निशाना लगाने के लिए मंच पर खींचें — दिशा से कोण, लंबाई से वेग
नियंत्रण
गुरुत्वीय त्वरण, g (m/s²)
मापन
- समय, t
- 0.00s
- क्षैतिज दूरी, x
- 0.0m
- ऊँचाई, y
- 0.0m
- परिणामी वेग, v
- 20.0m/s
- क्षैतिज वेग, vₓ
- 14.1m/s
- ऊर्ध्वाधर वेग, vᵧ
- 14.1m/s
- अधिकतम ऊँचाई, H
- 10.2m
- क्षैतिज परास, R
- 40.8m
- उड्डयन काल, T
- 2.89s
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- वेग और कोण के स्लाइडर खिसकाएँ, या मंच पर खींचकर सीधे निशाना लगाएँ — खींचने की दिशा से कोण और लंबाई से वेग तय होता है।
- "पिछले प्रक्षेपण रखें" चालू रखकर 30° और फिर 60° पर फेंकें — दोनों का परास बराबर होगा।
- ग्रह बदलें: चंद्रमा पर g कम है, इसलिए वही प्रक्षेपण कहीं दूर और ऊँचा जाता है।
- हरा तीर (vₓ) पूरे पथ में नहीं बदलता; लाल तीर (vᵧ) शिखर पर शून्य होकर दिशा बदलता है।
- गति 0.25× करके धीरे देखें और किसी भी पल रोककर मापन पैनल के मान कॉपी में मिलाएँ।
छक्का, कबड्डी की छलांग और फव्वारा — सब प्रक्षेप्य हैं
क्रिकेट में जब बल्लेबाज़ गेंद को हवा में उठाकर छक्का मारता है, तो क्या आपने देखा है कि गेंद सीधी रेखा में नहीं जाती? पहले ऊपर उठती है, एक पल के लिए जैसे रुक जाती है, फिर मुड़कर बाउंड्री के बाहर गिरती है। यही मुड़ा हुआ रास्ता आज का विषय है।
कबड्डी में खिलाड़ी जब छलांग लगाकर पाला पार करता है, तो उसका शरीर भी एक वक्र रेखा में चलता है। और मान लीजिए आप नीचे से छत पर खड़े दोस्त की ओर गेंद फेंकते हैं — सीधा ऊपर फेंकेंगे तो गेंद आपके ही सिर पर लौटेगी, सीधा सामने फेंकेंगे तो छत तक पहुँचेगी ही नहीं। इसलिए आप अपने-आप एक कोण चुनते हैं — थोड़ा ऊपर, थोड़ा आगे। यही "कोण का चुनाव" प्रक्षेप्य गति की भौतिकी है।
पार्क के फव्वारे को देखिए — पानी की हर धार एक सुंदर मेहराब बनाती है। पानी की हर बूँद असल में एक छोटा प्रक्षेप्य है। गेंद, तीर, कूदता मेंढक, डस्टबिन की ओर उछाला गया कागज़ — सब एक ही नियम मानते हैं। नियम समझ लिया तो आप फेंकने से पहले ही बता सकेंगे कि वस्तु कितनी ऊँची जाएगी, कहाँ गिरेगी और कितनी देर हवा में रहेगी।
बिलकुल शुरुआत से: प्रक्षेप्य गति असल में दो अलग गतियाँ हैं
प्रक्षेप्य गति समझने की सबसे बड़ी तरकीब है गति को दो हिस्सों में बाँटना — एक क्षैतिज (दाएँ-बाएँ) और एक ऊर्ध्वाधर (ऊपर-नीचे)। मज़े की बात यह है कि ये दोनों गतियाँ एक-दूसरे पर कोई असर नहीं डालतीं। दोनों अपने-अपने ढंग से चलती हैं और मिलकर वक्र पथ बनाती हैं।
क्षैतिज दिशा में क्या होता है? गेंद हाथ से छूटने के बाद उसे आगे धकेलने वाला कोई नहीं, पीछे खींचने वाला भी कोई नहीं (फ़िलहाल वायु प्रतिरोध को भूल जाइए)। न्यूटन का पहला नियम कहता है कि बल न हो तो वेग नहीं बदलता। इसलिए क्षैतिज वेग पूरे पथ में नियत रहता है — गेंद हर सेकंड आगे बराबर दूरी तय करती है।
