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वृत्त के प्रमेय: बिंदु खींचें और हर कोण का नियम खुद जाँचें

वृत्त के प्रमेय वृत्त में कोणों और लंबाइयों के पक्के नियम हैं: केंद्र पर अंतरित कोण परिधि पर अंतरित कोण का दुगुना होता है, एक ही वृत्तखंड के कोण बराबर होते हैं, अर्धवृत्त में कोण 90° होता है, चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग 180° होता है और स्पर्श रेखा त्रिज्या पर लंब होती है।

वृत्त पर बिंदुओं को खींचें; ▶ दबाने पर एक बिंदु अपने आप चलेगा

एक चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, परिधि पर अंतरित कोण का दुगुना होता हैकेंद्र, त्रिज्याएँ और पहला मापनजिससे तुलना हो रही हैउपपत्ति की रचना-रेखा
गति

नियंत्रण

कौन-सा प्रमेय देखें

5.0
210 °
330 °
90 °

मापन

∠ACB
60.0°
∠AOB
120.0°
2 × ∠ACB
120.0°
जाँच: ∠AOB = 2∠ACB
✓ सत्य
त्रिज्या, r
5.00

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. “कौन-सा प्रमेय देखें” में से सात में से कोई एक प्रमेय चुनिए; चित्र के नीचे लेजेंड की पहली पंक्ति में उस प्रमेय का कथन दिखेगा।
  2. वृत्त पर लाल बिंदुओं को माउस या उँगली से खींचिए। कीबोर्ड से काम करना हो तो हर बिंदु के “बिंदु की स्थिति” स्लाइडर को तीर वाली कुंजियों से बदलिए।
  3. ▶ दबाइए: एक बिंदु अपने आप वृत्त पर चलने लगता है। मापन पैनल में कोण बदलते हैं, पर “जाँच” वाली पंक्ति में ✓ सत्य कभी नहीं हटता। यही प्रमेय है।
  4. “उपपत्ति की रचना-रेखाएँ दिखाएँ” चालू कीजिए: पाठ्यपुस्तक की उपपत्ति में जो अतिरिक्त रेखाएँ खींची जाती हैं (जैसे C से केंद्र होकर व्यास, या त्रिज्याएँ OA और OB), वे धूसर डैश रेखाओं में दिखेंगी।
  5. त्रिज्या बदलने पर चित्र का आकार वही रहता है पर लंबाइयों की संख्याएँ बदल जाती हैं; कोण कभी नहीं बदलते। स्पर्श रेखा वाले मोड में P को खींचकर या d स्लाइडर से स्पर्श रेखा की लंबाई √(d² − r²) से मिलाइए।

चूड़ी, घड़ी और साइकिल का पहिया: वृत्त के नियम हर जगह

हाथ की चूड़ी, दीवार घड़ी, साइकिल का पहिया, गोल रोटी, तालाब में पत्थर फेंकने पर बनी लहर: सब वृत्त हैं। वृत्त का एक खास गुण है। उस पर कहीं भी खड़े हो जाइए, केंद्र से आपकी दूरी उतनी ही रहती है। बस इसी एक गुण से कोणों और लंबाइयों के इतने सुंदर नियम निकलते हैं कि NCERT में इन पर पूरा अध्याय है।

क्रिकेट का एक उदाहरण लीजिए। मान लीजिए दो स्टंप के सिरों से होकर एक वृत्त खींचा गया। उस वृत्त पर (एक ही तरफ) कहीं भी खड़े होकर देखें, दोनों के बीच का कोण बराबर दिखेगा। खेल विश्लेषक यही नियम यह जानने में लगाते हैं कि मैदान में कहाँ से गोल या विकेट सबसे “चौड़ा” दिखता है। गणित की भाषा में: एक ही वृत्तखंड के कोण बराबर होते हैं।

