बिंदु P को वृत्त पर घुमाएँ, या ग्राफ़ पर खींचकर कोण चुनें
नियंत्रण
कोण की इकाई
मापन
- कोण, θ
- 30.0°
- रेडियन में θ
- π/6
- sin θ (लंब)
- 0.5000
- cos θ (आधार)
- 0.8660
- tan θ
- 0.5774
- चतुर्थांश
- पहला चतुर्थांश
- संदर्भ कोण
- 30.0°
- sin²θ + cos²θ
- 1.0000
- सटीक मान (sin, cos)
- 1/2, √3/2
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- वृत्त पर बैंगनी बिंदु P को पकड़कर घुमाएँ: हरी रेखा cos θ है, लाल रेखा sin θ और पीली रेखा tan θ।
- दाईं ओर के ग्राफ़ पर खींचने से भी कोण बदलता है: बाएँ से दाएँ 0° से 360° तक।
- "मानक कोणों पर रोकें" चालू करें और 30°, 45°, 60° पर रुककर √3/2, 1/√2 जैसे सटीक मान देखें।
- ▶ दबाने पर P एक समान गति से घूमता है और ग्राफ़ पर sin व cos की तरंगें बनती जाती हैं; 0.25× पर धीरे देखें।
- कोण की इकाई "रेडियन" करने पर ग्राफ़ की अक्ष पर π/2, π, 3π/2 और 2π दिखेंगे।
- मापन पैनल में sin²θ + cos²θ पर नज़र रखें: हर कोण पर यह 1 रहता है, यही मूल सर्वसमिका है।
झूला, परछाईं और पेड़ की ऊँचाई: त्रिकोणमिति कहाँ है
मेले में बड़े झूले (जायंट व्हील) पर बैठे हो? आप एक वृत्त में घूमते हैं और आपकी ऊँचाई लगातार बदलती है: ऊपर, सबसे ऊपर, फिर नीचे। केंद्र से आप कितने ऊपर हैं, वही sin है, और केंद्र से कितने दाएँ-बाएँ हैं, वही cos। इस पेज का सिमुलेशन यही झूला है, बस इसकी त्रिज्या 1 है।
एक और उदाहरण: किसी खंभे की परछाईं और सूरज का कोण पता हो, तो खंभे पर चढ़े बिना उसकी ऊँचाई बताई जा सकती है। प्राचीन मिस्र में पिरामिड की ऊँचाई ऐसे ही मापी गई थी। जहाँ फ़ीता नहीं पहुँचता, वहाँ त्रिकोणमिति पहुँचती है।
त्रिकोणमिति का अर्थ है त्रिभुज का मापन। पर आगे चलकर पता चलता है कि यह सिर्फ़ त्रिभुज की बात नहीं; घूमते पहिए, तरंगें, ध्वनि, बिजली और कंप्यूटर ग्राफ़िक्स, सब sin और cos की भाषा बोलते हैं।
समकोण त्रिभुज में त्रिकोणमितीय अनुपात
एक समकोण त्रिभुज लीजिए और उसका एक न्यून कोण θ चुनिए। अब θ के हिसाब से भुजाओं के नाम रखिए: θ के सामने की भुजा लंब है, θ से लगी हुई छोटी भुजा आधार है, और समकोण के सामने की सबसे बड़ी भुजा कर्ण है।
ध्यान दें कि लंब और आधार कोण पर निर्भर करते हैं। दूसरा न्यून कोण चुनें तो लंब और आधार आपस में बदल जाते हैं, पर कर्ण वही रहता है। परीक्षा में सबसे ज़्यादा गलती यहीं होती है।
तीन भुजाओं में से दो-दो लेकर छह अनुपात बनते हैं: sine, cosine, tangent और इनके उलटे cosecant, secant, cotangent। मज़ेदार बात: कोण वही रहे तो त्रिभुज छोटा हो या बड़ा, अनुपात का मान वही रहता है, क्योंकि समरूप त्रिभुजों की सभी भुजाएँ एक ही अनुपात में बढ़ती-घटती हैं। इसलिए अनुपात सिर्फ़ कोण पर निर्भर है।