ऊर्ध्वाधर दिशा में कहानी अलग है। यहाँ पृथ्वी लगातार गेंद को नीचे खींचती है। इसलिए ऊपर जाने का वेग हर सेकंड लगभग 9.8 m/s घटता है, एक समय शून्य हो जाता है (यही शिखर है), फिर गेंद नीचे गिरने लगती है और नीचे का वेग हर सेकंड 9.8 m/s बढ़ता है।
अब दोनों को मिलाइए: आगे की ओर एकसमान चाल + ऊपर उठकर नीचे आना। आगे की दूरी समय के साथ सीधे बढ़ती है, जबकि ऊँचाई समय के वर्ग के अनुसार बदलती है। ऐसी दो चीज़ें मिलकर जो वक्र बनाती हैं, उसे गणित में परवलय (parabola) कहते हैं। इसीलिए प्रक्षेप्य का पथ हमेशा परवलयाकार होता है।
एक मज़ेदार प्रयोग सोचिए: एक ही ऊँचाई से एक गेंद को आप बस छोड़ दें और उसी पल दूसरी गेंद को ज़ोर से बगल की ओर फेंक दें। कौन पहले ज़मीन पर गिरेगी? जवाब — दोनों एक साथ! क्योंकि गिरना केवल ऊर्ध्वाधर गति का मामला है, और ऊर्ध्वाधर दिशा में दोनों शून्य वेग से एक ही g के साथ गिर रही हैं। बगल का वेग गेंद को बस दूर ले जाता है, गिरने को तेज़ या धीमा नहीं करता।
प्रक्षेप्य गति के मुख्य शब्द
सूत्रों से पहले शब्द साफ़ कर लेते हैं। परीक्षा में "किसे कहते हैं" वाले प्रश्न इन्हीं से आते हैं।
| शब्द | प्रतीक | आसान अर्थ | मात्रक |
|---|---|---|---|
| प्रक्षेप्य | — | कोण पर फेंकी गई वस्तु जो केवल गुरुत्व के प्रभाव में चलती है | — |
| प्रारंभिक वेग | v₀ | फेंकने के क्षण वस्तु का वेग | m/s |
| प्रक्षेपण कोण | θ | प्रारंभिक वेग क्षैतिज से जो कोण बनाता है | डिग्री (°) |
| उड्डयन काल | T | फेंकने से गिरने तक का कुल समय | s |
| अधिकतम ऊँचाई | H | प्रक्षेप्य जितना सबसे ऊपर जाता है | m |
| क्षैतिज परास | R | प्रक्षेपण बिंदु से गिरने के बिंदु तक की क्षैतिज दूरी | m |
| प्रक्षेप पथ | — | प्रक्षेप्य जिस वक्र पथ पर चलता है; यह परवलय है | — |
| गुरुत्वीय त्वरण | g | पृथ्वी हर सेकंड वेग को जितना बदलती है (≈ 9.8) | m/s² |
सूत्रों को चरण-दर-चरण निकालें
रटने के बजाय सूत्र खुद निकालना सीख लें तो परीक्षा में गलती का डर नहीं रहता। मान लीजिए ज़मीन से v₀ वेग और θ कोण पर एक वस्तु फेंकी गई और वायु प्रतिरोध नहीं है। ऊपर की दिशा को धनात्मक मानते हैं।
चरण 1: वेग को दो घटकों में बाँटें
प्रारंभिक वेग v₀ एक तिरछा तीर है। त्रिकोणमिति से इसे क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटकों में बाँटते हैं:
vₓ = v₀cosθक्षैतिज घटक — पूरे पथ में नियत
vᵧ₀ = v₀sinθऊर्ध्वाधर घटक का प्रारंभिक मान
vᵧ = v₀sinθ − gtt समय बाद ऊर्ध्वाधर वेग
चरण 2: शिखर तक पहुँचने का समय
शिखर पर वस्तु और ऊपर नहीं जाती, इसलिए वहाँ ऊर्ध्वाधर वेग शून्य है। vᵧ = 0 रखने पर v₀sinθ − gt = 0, यानी शिखर तक का समय t = v₀sinθ/g।