इस पेज पर सात प्रमेय हैं, और सिमुलेशन में हर एक का अलग चित्र है। बिंदु जैसे चाहें खींचिए; मापी गई संख्याएँ बदलेंगी, पर संबंध नहीं टूटेगा। आँखों के सामने सच देखने के बाद बोर्ड परीक्षा में उपपत्ति लिखना बहुत आसान हो जाता है।

वृत्त की शब्दावली: केंद्र से स्पर्श रेखा तक

सबसे ज्यादा अंक दो शब्दों को मिलाने से कटते हैं। जीवा वृत्त के दो बिंदुओं को मिलाने वाला सीधा रेखाखंड है, जबकि चाप वृत्त का मुड़ा हुआ हिस्सा है। जीवा वृत्त को दो वृत्तखंडों में बाँटती है: बड़ा दीर्घ वृत्तखंड और छोटा लघु वृत्तखंड। त्रिज्यखंड (sector) दो त्रिज्याओं और एक चाप से घिरा हिस्सा है, जैसे पिज़्ज़ा का एक टुकड़ा।

नीचे की तालिका में हर शब्द का आसान अर्थ और सिमुलेशन में उसकी जगह दी गई है।

शब्दआसान अर्थसिमुलेशन में कहाँ
वृत्तएक स्थिर बिंदु से समान दूरी पर स्थित सभी बिंदुगहरी गोल रेखा
केंद्र (O)वह स्थिर बिंदुबीच का बिंदु O
त्रिज्या (r)केंद्र से वृत्त के किसी भी बिंदु की दूरीत्रिज्या स्लाइडर; OA, OB
जीवावृत्त के दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंडरेखा AB
व्यासकेंद्र से होकर जाने वाली जीवा, लंबाई 2r; सबसे बड़ी जीवाअर्धवृत्त मोड में AB
चापपरिधि का एक भागकेंद्र वाले मोड में मोटा रंगीन वक्र
वृत्तखंडजीवा और चाप से घिरा भागवृत्तखंड मोड में हल्का रंगा भाग
त्रिज्यखंडदो त्रिज्याओं और चाप से घिरा भागOA, OB और चाप AB
केंद्र पर अंतरित कोणशीर्ष केंद्र पर, भुजाएँ त्रिज्याएँ∠AOB
परिधि पर अंतरित कोणशीर्ष वृत्त पर, भुजाएँ जीवाएँ∠ACB
अर्धवृत्त में कोणव्यास के सिरों से वृत्त के किसी बिंदु पर बना कोणअर्धवृत्त मोड में ∠ACB
चक्रीय चतुर्भुजजिसके चारों शीर्ष एक ही वृत्त पर होंचक्रीय मोड में ABCD
छेदक रेखावृत्त को दो बिंदुओं पर काटने वाली रेखाजीवा AB को दोनों ओर बढ़ाने पर
स्पर्श रेखावृत्त को ठीक एक बिंदु पर छूने वाली रेखास्पर्श रेखा मोड में PT₁, PT₂
स्पर्श बिंदुजहाँ स्पर्श रेखा वृत्त को छूती हैT₁, T₂

प्रमेय 1: केंद्र पर अंतरित कोण, परिधि पर अंतरित कोण का दुगुना

सिमुलेशन इसी प्रमेय से शुरू होता है। शुरुआती चित्र में त्रिज्या 5 है, चाप AB द्वारा केंद्र पर कोण ∠AOB = 120° और परिधि पर कोण ∠ACB = 60°। C को चाप AB के बाहर वृत्त पर कहीं भी ले जाइए, ∠ACB नहीं बदलता और ∠AOB हमेशा उसका ठीक दुगुना रहता है।

अब A और B को खींचकर चाप बड़ा कीजिए। एक समय ∠AOB 180° से बड़ा होकर प्रतिवर्ती कोण (reflex angle) बन जाता है। नियम तब भी सही है: ∠ACB अधिक कोण बन जाता है और उसका दुगुना ठीक प्रतिवर्ती कोण के बराबर होता है।

दिया है और सिद्ध करना है

दिया है: O केंद्र वाले वृत्त का चाप AB केंद्र पर ∠AOB और शेष भाग के बिंदु C पर ∠ACB अंतरित करता है। सिद्ध करना है: ∠AOB = 2∠ACB।