sin θ = लंब / कर्णसाइन
cos θ = आधार / कर्णकोसाइन
tan θ = लंब / आधार = sin θ / cos θटैन्जेंट
त्रिभुज से इकाई वृत्त तक: P = (cos θ, sin θ) क्यों
अब एक चतुराई करते हैं। मूल बिंदु O को केंद्र मानकर त्रिज्या 1 का वृत्त बनाइए, इसे इकाई वृत्त कहते हैं। धनात्मक x-अक्ष से वामावर्त θ कोण घूमकर वृत्त पर बिंदु P लीजिए।
P से x-अक्ष पर लंब डालिए। एक समकोण त्रिभुज बना जिसका कर्ण OP = 1 है। तो sin θ = लंब/1 = P की ऊँचाई और cos θ = आधार/1 = P की क्षैतिज दूरी। यानी P के निर्देशांक ठीक (cos θ, sin θ) हैं। कर्ण 1 हो तो भाग देने की ज़रूरत ही नहीं।
सबसे बड़ा फ़ायदा: अब θ का न्यून कोण होना ज़रूरी नहीं। P दूसरे, तीसरे या चौथे चतुर्थांश में जाए तब भी उसके निर्देशांक हैं, इसलिए 120°, 210° और 330° के भी sin और cos होते हैं। निर्देशांक ऋणात्मक हो तो अनुपात भी ऋणात्मक।
सिमुलेशन θ = 30° से शुरू होता है। तब P की ऊँचाई 0.50 है, यानी sin 30° = 0.50, और क्षैतिज दूरी cos 30° ≈ 0.866। इनका अनुपात tan 30° ≈ 0.577। मापन पैनल खोलकर मिलाइए।
tan θ का भी एक चित्र है। x = 1 पर वृत्त को छूने वाली खड़ी रेखा (स्पर्श रेखा) सोचिए। OP को बढ़ाइए, जहाँ वह इस रेखा से मिले, उस बिंदु की ऊँचाई tan θ है; इसी से नाम टैन्जेंट (स्पर्शी) पड़ा। 90° के पास OP लगभग खड़ी हो जाती है और रेखा से मिलती ही नहीं, इसलिए tan 90° अपरिभाषित है।
मानक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात (तालिका)
0°, 30°, 45°, 60° और 90° मानक कोण कहलाते हैं और परीक्षा के ज़्यादातर प्रश्न इन्हीं पर होते हैं। नीचे की तालिका का हर मान कोड में गणना किया गया है: पहले सटीक रूप (करणी), फिर दशमलव।
30° और 60° के मान समबाहु त्रिभुज से आते हैं। भुजा 2 लेकर बीच से काटें तो 30°-60°-90° के दो त्रिभुज मिलते हैं जिनकी भुजाएँ 1, √3, 2 हैं; इसलिए sin 30° = 1/2 और sin 60° = √3/2। 45° के मान समद्विबाहु समकोण त्रिभुज (भुजाएँ 1, 1, √2) से आते हैं, इसलिए sin 45° = cos 45° = 1/√2।
| कोण θ | रेडियन | sin θ | cos θ | tan θ |
|---|---|---|---|---|
| 0° | 0 | 0 ≈ 0.000 | 1 ≈ 1.000 | 0 ≈ 0.000 |
| 30° | π/6 | 1/2 ≈ 0.500 | √3/2 ≈ 0.866 | 1/√3 ≈ 0.577 |
| 45° | π/4 | 1/√2 ≈ 0.707 | 1/√2 ≈ 0.707 | 1 ≈ 1.000 |
| 60° | π/3 | √3/2 ≈ 0.866 | 1/2 ≈ 0.500 | √3 ≈ 1.732 |
| 90° | π/2 | 1 ≈ 1.000 | 0 ≈ 0.000 | अपरिभाषित |
चार चतुर्थांश और चिह्नों का नियम (ASTC)
अक्ष तल को चार भागों में बाँटते हैं। पहले चतुर्थांश (0° से 90°) में x और y दोनों धनात्मक, इसलिए सभी अनुपात धनात्मक। दूसरे (90° से 180°) में x ऋणात्मक और y धनात्मक, इसलिए केवल sin (और cosec) धनात्मक। तीसरे (180° से 270°) में दोनों ऋणात्मक, इसलिए उनका भागफल tan धनात्मक। चौथे (270° से 360°) में केवल x धनात्मक, इसलिए cos धनात्मक।