ऊपर जाना और नीचे आना एक ही गुरुत्व में, एक ही ऊँचाई पार करके होता है — इसलिए नीचे आने में भी ठीक उतना ही समय लगता है। दोनों जोड़ें तो उड्डयन काल मिलता है।
t(शिखर) = v₀sinθ / g
T = 2v₀sinθ / gउड्डयन काल
चरण 3: अधिकतम ऊँचाई
ऊर्ध्वाधर दिशा में v² = u² − 2gh लगाइए। शिखर पर अंतिम वेग 0 और प्रारंभिक ऊर्ध्वाधर वेग v₀sinθ है, तो 0 = v₀²sin²θ − 2gH।
H = v₀²sin²θ / 2gअधिकतम ऊँचाई
चरण 4: क्षैतिज परास
क्षैतिज दिशा में वेग नियत है, इसलिए दूरी = वेग × समय। पूरे उड्डयन काल तक vₓ से चलने पर R = v₀cosθ × 2v₀sinθ/g। अब 2sinθcosθ = sin2θ सर्वसमिका लगाएँ तो सुंदर सूत्र मिलता है।
R = v₀²sin2θ / gक्षैतिज परास
चरण 5: पथ का समीकरण — परवलय क्यों
x = v₀cosθ·t से t = x/(v₀cosθ)। इसे y = v₀sinθ·t − ½gt² में रखने पर t गायब हो जाता है, बचते हैं केवल x और y।
परिणाम y = ax − bx² के रूप का है, जहाँ a और b नियतांक हैं। x का द्विघात समीकरण मतलब परवलय — यही प्रमाण है कि प्रक्षेप्य का पथ परवलयाकार है।
y = x·tanθ − gx² / (2v₀²cos²θ)प्रक्षेप पथ का समीकरण
चरण 6: 45° पर परास अधिकतम क्यों
v₀ और g नियत हों तो परास केवल sin2θ पर निर्भर है। sin का सबसे बड़ा मान 1 है, जो 2θ = 90° पर, यानी θ = 45° पर मिलता है।
आसान भाषा में: बहुत खड़ा फेंकेंगे तो गेंद देर तक हवा में रहेगी पर आगे कम जाएगी; बहुत सपाट फेंकेंगे तो आगे तेज़ जाएगी पर जल्दी गिर जाएगी। 45° इन दोनों के बीच सबसे अच्छा संतुलन है।
Rmax = v₀² / gθ = 45° पर
चरण 7: पूरक कोणों पर समान परास
θ और (90° − θ) के लिए sin2θ और sin(180° − 2θ) बराबर हैं, क्योंकि sin(180° − x) = sin x। इसलिए 20° और 70°, या 30° और 60° पर फेंकी गई गेंद एक ही जगह गिरती है — बस बड़े कोण वाली ज़्यादा ऊँची जाती है और ज़्यादा समय लेती है।
चरण 8: ऊँचाई से क्षैतिज दिशा में फेंकना
छत से गेंद को सीधा सामने (θ = 0°) फेंकें तो ऊर्ध्वाधर प्रारंभिक वेग शून्य होता है। तब गिरने का समय छोड़ी गई गेंद जैसा ही होता है: h = ½gt², और इतने समय में गेंद आगे u × t जाती है।
t = √(2h / g)गिरने का समय
x = u·√(2h / g)ज़मीन पर गिरने की क्षैतिज दूरी
सिमुलेशन में खुद प्रयोग करें
ऊपर का एनिमेशन सिर्फ़ देखने के लिए नहीं, यह आपकी छोटी प्रयोगशाला है। नीचे के प्रयोग एक-एक करके करें और हर बार पहले अनुमान लगाएँ कि क्या होगा — फिर मिलाएँ।
- प्रयोग 1: वेग 20 m/s रखकर कोण 15°, 30°, 45°, 60°, 75° पर फेंकें। किस कोण पर परास सबसे ज़्यादा है?
- प्रयोग 2: "पिछले प्रक्षेपण रखें" चालू करके 30° और 60° साथ-साथ देखें — दोनों पथ एक ही बिंदु पर उतरते हैं।
- प्रयोग 3: कोण वही रखकर वेग दोगुना करें (10 से 20 m/s)। परास दोगुना हुआ या चारगुना? सूत्र में v₀² है, इसलिए चारगुना होना चाहिए।
- प्रयोग 4: पृथ्वी से चंद्रमा पर जाएँ। वही प्रक्षेपण कितने गुना दूर जाता है? बृहस्पति पर क्या होता है?