रचना और उपपत्ति

रचना: CO को मिलाकर आगे बढ़ाइए जो वृत्त से D पर मिले। (सिमुलेशन में रचना-रेखाएँ चालू करने पर यही रेखा दिखती है।)

उपपत्ति: त्रिभुज AOC में OA = OC (एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ), अतः ∠OAC = ∠OCA (समान भुजाओं के सम्मुख कोण)।

∠AOD त्रिभुज AOC का बहिष्कोण है, अतः ∠AOD = ∠OAC + ∠OCA = 2∠OCA (बहिष्कोण = दोनों अंतःसम्मुख कोणों का योग)।

इसी प्रकार त्रिभुज BOC में OB = OC, अतः ∠BOD = 2∠OCB।

दोनों को जोड़ने पर ∠AOD + ∠BOD = 2(∠OCA + ∠OCB), अर्थात ∠AOB = 2∠ACB। यदि O कोण ACB के बाहर हो तो जोड़ने के बजाय घटाइए: ∠AOB = ∠BOD − ∠AOD = 2∠ACB। इति सिद्धम्।

∠AOD = 2∠OCA, ∠BOD = 2∠OCBदो समद्विबाहु त्रिभुजों के बहिष्कोण

∠AOB = 2∠ACBजोड़कर (या घटाकर)

प्रमेय 2: एक ही वृत्तखंड के कोण बराबर होते हैं

जीवा AB वृत्त को दो वृत्तखंडों में बाँटती है। एक ही वृत्तखंड के किन्हीं दो बिंदुओं C और D से AB बराबर कोण पर दिखती है। शुरुआती चित्र में ∠ACB = ∠ADB = 70°, क्योंकि दोनों एक ही 140° के चाप पर बने हैं।

D को जीवा के दूसरी तरफ ले जाइए: अब दोनों कोण बराबर नहीं रहते, बल्कि उनका योग 180° हो जाता है। मापन पैनल अपने आप यह संबंध दिखाने लगता है। यह असल में चक्रीय चतुर्भुज वाला प्रमेय ही है।

उपपत्ति (प्रमेय 1 से)

दिया है: O केंद्र वाले वृत्त के एक ही वृत्तखंड में ∠ACB और ∠ADB। सिद्ध करना है: ∠ACB = ∠ADB। रचना: OA और OB मिलाइए।

दोनों कोण चाप AB पर बने हैं, अतः प्रमेय 1 से ∠AOB = 2∠ACB और ∠AOB = 2∠ADB। इसलिए 2∠ACB = 2∠ADB, अर्थात ∠ACB = ∠ADB। इति सिद्धम्।

प्रमेय 3: अर्धवृत्त में बना कोण समकोण होता है

जब जीवा व्यास बन जाती है, तब केंद्र पर कोण एक ऋजु कोण, यानी 180° होता है। प्रमेय 1 के अनुसार परिधि पर कोण उसका आधा यानी 90° होगा। इसलिए व्यास के दोनों सिरों को वृत्त के किसी भी बिंदु से मिलाने पर हमेशा समकोण त्रिभुज बनता है।

सिमुलेशन में “अर्धवृत्त में कोण” चुनिए। A खींचने पर पूरा व्यास घूमता है, C खींचने पर तीसरा शीर्ष वृत्त पर चलता है। दोनों तरह C पर छोटा वर्ग चिह्न और ∠ACB = 90° बना रहता है। AC² + BC² और AB² भी देखिए: यहाँ पाइथागोरस प्रमेय भी छिपा है।

उपपत्ति (प्रमेय 3)

दिया है: O केंद्र वाले वृत्त का व्यास AB और वृत्त पर कोई बिंदु C। सिद्ध करना है: ∠ACB = 90°।

AOB एक सरल रेखा है, अतः ∠AOB = 180°। प्रमेय 1 से ∠ACB = ½∠AOB = 90°। इति सिद्धम्।