याद रखने की पंक्ति: Add Sugar To Coffee, यानी All, Sin, Tan, Cos। सिमुलेशन में जिस चतुर्थांश में P है वह चमकता है और वहाँ कौन-सा अनुपात धनात्मक है, लिखा दिखता है।
किसी भी कोण का मान तीन चरणों में: (1) चतुर्थांश पहचानें, (2) संदर्भ कोण निकालें, यानी x-अक्ष से बना न्यून कोण, (3) उस न्यून कोण का मान लिखकर चतुर्थांश के अनुसार चिह्न लगाएँ। नीचे की तालिका इसी नियम से गणना की गई है।
| कोण θ | चतुर्थांश | संदर्भ कोण | sin θ | cos θ | tan θ |
|---|---|---|---|---|---|
| 120° | दूसरा चतुर्थांश | 60° | √3/2 ≈ 0.866 | −1/2 ≈ -0.500 | −√3 ≈ -1.732 |
| 135° | दूसरा चतुर्थांश | 45° | 1/√2 ≈ 0.707 | −1/√2 ≈ -0.707 | −1 ≈ -1.000 |
| 150° | दूसरा चतुर्थांश | 30° | 1/2 ≈ 0.500 | −√3/2 ≈ -0.866 | −1/√3 ≈ -0.577 |
| 210° | तीसरा चतुर्थांश | 30° | −1/2 ≈ -0.500 | −√3/2 ≈ -0.866 | 1/√3 ≈ 0.577 |
| 240° | तीसरा चतुर्थांश | 60° | −√3/2 ≈ -0.866 | −1/2 ≈ -0.500 | √3 ≈ 1.732 |
| 300° | चौथा चतुर्थांश | 60° | −√3/2 ≈ -0.866 | 1/2 ≈ 0.500 | −√3 ≈ -1.732 |
| 330° | चौथा चतुर्थांश | 30° | −1/2 ≈ -0.500 | √3/2 ≈ 0.866 | −1/√3 ≈ -0.577 |
व्युत्क्रम अनुपात: cosec, sec, cot
पहले तीन अनुपातों को उलट दें तो बाकी तीन मिलते हैं। cosec θ, sin θ का व्युत्क्रम है; sec θ, cos θ का; और cot θ, tan θ का। जोड़ी याद रखने का नियम: हर जोड़ी में ठीक एक "co" होता है, इसलिए sin के साथ cosec और cos के साथ sec।
जिस अनुपात का मान शून्य हो, उसका व्युत्क्रम अपरिभाषित होता है, क्योंकि शून्य से भाग नहीं दे सकते। sin 0° = 0, इसलिए cosec 0° अपरिभाषित; cos 90° = 0, इसलिए sec 90° और tan 90° अपरिभाषित।
cosec θ = 1 / sin θ = कर्ण / लंब
sec θ = 1 / cos θ = कर्ण / आधार
cot θ = 1 / tan θ = cos θ / sin θ
त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ और सूत्र
इकाई वृत्त पर P = (cos θ, sin θ) केंद्र से 1 दूरी पर है। पाइथागोरस प्रमेय लगाएँ तो cos²θ + sin²θ = 1 मिलता है। यह त्रिकोणमिति की सबसे महत्वपूर्ण सर्वसमिका है, और सिमुलेशन का मापन पैनल हर कोण पर इसे 1 दिखाता है।
दोनों पक्षों को cos²θ से भाग दें तो 1 + tan²θ = sec²θ मिलता है। sin²θ से भाग दें तो 1 + cot²θ = cosec²θ। तीनों सर्वसमिकाएँ असल में एक ही सूत्र के तीन रूप हैं।
पूरक कोणों के सूत्र भी काम के हैं। समकोण त्रिभुज के दोनों न्यून कोणों का योग 90° है, और एक का लंब दूसरे का आधार है। इसलिए sin(90° − θ) = cos θ और cos(90° − θ) = sin θ; इसी कारण sin 30° = cos 60° = 1/2।
sin²θ + cos²θ = 1मूल सर्वसमिका (पाइथागोरस से)