- प्रयोग 5: प्रक्षेपण ऊँचाई h₀ बढ़ाएँ। अब 45° सबसे अच्छा कोण नहीं रहता — ऊँचाई से फेंकने पर थोड़ा कम कोण ज़्यादा दूर ले जाता है।
- प्रयोग 6: एनिमेशन को शिखर पर रोककर लाल तीर (vᵧ) खोजें — वह गायब है, पर हरा तीर (vₓ) मौजूद है।
हल सहित प्रश्न
अब संख्याओं के साथ। हर हल चरण-दर-चरण है और आप सिमुलेशन में मान डालकर खुद जाँच सकते हैं। हर जगह g = 9.8 m/s² लिया गया है।
प्रश्न 1: 20 m/s वेग से 45° पर फेंकी गई गेंद
प्रश्न: एक गेंद 20 m/s वेग से क्षैतिज से 45° कोण पर फेंकी जाती है। उड्डयन काल, अधिकतम ऊँचाई और परास ज्ञात कीजिए।
पहले घटक: vₓ = 20 × cos45° = 14.14 m/s और vᵧ₀ = 20 × sin45° = 14.14 m/s।
उड्डयन काल T = 2 × 14.14 / 9.8 = 2.89 s। शिखर तक पहुँचने में इसका आधा, 1.44 s लगता है।
अधिकतम ऊँचाई H = (14.14)² / (2 × 9.8) = 10.20 m, और परास R = 20² × sin90° / 9.8 = 40.82 m। कोण 45° है, इसलिए इस वेग पर यही अधिकतम परास है।
प्रश्न 2: 30° बनाम 60° — पूरक कोणों की तुलना
प्रश्न: उसी 20 m/s वेग से एक बार 30° और एक बार 60° पर फेंका गया। कौन ज़्यादा दूर जाएगी?
30° पर: R = 35.35 m, H = 5.10 m, T = 2.04 s। 60° पर: R = 35.35 m, H = 15.31 m, T = 3.53 s।
देखा, परास बिलकुल बराबर! अंतर ऊँचाई और समय में है — 60° वाली गेंद तीन गुना ऊँची जाती है और कहीं ज़्यादा देर हवा में रहती है। फील्डर को कैच पकड़ने का ज़्यादा समय किस गेंद में मिलेगा?
प्रश्न 3: छत से सीधा सामने फेंकी गई गेंद
प्रश्न: 20 m ऊँची छत से एक गेंद 10 m/s वेग से क्षैतिज दिशा में फेंकी जाती है। गेंद कितनी देर में और कितनी दूर गिरेगी?
गिरने का समय t = √(2 × 20 / 9.8) = 2.02 s। इतने समय में आगे की दूरी x = 10 × 2.02 = 20.20 m।
ज़मीन छूते समय ऊर्ध्वाधर वेग gt = 19.8 m/s और क्षैतिज वेग अब भी 10 m/s है, इसलिए परिणामी वेग √(10² + 19.8²) = 22.2 m/s।
प्रश्न 4: दिए गए परास के लिए कोण ज्ञात करें
प्रश्न: 20 m/s वेग से फेंककर आप ठीक 30 m दूर रखी बाल्टी में गेंद डालना चाहते हैं। किस कोण पर फेंकेंगे?
R = v₀²sin2θ/g से sin2θ = Rg/v₀² = 30 × 9.8 / 20² = 0.735। तो 2θ = 47.3°, यानी θ = 23.7°।
पर कहानी यहीं ख़त्म नहीं — पूरक कोण 66.3° पर भी बिलकुल यही परास मिलता है। इसलिए उत्तर दो हैं: 23.7° (नीचा, तेज़) या 66.3° (ऊँचा, धीमा)।
प्रश्न 5: वही प्रक्षेपण चंद्रमा पर
प्रश्न: प्रश्न 1 की गेंद चंद्रमा पर उसी तरह फेंकी जाती है (चंद्रमा पर g = 1.62 m/s²)। अब परास कितना है?
R = 20² / 1.62 = 246.91 m, H = 61.73 m, T = 17.46 s। पृथ्वी से लगभग 6.0 गुना ज़्यादा!