दूसरी उपपत्ति: OC मिलाइए। OA = OB = OC, इसलिए त्रिभुज OAC और OBC समद्विबाहु हैं: ∠OCA = ∠OAC और ∠OCB = ∠OBC। त्रिभुज ABC के कोणों का योग 180° है, अतः 2(∠OCA + ∠OCB) = 180°, यानी ∠ACB = 90°।

प्रमेय 4: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग 180° होता है

जिस चतुर्भुज के चारों शीर्ष एक वृत्त पर हों, उसके सम्मुख कोणों के हर युग्म का योग 180° होता है। सिमुलेशन के शुरुआती चतुर्भुज में ∠A = 100°, ∠B = 95°, ∠C = 80°, ∠D = 85°, अतः ∠A + ∠C = 180° और ∠B + ∠D = 180°।

साथ में एक बोनस नियम: BC को E तक बढ़ाने पर बहिष्कोण ∠DCE = 180° − ∠C = 100°, जो अंतःसम्मुख कोण ∠A के बराबर है। हरी डैश रेखा और हरा कोण यही दिखाते हैं।

उपपत्ति (प्रमेय 4)

दिया है: O केंद्र वाले वृत्त में चक्रीय चतुर्भुज ABCD। सिद्ध करना है: ∠BAD + ∠BCD = 180° और ∠ABC + ∠ADC = 180°। रचना: OB और OD मिलाइए।

चाप BCD केंद्र पर ∠BOD और A पर ∠BAD बनाता है, अतः ∠BOD = 2∠BAD। चाप BAD केंद्र पर प्रतिवर्ती ∠BOD और C पर ∠BCD बनाता है, अतः प्रतिवर्ती ∠BOD = 2∠BCD।

जोड़ने पर 2(∠BAD + ∠BCD) = ∠BOD + प्रतिवर्ती ∠BOD = 360°, अतः ∠BAD + ∠BCD = 180°। चतुर्भुज के चारों कोणों का योग 360° है, इसलिए दूसरे युग्म का योग भी 180° है। इति सिद्धम्।

∠A + ∠C = 180°, ∠B + ∠D = 180°सम्मुख कोण संपूरक

∠DCE = ∠Aबहिष्कोण = अंतःसम्मुख कोण

प्रमेय 5: केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है

केंद्र O से जीवा AB पर लंब OM डालिए, M ठीक बीच में गिरता है: AM = MB। सिमुलेशन में “केंद्र से जीवा पर लंब” चुनकर A या B खींचिए; बराबरी के छोटे निशान और मापन में AM तथा MB हमेशा बराबर रहते हैं।

सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल इसी से बनता है। त्रिभुज OAM समकोण है और कर्ण OA = r, अतः OM² + AM² = r² और जीवा AB = 2AM = 2√(r² − OM²)।

उपपत्ति (RHS सर्वांगसमता)

दिया है: O केंद्र वाले वृत्त की जीवा AB (व्यास नहीं) और OM ⊥ AB। सिद्ध करना है: AM = MB। रचना: OA और OB मिलाइए।

समकोण त्रिभुज OMA और OMB में ∠OMA = ∠OMB = 90°, कर्ण OA = OB (त्रिज्याएँ) और OM उभयनिष्ठ है। अतः RHS सर्वांगसमता से त्रिभुज OMA ≅ त्रिभुज OMB, इसलिए AM = MB (CPCT)। इति सिद्धम्।

OM² + AM² = r²त्रिभुज OAM में पाइथागोरस

AB = 2√(r² − OM²)जीवा की लंबाई

प्रमेय 6: स्पर्श रेखा त्रिज्या पर लंब, और बाहरी बिंदु से दोनों स्पर्श रेखाएँ बराबर