1 + tan²θ = sec²θ
1 + cot²θ = cosec²θ
sin(90° − θ) = cos θ, cos(90° − θ) = sin θपूरक कोण
sin(180° − θ) = sin θ, cos(180° − θ) = −cos θसंबद्ध कोण
डिग्री और रेडियन
डिग्री में पूरा चक्कर 360° होता है। रेडियन अलग तरह से मापता है: त्रिज्या के बराबर लंबाई का चाप केंद्र पर जो कोण बनाता है, वह 1 रेडियन है। पूरे वृत्त की परिधि 2πr है, इसलिए पूरा चक्कर 2π रेडियन।
यानी π रेडियन = 180°। डिग्री से रेडियन के लिए π/180 से गुणा करें, रेडियन से डिग्री के लिए 180/π से। 1 रेडियन ≈ 57.30°, यानी लगभग 57 डिग्री।
इकाई वृत्त पर रेडियन का सुंदर अर्थ है: त्रिज्या 1 हो तो P ने जितना चाप तय किया, वही कोण का रेडियन मान है। कक्षा 11 और कैलकुलस में लगभग हमेशा रेडियन चलता है, इसलिए सिमुलेशन में इकाई बदलकर अभ्यास करें।
π rad = 180°
रेडियन = डिग्री × π / 180
डिग्री = रेडियन × 180 / π
sin, cos और tan के ग्राफ़
P घूमता है तो उसकी ऊँचाई (sin θ) 0 से बढ़कर 1, फिर 0, फिर −1 और वापस 0 होती है। इसे कोण के सामने प्लॉट करें तो एक चिकनी तरंग मिलती है, यही sin का ग्राफ़ है। सिमुलेशन में P से एक डैश रेखा सीधे ग्राफ़ तक जाती है, क्योंकि वृत्त की ऊँचाई ही ग्राफ़ की ऊँचाई है।
cos का ग्राफ़ भी वैसी ही तरंग है, बस 90° खिसकी हुई: cos 0° = 1 से शुरू होकर नीचे आती है। दोनों का आयाम (amplitude) 1 और आवर्तकाल (period) 360° यानी 2π है; हर पूरे चक्कर के बाद वही आकार दोहराता है।
tan का ग्राफ़ बिल्कुल अलग है। यह −∞ से +∞ तक जाता है और 90° व 270° पर टूट जाता है, जहाँ cos θ = 0 है; इसका आवर्तकाल केवल 180° है। tan विकल्प चालू करके पीली वक्र देखें।
- sin θ: परिसर −1 से 1, आवर्तकाल 360°, 0 से शुरू
- cos θ: परिसर −1 से 1, आवर्तकाल 360°, 1 से शुरू
- tan θ: परिसर सभी वास्तविक संख्याएँ, आवर्तकाल 180°, 90° और 270° पर अपरिभाषित
सिमुलेशन में खुद प्रयोग करें
पढ़ने से ज़्यादा करके याद रहता है। ये पाँच प्रयोग कीजिए और परिणाम कॉपी में लिखिए।
- P को 45° पर रखें: लाल और हरी रेखाएँ बराबर, क्योंकि sin 45° = cos 45°।
- 30° और 150° पर लाल रेखा की लंबाई मिलाएँ: दोनों बराबर, क्योंकि sin(180° − θ) = sin θ।
- P को 90° के बहुत पास ले जाएँ: पीली tan रेखा आसमान छूने लगती है और ठीक 90° पर "अपरिभाषित" लिखा आता है।
- किसी भी कोण पर रोककर sin²θ + cos²θ देखें: हमेशा 1।
- ▶ दबाकर एक पूरा चक्कर लगने दें: sin और cos की तरंगें एक-दूसरे से 90° आगे-पीछे चलती हैं।
हल सहित उदाहरण
नीचे का हर उत्तर कोड में गणना किया गया है। पहले खुद हल करें, फिर मिलाएँ।
उदाहरण 1: मीनार की ऊँचाई
मीनार के पाद से 20 m दूर खड़े होकर आप उसकी चोटी को 60° के उन्नयन कोण पर देखते हैं। मीनार कितनी ऊँची है?