क्योंकि तीनों सूत्रों में g हर में है — गुरुत्व जितना कमज़ोर, प्रक्षेप्य उतना दूर, उतना ऊँचा और उतनी देर हवा में। सिमुलेशन में "चंद्रमा" चुनकर खुद देखें।
कोण बदलने पर क्या बदलता है: एक नज़र में सारणी
नीचे की सारणी में प्रारंभिक वेग 20 m/s और g = 9.8 m/s² लेकर पाँच कोणों का हिसाब है। 15° और 75°, 30° और 60° के जोड़ों का परास मिलाकर देखें।
- कोण बढ़ने पर ऊँचाई और उड्डयन काल हमेशा बढ़ते हैं।
- परास 45° तक बढ़ता है, फिर घटता है — और पूरक कोणों पर बराबर रहता है।
| प्रक्षेपण कोण | परास R | अधिकतम ऊँचाई H | उड्डयन काल T |
|---|---|---|---|
| 15° | 20.4 m | 1.4 m | 1.06 s |
| 30° | 35.3 m | 5.1 m | 2.04 s |
| 45° | 40.8 m | 10.2 m | 2.89 s |
| 60° | 35.3 m | 15.3 m | 3.53 s |
| 75° | 20.4 m | 19.0 m | 3.94 s |
वे गलतियाँ जो लगभग सभी करते हैं
इस अध्याय में कुछ गलतियाँ बार-बार दिखती हैं। इन्हें पहचान लें तो MCQ में आसान अंक नहीं कटेंगे।
- गलत: "शिखर पर वेग शून्य है।" सही: केवल ऊर्ध्वाधर वेग शून्य है; क्षैतिज वेग v₀cosθ तब भी है।
- गलत: "शिखर पर त्वरण शून्य है।" सही: त्वरण पूरे पथ में g, नीचे की ओर है — शिखर पर भी।
- गलत: "भारी गेंद कम दूर जाती है।" सही: वायु प्रतिरोध न हो तो किसी सूत्र में द्रव्यमान है ही नहीं।
- गलत: sin2θ को 2sinθ मान लेना। sin2θ = 2sinθcosθ; sin90° = 1 पर 2sin45° ≈ 1.414।
- गलत: ऊँचाई से फेंकने पर भी T = 2v₀sinθ/g लगाना। यह सूत्र केवल उसी ऊँचाई पर लौटने के लिए है।
असल ज़िंदगी में प्रक्षेप्य
खेल का मैदान प्रक्षेप्यों से भरा है। फ़ुटबॉल की कॉर्नर किक, बास्केटबॉल का थ्रो, भाला फेंक और गोला फेंक — खिलाड़ी अभ्यास करते-करते सही कोण सीख लेते हैं। गोला कंधे की ऊँचाई से फेंका जाता है, इसलिए उसका सबसे अच्छा कोण 45° से थोड़ा कम होता है — जो आपने सिमुलेशन में h₀ बढ़ाकर देखा।
दमकलकर्मी पाइप का कोण पानी की धार के परास को ध्यान में रखकर तय करते हैं। फव्वारे बनाने वाले भी पानी का वेग और नोज़ल का कोण मिलाकर सुंदर मेहराब बनाते हैं।
असल में हवा का प्रतिरोध होता है। वह वस्तु को दोनों दिशाओं में धीमा करता है, इसलिए असली पथ पूरा परवलय नहीं रहता — नीचे आने वाला हिस्सा ज़्यादा खड़ा होता है, परास घटता है और सबसे अच्छा कोण 45° से नीचे आ जाता है। हल्की और बड़ी वस्तुओं (जैसे बैडमिंटन की शटल) पर यह असर सबसे ज़्यादा होता है। किताब के सूत्र "प्रतिरोध-रहित" आदर्श स्थिति के लिए हैं।
परीक्षा कॉर्नर: CBSE कक्षा 11 और JEE/NEET की छोटी तरकीबें
प्रक्षेप्य गति के प्रश्न कुछ जाने-पहचाने ढाँचों में आते हैं। क्या पूछा जाता है और कैसे उत्तर दें, देख लें:
परिभाषा और तर्क वाले प्रश्न (CBSE)
"प्रक्षेप्य गति किसे कहते हैं?" — शब्द-सारणी की परिभाषा लिखें और "केवल गुरुत्व के प्रभाव में" ज़रूर जोड़ें। "पथ परवलयाकार क्यों है?" — पथ का समीकरण y = ax − bx² दिखाकर बताएँ कि यह x में द्विघात है।
व्युत्पत्ति वाले प्रश्न
T, H और R के सूत्र ऊपर के चरण 1 से 4 की तरह निकालें — हर चरण में उपयोग किया गया समीकरण लिखें।
JEE/NEET की तेज़ तरकीबें