स्पर्श रेखा वृत्त को एक ही बिंदु पर छूती है, और उस बिंदु की त्रिज्या उस पर ठीक 90° बनाती है। बाहरी बिंदु P से दो स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं और वे बराबर होती हैं: PT₁ = PT₂ = √(d² − r²), जहाँ d = OP। सिमुलेशन की शुरुआत में r = 5 और d = 13, अतः स्पर्श रेखा = √(169 − 25) = √144 = 12। NCERT कक्षा 10 के अध्याय “वृत्त” में ये दोनों प्रमेय 10.1 और 10.2 के रूप में आते हैं।

P को पास लाइए: स्पर्श रेखाएँ छोटी होती हैं और वृत्त के बिल्कुल पास आने पर दोनों स्पर्श बिंदु लगभग मिल जाते हैं। दूर ले जाइए तो वे लंबी होती हैं। पर दोनों हमेशा बराबर रहती हैं और दोनों स्पर्श बिंदुओं पर कोण हमेशा 90° रहता है।

स्पर्श रेखा त्रिज्या पर लंब क्यों है

दिया है: O केंद्र वाले वृत्त के बिंदु P पर स्पर्श रेखा XY। सिद्ध करना है: OP ⊥ XY।

XY पर P के अलावा कोई बिंदु Q लीजिए और OQ मिलाइए। स्पर्श रेखा वृत्त को केवल P पर छूती है, इसलिए Q वृत्त के बाहर है, अतः OQ > OP। यह XY के हर बिंदु के लिए सत्य है, इसलिए OP, O से XY तक की सबसे छोटी दूरी है, और सबसे छोटी दूरी लंब दूरी होती है। अतः OP ⊥ XY। इति सिद्धम्।

दोनों स्पर्श रेखाएँ बराबर क्यों हैं

दिया है: बाह्य बिंदु P से स्पर्श रेखाएँ PQ और PR, स्पर्श बिंदु Q और R। सिद्ध करना है: PQ = PR। रचना: OQ, OR और OP मिलाइए।

समकोण त्रिभुज OQP और ORP में ∠OQP = ∠ORP = 90° (प्रमेय 10.1), OQ = OR (त्रिज्याएँ) और OP उभयनिष्ठ कर्ण है। अतः RHS से दोनों सर्वांगसम हैं, इसलिए PQ = PR (CPCT)। साथ ही ∠OPQ = ∠OPR, यानी OP दोनों स्पर्श रेखाओं के बीच के कोण को समद्विभाजित करती है।

PQ = PR = √(d² − r²)d = केंद्र से P की दूरी

प्रमेय 7: एकांतर वृत्तखंड प्रमेय

वृत्त के बिंदु A पर स्पर्श रेखा और A से एक जीवा AB खींचिए। स्पर्श रेखा और जीवा के बीच का कोण, जीवा के दूसरी ओर वाले (एकांतर) वृत्तखंड में बने किसी भी कोण के बराबर होता है। शुरुआती चित्र में दोनों 60° हैं।

“एकांतर” का अर्थ है उल्टी तरफ़ वाला। C को घुमाइए, ∠ACB नहीं बदलता; A या B हिलाइए, दोनों कोण साथ-साथ बदलते हैं पर हमेशा बराबर रहते हैं। यह प्रमेय NCERT की मुख्य पाठ्यपुस्तक में नहीं है, पर ICSE, कई राज्य बोर्डों और ओलंपियाड के प्रश्नों में खूब आता है।

उपपत्ति (जब कोण न्यून हो)

दिया है: O केंद्र वाले वृत्त के बिंदु A पर स्पर्श रेखा AT, जीवा AB और एकांतर वृत्तखंड का बिंदु C। सिद्ध करना है: ∠BAT = ∠ACB। रचना: व्यास AA′ खींचिए और A′B मिलाइए।

∠ABA′ = 90° (अर्धवृत्त में कोण), अतः त्रिभुज ABA′ में ∠BAA′ + ∠AA′B = 90°। साथ ही ∠TAA′ = 90° (स्पर्श रेखा ⊥ त्रिज्या), अतः ∠BAT + ∠BAA′ = 90°।