आधार = 20 m, लंब = h, कोण 60°। लंब और आधार हैं, इसलिए tan: tan 60° = h/20। tan 60° ≈ 1.732, तो h = 20 × 1.732 ≈ 34.64 m।
उदाहरण 2: पतंग की ऊँचाई
पतंग की डोर 50 m लंबी है और ज़मीन से 30° का कोण बनाती है। पतंग कितनी ऊँचाई पर है?
डोर कर्ण है और ऊँचाई लंब, इसलिए sin 30° = h/50, यानी h = 50 × 1/2 = 25 m।
उदाहरण 3: एक अनुपात से बाकी सब
यदि sin θ = 3/5 और θ न्यून कोण है, तो बाकी पाँच अनुपात ज्ञात कीजिए।
लंब 3, कर्ण 5। पाइथागोरस से आधार = √(5² − 3²) = 4। तो cos θ = 4/5 = 0.80, tan θ = 3/4 = 0.75, cosec θ ≈ 1.667, sec θ = 1.25 और cot θ ≈ 1.333।
उदाहरण 4: मानक मान रखकर हल
sin²30° + cos²60° + tan²45° का मान ज्ञात कीजिए।
(1/2)² + (1/2)² + (1)² = 1/4 + 1/4 + 1 = 1.50।
उदाहरण 5: सर्वसमिका पहचानिए
(1 − tan²30°)/(1 + tan²30°) का मान ज्ञात कीजिए।
tan 30° = 1/√3, इसलिए tan²30° = 1/3। मान = (1 − 1/3)/(1 + 1/3) = (2/3)/(4/3) = 0.50। यह cos 60° के बराबर है, क्योंकि (1 − tan²θ)/(1 + tan²θ) = cos 2θ।
उदाहरण 6: संबद्ध कोण
sin 150°, cos 210° और tan 315° ज्ञात कीजिए।
150° दूसरे चतुर्थांश में है, संदर्भ कोण 30°, sin धनात्मक: sin 150° = 0.50। 210° तीसरे चतुर्थांश में, संदर्भ कोण 30°, cos ऋणात्मक: cos 210° ≈ -0.866। 315° चौथे चतुर्थांश में, संदर्भ कोण 45°, tan ऋणात्मक: tan 315° = -1.00।
उदाहरण 7: डिग्री और रेडियन
75° को रेडियन में और 2 रेडियन को डिग्री में बदलिए।
75° × π/180 = 5π/12 ≈ 1.309 रेडियन, और 2 × 180/π ≈ 114.59°।
उदाहरण 8: परछाईं से सूर्य का उन्नयन कोण
10 m ऊँचे खंभे की परछाईं 17.32 m (यानी 10√3 m) है। सूर्य का उन्नयन कोण क्या है?
tan θ = 10/(10√3) = 1/√3, इसलिए θ = 30°।
उदाहरण 9: चिह्न से कोण ढूँढना
यदि cos θ = −1/2 और θ दूसरे चतुर्थांश में है, तो θ, sin θ और tan θ ज्ञात कीजिए।
cos 60° = 1/2, इसलिए संदर्भ कोण 60°। दूसरे चतुर्थांश में θ = 180° − 60° = 120°। sin θ धनात्मक ≈ 0.866 और tan θ ऋणात्मक ≈ -1.732।
उदाहरण 10: दीवार से टिकी सीढ़ी
6 m लंबी सीढ़ी दीवार से टिकी है और ज़मीन से 60° का कोण बनाती है। सीढ़ी दीवार पर कितनी ऊँचाई तक पहुँचती है और उसका पाद दीवार से कितनी दूर है?