बहुविकल्पी प्रश्नों में समय बचाने के लिए ये संबंध याद रखें:
- पूरक कोणों पर R समान: R₁ = R₂, और H₁ + H₂ = v₀²/2g।
- R = 4H cotθ — इसलिए R = H तब, जब tanθ = 4।
- पूरक कोणों के उड्डयन काल का गुणनफल T₁T₂ = 2R/g।
- शिखर पर संवेग का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य, गतिज ऊर्जा = ½m(v₀cosθ)²।
एक नज़र में दोहराव
परीक्षा से पहले सिर्फ़ यह हिस्सा पढ़ लें तो पूरा अध्याय याद आ जाएगा।
- प्रक्षेप्य = कोण पर फेंकी गई वस्तु, केवल गुरुत्व के अधीन; पथ परवलय।
- vₓ = v₀cosθ नियत; vᵧ = v₀sinθ − gt बदलता है; त्वरण हमेशा g नीचे की ओर।
- T = 2v₀sinθ/g, H = v₀²sin²θ/2g, R = v₀²sin2θ/g।
- 45° पर परास अधिकतम (v₀²/g); पूरक कोणों पर परास बराबर।
- ऊँचाई h से क्षैतिज प्रक्षेपण में t = √(2h/g), x = u·t।
- g घटे (चंद्रमा पर) तो T, H, R सब बढ़ते हैं; द्रव्यमान किसी सूत्र में नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रक्षेप्य गति का समीकरण क्या है?
पथ का समीकरण y = x·tanθ − gx²/(2v₀²cos²θ) है। यह y = ax − bx² के रूप का है, इसलिए प्रक्षेप्य का पथ परवलय होता है।
अधिकतम परास किस कोण पर होता है?
R = v₀²sin2θ/g में sin2θ का अधिकतम मान 1 है, जो θ = 45° पर मिलता है। तब Rmax = v₀²/g।
उड्डयन काल का सूत्र क्या है?
प्रक्षेप्य जितने समय हवा में रहता है वह उड्डयन काल है: T = 2v₀sinθ/g, जब वह उसी ऊँचाई पर गिरे जहाँ से फेंका गया।
प्रक्षेप्य का पथ परवलयाकार क्यों होता है?
क्योंकि क्षैतिज विस्थापन समय के समानुपाती और ऊर्ध्वाधर विस्थापन समय के वर्ग पर निर्भर है; t हटाने पर y, x का द्विघात फलन बनता है, जो परवलय है।
शिखर पर प्रक्षेप्य का वेग और त्वरण कितना होता है?
शिखर पर ऊर्ध्वाधर वेग शून्य होता है, इसलिए वेग = क्षैतिज घटक v₀cosθ। त्वरण तब भी g है, सीधा नीचे की ओर।
किस कोण पर परास और अधिकतम ऊँचाई बराबर होते हैं?
R = H रखने पर tanθ = 4 मिलता है, यानी θ ≈ 76°।
क्या द्रव्यमान का प्रक्षेप्य गति पर असर पड़ता है?
वायु प्रतिरोध न हो तो नहीं। T, H, R किसी सूत्र में द्रव्यमान नहीं है — भारी और हल्की गेंद एक ही वेग और कोण पर एक ही पथ पर चलती हैं।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
SSC
SSC Physics: syllabus and preparation
HSC
HSC Physics: syllabus and preparation
Textbook
Class 9-10 Physics textbook
Admission
Engineering admission test preparation
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Dhaka University science unit admission 2026-27
English
Composition: The Uses of Electricity
Bangla
প্রতিবেদন: বিজ্ঞান মেলা (बांग्ला में)
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Paragraph: Science in Everyday Life
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वृत्त के प्रमेय
गणित
ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
गणित
प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
गणित
समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
गणित






