तुलना करने पर ∠BAT = ∠AA′B, और ∠AA′B = ∠ACB (एक ही वृत्तखंड के कोण)। अतः ∠BAT = ∠ACB। अधिक कोण होने पर दूसरी ओर के कोण पर यही तर्क लगाकर 180° से घटाइए। इति सिद्धम्।

सिमुलेशन में खुद करके देखिए: छह छोटे प्रयोग

हर प्रयोग एक-दो मिनट का है। जो संख्याएँ दिखें उन्हें कॉपी में लिखिए; ऊपर की उपपत्तियाँ अपने आप समझ में आने लगेंगी।

प्रयोग 1: केंद्र का कोण प्रतिवर्ती कब बनता है

केंद्र वाले मोड में A को धीरे-धीरे C की ओर खींचिए ताकि चाप AB (C से दूर वाला) बढ़ता जाए। देखिए ∠AOB 180° पार करता है ठीक तभी ∠ACB 90° पार करता है।

प्रयोग 2: एक ही या अलग वृत्तखंड

वृत्तखंड मोड में D को जीवा AB के पार ले जाइए। “C और D एक ही वृत्तखंड में?” नहीं हो जाता और जाँच की पंक्ति ∠ACB + ∠ADB = 180° दिखाने लगती है। ACBD अब चक्रीय चतुर्भुज है।

प्रयोग 3: न हिलने वाला समकोण

अर्धवृत्त मोड में ▶ दबाइए। C पूरे अर्धवृत्त पर घूमता है, त्रिभुज कभी पतला कभी समद्विबाहु बनता है, पर C का वर्ग चिह्न नहीं हटता। AC² + BC² और AB² की संख्याएँ मिलाइए।

प्रयोग 4: सम्मुख कोणों का झूला

चक्रीय मोड में A को खींचकर ∠A बड़ा कीजिए। ∠C ठीक उतना ही छोटा होता है और हरा बहिष्कोण ∠DCE, ∠A के साथ-साथ बढ़ता है।

प्रयोग 5: जीवा सबसे लंबी कब

जीवा मोड में B घुमाइए। OM जितना छोटा, AB उतनी लंबी। OM = 0 होने पर जीवा केंद्र से होकर जाती है, यानी व्यास बन जाती है, और AB त्रिज्या का दुगुना हो जाता है।

प्रयोग 6: स्पर्श रेखा की लंबाई का सूत्र जाँचिए

स्पर्श रेखा मोड में d स्लाइडर कुछ मानों पर रखिए और हर बार PT₁ को √(d² − r²) से मिलाइए। फिर त्रिज्या बदलिए: ∠OT₁P फिर भी 90° रहता है।

हल किए गए उदाहरण: चरण दर चरण

नीचे की हर संख्या सूत्र से गणना करके निकाली गई है। बोर्ड परीक्षा में हर चरण के आगे कारण लिखिए; CBSE की अंक योजना में कारण के भी अंक होते हैं।

उदाहरण 1: केंद्र के कोण से परिधि का कोण

O केंद्र वाले वृत्त में ∠AOB = 110°। दीर्घ चाप पर बिंदु C के लिए ∠ACB ज्ञात कीजिए। हल: ∠ACB = ½∠AOB = ½ × 110° = 55°।

यदि C लघु चाप पर हो तो दूसरी ओर का केंद्रीय कोण प्रतिवर्ती है: 360° − 110° = 250°, अतः ∠ACB = ½ × 250° = 125°। ध्यान दीजिए 55° + 125° = 180°।

उदाहरण 2: एक ही वृत्तखंड के कोण

∠ACB = 38° है और D उसी वृत्तखंड में है। ∠ADB और ∠AOB ज्ञात कीजिए। हल: ∠ADB = 38° (एक ही वृत्तखंड के कोण) और ∠AOB = 2 × 38° = 76°।

उदाहरण 3: अर्धवृत्त में पाइथागोरस

एक वृत्त की त्रिज्या 5 सेमी है, AB व्यास है और वृत्त पर बिंदु C के लिए AC = 6 सेमी। BC और त्रिभुज ABC का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।