ऊँचाई = 6 × sin 60° = 6 × √3/2 ≈ 5.196 m। पाद की दूरी = 6 × cos 60° = 3 m।
आम गलतियाँ
इनसे बचें तो कई अंक बच जाते हैं।
- लंब और आधार में गड़बड़: कोण बदलने पर ये बदलते हैं, कर्ण कभी नहीं।
- sin²θ को sin(θ²) समझना: sin²θ का अर्थ (sin θ)² है।
- sin(A + B) = sin A + sin B लिखना: गलत, sin 30° + sin 60° ≠ sin 90°।
- कैलकुलेटर रेडियन मोड में रखकर डिग्री वाला प्रश्न करना: sin 30 का उत्तर 0.5 न आए तो मोड देखें।
- tan 90° को "अनंत" या 1 लिखना: सही उत्तर अपरिभाषित है।
- चतुर्थांश का चिह्न भूल जाना: cos 120° ऋणात्मक है, धनात्मक नहीं।
असल ज़िंदगी में त्रिकोणमिति
सर्वेक्षक और इंजीनियर थियोडोलाइट से कोण मापकर नदी की चौड़ाई, पहाड़ की ऊँचाई और ज़मीन की सीमा निकालते हैं। वास्तुकार छत की ढलान और सीढ़ियों का कोण tan से तय करते हैं।
फ़ोन का GPS, गेम में किरदार का घूमना, फ़ोटो को घुमाना: कोड के अंदर sin और cos हर सेकंड हज़ारों बार चलते हैं। घर की बिजली (AC) और ध्वनि तरंगें दोनों sin तरंग का पालन करती हैं।
जहाज़ और विमान का मार्ग, सूरज की ओर सोलर पैनल झुकाना और क्रिकेट गेंद के पथ का विश्लेषण, सबमें त्रिकोणमिति लगती है।
परीक्षा कॉर्नर: CBSE, राज्य बोर्ड और JEE
CBSE कक्षा 10 में "त्रिकोणमिति का परिचय" और "त्रिकोणमिति के कुछ अनुप्रयोग" से तीन तरह के प्रश्न आते हैं: एक अनुपात दिया हो तो बाकी निकालना, सर्वसमिका सिद्ध करना या मानक कोणों पर मान निकालना, और उन्नयन या अवनमन कोण से ऊँचाई और दूरी के प्रश्न।
कक्षा 11 के "त्रिकोणमितीय फलन" में संबद्ध कोण, चतुर्थांश के चिह्न, रेडियन और ग्राफ़ पर ज़ोर होता है। JEE Main और दूसरी प्रवेश परीक्षाओं में मानक मान, आवर्तकाल और चिह्नों पर तेज़ प्रश्न आते हैं।
तैयारी की रणनीति: मानक कोणों की तालिका रटने के बजाय रोज़ एक बार खुद बनाइए, sin²θ + cos²θ = 1 से बाकी सर्वसमिकाएँ निकालने का अभ्यास कीजिए, और ऊँचाई-दूरी के हर प्रश्न में पहले चित्र बनाइए।
एक नज़र में दोहराव
परीक्षा से पहली रात बस यह सूची देख लीजिए।
- sin = लंब/कर्ण, cos = आधार/कर्ण, tan = लंब/आधार
- इकाई वृत्त पर P = (cos θ, sin θ); tan θ स्पर्श रेखा पर ऊँचाई है
- sin²θ + cos²θ = 1, 1 + tan²θ = sec²θ, 1 + cot²θ = cosec²θ
- चिह्न: All, Sin, Tan, Cos (पहले से चौथे चतुर्थांश तक)
- π रेडियन = 180°; sin और cos का आवर्तकाल 360°, tan का 180°
- tan 90°, sec 90°, cosec 0° और cot 0° अपरिभाषित हैं
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
त्रिकोणमितीय अनुपात क्या है?
