रश्न, और e = −N dΦ/dt या e = BLv पर आधारित संख्यात्मक प्रश्न — तीनों तरह के सवाल आम हैं। JEE/NEET में अक्सर एक साथ कई सूत्र (गति-प्रेरित वि.वा.बल, स्व-प्रेरण, ऊर्जा) जोड़कर पूछा जाता है, इसलिए हर सूत्र की शर्तें (लंबवत दिशाएँ, स्थिर दर) रटना नहीं, समझना ज़रूरी है।
एक सामान्य परीक्षा-प्रकार का प्रश्न
स्थिति: एक छात्र एक छड़ चुंबक को 150 फेरों की एक कुंडली की ओर तेज़ी से ले जाता है, फिर उसी गति से वापस खींच लेता है। गैल्वेनोमीटर की सुई पहले एक दिशा में, फिर दूसरी दिशा में झुकती है।
सामान्य प्रश्न: (क) चुंबकीय फ्लक्स की परिभाषा दो। (ख) लेंज़ का नियम लिखो। (ग) चुंबक को स्थिर रखने पर सुई क्यों नहीं हिलेगी, समझाओ। (घ) फैराडे और लेंज़ के नियमों की मदद से समझाओ कि सुई दोनों दिशाओं में क्यों झुकी।
(ग) का उत्तर: dΦ/dt = 0 होने पर e = −N dΦ/dt से सीधे e = 0 मिलता है। (घ) का उत्तर: पास आते समय फ्लक्स बढ़ता है और दूर जाते समय घटता है, इसलिए dΦ/dt का चिह्न बदल जाता है, और लेंज़ के नियम के अनुसार प्रेरित धारा की दिशा भी पलट जाती है — यही सुई के दोनों दिशा में झुकने के रूप में दिखता है।
रिवीज़न: एक स्क्रीन का सारांश
परीक्षा से एक रात पहले बस यह सूची और ऊपर की सारणी देख लेना काफ़ी है।
- विद्युत चुंबकीय प्रेरण: कुंडली से गुज़रने वाला फ्लक्स बदलने पर वि.वा.बल पैदा होता है। सिर्फ फ्लक्स होना काफ़ी नहीं, बदलना ज़रूरी है।
- फैराडे का नियम: e = −N dΦ/dt, या स्थिर दर पर e = −N ΔΦ/Δt।
- लेंज़ का नियम: प्रेरित धारा हमेशा अपने ही कारण का विरोध करती है — पास आते चुंबक को प्रतिकर्षित करती है, दूर जाते को आकर्षित।
- गति-प्रेरित वि.वा.बल: e = BLv, जब B, L और v परस्पर लंबवत हों।
- घूमती कुंडली का अधिकतम वि.वा.बल: e₀ = NBAω।
- e, N और dΦ/dt दोनों के समानुपाती है; फ्लक्स-सम्बद्धता = NΦ।
- भंवर धाराएँ: ठोस चालक के अंदर ही पैदा प्रेरित भँवर धाराएँ — ट्रांसफार्मर के क्रोड में नुकसानदेह, इंडक्शन चूल्हे में उपयोगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं?
जब किसी कुंडली से गुज़रने वाला चुंबकीय फ्लक्स समय के साथ बदलता है, तो उसमें एक वि.वा.बल प्रेरित होता है — इसे विद्युत चुंबकीय प्रेरण कहते हैं। इसे 1831 में माइकल फैराडे ने खोजा था।
फैराडे का नियम क्या कहता है?
प्रेरित वि.वा.बल फ्लक्स-सम्बद्धता के परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है, ऋणात्मक चिह्न के साथ: e = −N dΦ/dt, जहाँ N फेरों की संख्या है और Φ प्रति फेरा फ्लक्स है।
लेंज़ का नियम क्या है, और ऋणात्मक चिह्न का क्या मतलब है?
लेंज़ का नियम कहता है कि प्रेरित धारा हमेशा उसी दिशा में बहती है जो उस फ्लक्स-परिवर्तन का विरोध करे जिसने उसे पैदा किया। फैराडे के नियम का ऋणात्मक चिह्न ठीक यही दिशा बताता है।
क्या कुंडली के अंदर स्थिर चुंबक वि.वा.बल पैदा करता है?