हल: ∠ACB = 90° (अर्धवृत्त में कोण), AB = 10 सेमी। BC² = 100 − 36 = 64, अतः BC = 8 सेमी। क्षेत्रफल = ½ × 6 × 8 = 24 वर्ग सेमी।

BC = √(AB² − AC²)क्योंकि ∠C = 90°

उदाहरण 4: चक्रीय चतुर्भुज में बीजगणित

चक्रीय चतुर्भुज ABCD में ∠A = (2x + 10)° और ∠C = (3x − 5)°। x और दोनों कोण ज्ञात कीजिए।

हल: ∠A + ∠C = 180°, अतः 5x + 5 = 180, 5x = 175, x = 35। इसलिए ∠A = 80° और ∠C = 100°। जाँच: 80 + 100 = 180।

उदाहरण 5: जीवा की लंबाई

13 सेमी त्रिज्या वाले वृत्त की एक जीवा केंद्र से 5 सेमी दूर है। जीवा की लंबाई ज्ञात कीजिए।

हल: केंद्र से लंब OM जीवा को समद्विभाजित करता है। AM² = 169 − 25 = 144, अतः AM = 12 सेमी और AB = 2 × 12 = 24 सेमी।

उदाहरण 6: केंद्र से जीवा की दूरी

10 सेमी त्रिज्या वाले वृत्त में 16 सेमी लंबी जीवा है। केंद्र से उसकी दूरी? हल: आधी जीवा = 8 सेमी, OM² = 100 − 64 = 36, अतः OM = 6 सेमी।

उदाहरण 7: सिमुलेशन की अपनी स्पर्श रेखा

5 इकाई त्रिज्या वाले वृत्त के केंद्र से 13 इकाई दूर बिंदु P से स्पर्श रेखा की लंबाई? हल: ∠OTP = 90°, अतः PT = √(169 − 25) = √144 = 12 इकाई। स्पर्श रेखा मोड खोलते ही यही संख्या दिखेगी।

उदाहरण 8: स्पर्श रेखा से केंद्र की दूरी

7 सेमी त्रिज्या वाले वृत्त पर बिंदु P से स्पर्श रेखा 24 सेमी लंबी है। P की केंद्र से दूरी? हल: OP² = 576 + 49 = 625, अतः OP = 25 सेमी। (NCERT कक्षा 10 की प्रश्नावली में ठीक इसी प्रकार के प्रश्न हैं।)

उदाहरण 9: एकांतर वृत्तखंड

स्पर्श रेखा AT और जीवा AB के बीच का कोण 62° है। एकांतर वृत्तखंड के बिंदु C के लिए ∠ACB और दूसरे वृत्तखंड के बिंदु D के लिए ∠ADB ज्ञात कीजिए।

हल: ∠ACB = 62° (एकांतर वृत्तखंड प्रमेय)। ACBD चक्रीय है, अतः ∠ADB = 180° − 62° = 118°।

उदाहरण 10: दो समांतर जीवाएँ

13 सेमी त्रिज्या वाले वृत्त में 10 सेमी और 24 सेमी लंबी दो जीवाएँ समांतर हैं। उनके बीच की दूरी?

हल: केंद्र से दूरियाँ √(13² − 5²) = 12 सेमी और √(13² − 12²) = 5 सेमी। केंद्र के विपरीत ओर होने पर दूरी 12 + 5 = 17 सेमी; एक ही ओर होने पर 12 − 5 = 7 सेमी। दोनों उत्तर लिखिए।

उदाहरण 11: त्रिज्याओं से बना समद्विबाहु त्रिभुज

O केंद्र वाले वृत्त में ∠AOB = 110° है। ∠OAB? हल: OA = OB, अतः ∠OAB = ∠OBA = (180° − 110°) ÷ 2 = 70° ÷ 2 = 35°।

उदाहरण 12: दो स्पर्श रेखाओं के बीच का कोण

बाह्य बिंदु P से स्पर्श रेखाएँ PA और PB के बीच ∠APB = 70° है। ∠AOB और दीर्घ चाप के बिंदु C पर ∠ACB ज्ञात कीजिए।