समकोण त्रिभुज के किसी न्यून कोण के सापेक्ष दो भुजाओं का अनुपात त्रिकोणमितीय अनुपात है। कुल छह हैं: sin, cos, tan, cosec, sec और cot।
इकाई वृत्त क्या है?
मूल बिंदु पर केंद्र वाला त्रिज्या 1 का वृत्त। उस पर कोण θ वाले बिंदु के निर्देशांक (cos θ, sin θ) होते हैं, इसलिए यह हर कोण के sin और cos एक साथ दिखाता है।
sin 30°, cos 60° और tan 45° का मान क्या है?
sin 30° = 1/2, cos 60° = 1/2 और tan 45° = 1। तुलना के लिए sin 45° ≈ 0.707 और sin 60° ≈ 0.866।
tan 90° अपरिभाषित क्यों है?
tan θ = sin θ/cos θ और cos 90° = 0। शून्य से भाग का कोई मान नहीं होता, इसलिए tan 90° अपरिभाषित है।
किस चतुर्थांश में कौन-सा अनुपात धनात्मक है?
पहले में सभी, दूसरे में sin और cosec, तीसरे में tan और cot, चौथे में cos और sec। याद रखें: Add Sugar To Coffee।
त्रिकोणमिति की टेबल आसानी से कैसे याद करें?
sin के लिए 0, 1, 2, 3, 4 को 4 से भाग देकर वर्गमूल लें; उल्टे क्रम में cos; और sin को cos से भाग देकर tan।
1 रेडियन कितनी डिग्री है?
π रेडियन = 180°, इसलिए 1 रेडियन ≈ 57.30° और 1° = π/180 रेडियन।
sin²θ + cos²θ हमेशा 1 क्यों होता है?
इकाई वृत्त पर बिंदु (cos θ, sin θ) केंद्र से 1 इकाई दूर है, इसलिए पाइथागोरस से cos²θ + sin²θ = 1² हर कोण के लिए।
संदर्भ कोण क्या होता है?
किसी कोण की अंतिम भुजा और x-अक्ष के बीच का न्यून कोण। किसी भी कोण के अनुपात उसके संदर्भ कोण के अनुपात के बराबर होते हैं, चिह्न चतुर्थांश से तय होता है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
Admission
CUET admission 2026-27
SSC
SSC Mathematics: syllabus and preparation
SSC
SSC Higher Mathematics: syllabus and preparation
HSC
HSC Higher Mathematics: syllabus and preparation
Textbook
Class 9-10 Mathematics textbook
Textbook
Class 9-10 Higher Mathematics textbook
Admission
Engineering admission test preparation
Admission
Jahangirnagar University mathematical and physical sciences unit
English
Paragraph: Artificial Intelligence
Bangla
রচনা: কৃত্রিম বুদ্ধিমত্তা (बांग्ला में)
SSC
SSC suggestions
HSC
HSC suggestions
Admission
University admission guide
SSC
SSC syllabus
HSC
HSC syllabus
गणित के और एनिमेशन
कक्षा 7 · 10
पाइथागोरस प्रमेय
पाइथागोरस प्रमेय क्या है, सूत्र कर्ण² = आधार² + लंब², प्रमाण, विलोम, पाइथागोरस त्रिक और हल सहित 10 उदाहरण: त्रिभुज खींचकर खुद देखें।
कक्षा 10 · 11
द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़
द्विघात समीकरण क्या है, गुणनखंड और पूर्ण वर्ग विधि, द्विघाती सूत्र, विविक्तकर से मूलों की प्रकृति, शीर्ष और परवलय का ग्राफ़: एनिमेशन में खुद बदलकर देखें।
कक्षा 9 · 10
वृत्त के प्रमेय