नहीं। फ्लक्स बड़ा हो सकता है, पर वह बदल नहीं रहा, इसलिए dΦ/dt = 0 और e = −N × 0 = 0 होता है। सिमुलेशन में चुंबक को स्थिर रखने पर गैल्वेनोमीटर की सुई शून्य पर ही टिकी रहती है।
फेरों की संख्या बढ़ाने पर प्रेरित वि.वा.बल का क्या होता है?
एक स्थिर दर पर, e सीधे N के अनुपात में बढ़ता है, क्योंकि N सीधे दर को गुणा करता है। उदाहरण के लिए, एक स्थिर दर पर 200 फेरों की कुंडली, आधे फेरों वाली कुंडली से ठीक दोगुना वि.वा.बल देती है।
गति-प्रेरित वि.वा.बल का सूत्र e = BLv कब लागू होता है?
जब एक सीधी चालक छड़ एक समान चुंबकीय क्षेत्र में इस तरह चलती है कि क्षेत्र, छड़ की लंबाई और वेग तीनों परस्पर लंबवत हों। यह फैराडे के सामान्य नियम की ही एक विशेष स्थिति है।
भंवर धारा क्या है, और क्या यह हमेशा बुरी होती है?
बदलते फ्लक्स से किसी ठोस चालक के अंदर ही पैदा भँवर जैसी धारा को भंवर धारा कहते हैं। ट्रांसफार्मर के क्रोड में यह ऊष्मा के रूप में ऊर्जा बर्बाद करती है, पर इंडक्शन चूल्हे और भंवर-धारा ब्रेक में यही असर काम आता है।
जनरेटर का अधिकतम वि.वा.बल कैसे बढ़ाया जा सकता है?
सूत्र e₀ = NBAω के अनुसार फेरों की संख्या N, क्षेत्र की तीव्रता B, कुंडली का क्षेत्रफल A, या कोणीय वेग ω — इनमें से कोई भी बढ़ाने से अधिकतम वि.वा.बल बढ़ता है।
चुंबक को तेज़ खींचने पर गैल्वेनोमीटर की सुई ज़्यादा क्यों हिलती है?
तेज़ खींचने पर उतनी ही दूरी में फ्लक्स कम समय में बदलता है, इसलिए dΦ/dt बड़ा हो जाता है, और e = −N dΦ/dt के अनुसार प्रेरित वि.वा.बल व धारा भी बड़े हो जाते हैं, जिससे सुई ज़्यादा हिलती है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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প্রতিবেদন: বিজ্ঞান মেলা (बांग्ला में)
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प्रक्षेप्य गति
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कक्षा 10 · 12
गोलीय दर्पण किरण आरेख
अवतल और उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनना, ध्रुव, वक्रता केंद्र, मुख्य फोकस, दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u: बिंब खींचकर किरण आरेख ख़ुद देखें।
कक्षा 9 · 11
संवेग संरक्षण और संघट्ट
संवेग संरक्षण का नियम क्या है? दो गाड़ियों को टकराओ और प्रत्यावस्थान गुणांक e को 0 (चिपकना) से 1 (प्रत्यास्थ) तक बदलो। संवेग और गतिज ऊर्जा के बार-चार्ट लाइव देखो, हल किए गए उदाहरणों के साथ।
कक्षा 9 · 11
कार्य, ऊर्जा और शक्ति
कार्य किसे कहते हैं, गतिज व स्थितिज ऊर्जा और शक्ति के सूत्र क्या हैं: घुमावदार पथ पर लुढ़कती कार्ट की सिमुलेशन में ऊर्जा का रूपांतरण देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 11 · JEE
आनत तल
ढलान पर भार कैसे दो भागों में बँटता है, विराम कोण क्या है, घर्षण ब्लॉक को कब रोकता है और कब फिसलने देता है — कोण बदलकर बल-चित्र में स्वयं देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।
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