वृत्त के सभी प्रमेय: केंद्र पर कोण, एक ही वृत्तखंड के कोण, अर्धवृत्त में कोण, चक्रीय चतुर्भुज, जीवा और स्पर्श रेखा। उपपत्ति, हल उदाहरण और इंटरैक्टिव चित्र।
कक्षा 10
ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
उन्नयन कोण और अवनमन कोण का मतलब क्या है, ऊँचाई-दूरी का सूत्र कैसे काम करता है, और बिना नापे मीनार की ऊँचाई दो बार का कोण देखकर कैसे निकाली जाती है — इंटरैक्टिव सिमुलेशन और हल सहित।
कक्षा 10 · 11
प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
प्रायिकता किसे कहते हैं, प्रतिदर्श समष्टि और सूत्र P(E) = n(E)/n(S) कैसे काम करता है, और बार-बार उछालने पर प्रयोगसिद्ध दर सैद्धांतिक प्रायिकता के कितने पास आ जाती है — सिक्के, पासे और रंगीन गेंदों के इंटरैक्टिव सिमुलेशन में।
कक्षा 10 · 11
समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
समांतर श्रेढ़ी और गुणोत्तर श्रेढ़ी के n-वें पद व योग के सूत्र, गाउस की जोड़ी तकनीक और अनंत श्रेढ़ी के सूत्र a/(1−r) को बार-चार्ट एनिमेशन में स्वयं बदलकर समझें, हल किए गए उदाहरणों के साथ।
कक्षा 9 · 10
माध्य, माध्यिका और बहुलक
माध्य, माध्यिका और बहुलक निकालने के सूत्र, अपवाद (आउटलायर) मिलने पर माध्यिका क्यों नहीं बदलती जबकि माध्य बहुत बदल जाता है, और वर्गीकृत आँकड़ों की माध्यिका-बहुलक सूत्र: संख्या रेखा पर बिंदु खींचकर स्वयं देखें, हल किए गए उदाहरणों के साथ।
अन्य विषयों के एनिमेशन
भौतिकी
प्रकाश का अपवर्तन
भौतिकी
ओम का नियम
भौतिकी
प्रक्षेप्य गति
भौतिकी
सरल लोलक
भौतिकी
विद्युत क्षेत्र
भौतिकी
तरंगों का व्यतिकरण
भौतिकी
मुक्त पतन
भौतिकी
लेंस द्वारा प्रतिबिंब
भौतिकी
न्यूटन के गति के नियम
भौतिकी
गोलीय दर्पण किरण आरेख
भौतिकी
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
भौतिकी
संवेग संरक्षण और संघट्ट
भौतिकी
कार्य, ऊर्जा और शक्ति
भौतिकी
आनत तल
रसायन विज्ञान
परमाणु की संरचना
रसायन विज्ञान
अम्ल, क्षारक और pH मान
रसायन विज्ञान
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
रसायन विज्ञान
गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT
रसायन विज्ञान
आयनिक बंध कैसे बनता है
रसायन विज्ञान
वैद्युत अपघटन और फैराडे के नियम
रसायन विज्ञान
सहसंयोजक बंध
रसायन विज्ञान
आवर्त सारणी की आवर्तिता
जीव विज्ञान
समसूत्री कोशिका विभाजन
जीव विज्ञान
विसरण और परासरण
जीव विज्ञान
प्रकाश संश्लेषण
जीव विज्ञान
मानव हृदय की संरचना और कार्य
जीव विज्ञान
मेंडल के आनुवंशिकता नियम
जीव विज्ञान
डीएनए प्रतिकृति
जीव विज्ञान
कोशिकीय श्वसन
जीव विज्ञान
एंजाइम क्रिया
जीव विज्ञान
तंत्रिका आवेग और एक्शन पोटेंशियल
जीव विज्ञान
नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
जीव विज्ञान
अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)
जीव विज्ञान






