हल: चतुर्भुज OAPB में ∠OAP = ∠OBP = 90°, अतः ∠AOB = 360° − 90° − 90° − 70° = 110°। फिर ∠ACB = ½ × 110° = 55°।

∠AOB + ∠APB = 180°OAPB चक्रीय चतुर्भुज है

आम गलतियाँ जिनसे अंक कटते हैं

कॉपी जाँचने वाले ये गलतियाँ बार-बार देखते हैं। एक बार पढ़ लीजिए, फिर आप इन्हें खुद पकड़ लेंगे।

  • केंद्र के कोण को परिधि के कोण का आधा लिखना। उल्टा सही है: केंद्र वाला कोण बड़ा (दुगुना) होता है।
  • अलग-अलग चापों पर बने कोणों को जोड़ देना। केंद्र और परिधि के कोण एक ही चाप पर बने होने चाहिए।
  • जीवा के दोनों ओर के कोणों को बराबर मानना। वे बराबर नहीं, संपूरक होते हैं।
  • चक्रीय चतुर्भुज में आसन्न कोणों का योग 180° मानना। केवल सम्मुख कोणों का योग 180° होता है।
  • जीवा वाले सवाल में आधी जीवा निकालकर अंत में दुगुना करना भूल जाना।
  • समकोण बाहरी बिंदु P पर मान लेना। 90° स्पर्श बिंदु पर होता है, त्रिज्या और स्पर्श रेखा के बीच।
  • उपपत्ति में कारण न लिखना। “OA = OC” के आगे “(एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ)” न लिखने पर अंक कटते हैं।
  • एकांतर वृत्तखंड में गलत ओर का कोण लेना। स्पर्श रेखा-जीवा कोण दूसरी ओर वाले वृत्तखंड के कोण के बराबर होता है।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में वृत्त के प्रमेय

बढ़ई के पास टूटे पहिए का एक टुकड़ा है और उसे पूरे पहिए का केंद्र चाहिए। वह टुकड़े पर दो जीवाएँ खींचकर उनके लंब समद्विभाजक बनाता है; जहाँ वे मिलते हैं वही केंद्र है, क्योंकि केंद्र से जीवा पर लंब जीवा को समद्विभाजित करता है। पुरातत्वविद मिट्टी के टूटे बर्तनों से पूरी थाली का माप इसी तरह निकालते हैं।

सेट-स्क्वेयर से किसी भी गोल वस्तु का केंद्र ढूँढा जा सकता है: समकोण वाला कोना किनारे पर रखिए, उसकी दोनों भुजाएँ जहाँ किनारे को काटती हैं वे एक व्यास के सिरे हैं (अर्धवृत्त में कोण)। दो बार कीजिए, दोनों व्यास केंद्र पर मिलेंगे।

साइकिल की चेन, पट्टे और घिरनी स्पर्श रेखा पर चलते हैं। जहाँ पट्टा पहिए को छोड़ता है, वहाँ त्रिज्या पट्टे पर लंब होती है, और इंजीनियर पट्टे की लंबाई निकालने में स्पर्श रेखा की लंबाई का सूत्र लगाते हैं।

सड़क और रेल की मोड़ जीवा और उसके मध्य-बिंदु से चाप की ऊँचाई मापकर बनाई जाती है; OM² + AM² = r² से त्रिज्या निकलती है। सिनेमा हॉल की सीटें यदि परदे के सिरों से होकर जाते चाप पर हों, तो हर दर्शक को परदा एक ही कोण पर दिखता है।

परीक्षा कॉर्नर: CBSE बोर्ड, JEE और प्रतियोगी परीक्षाएँ

NCERT कक्षा 9 का अध्याय “वृत्त” जीवाओं, केंद्र और परिधि पर कोणों, एक ही वृत्तखंड के कोणों और चक्रीय चतुर्भुज पर है, और कक्षा 10 का अध्याय “वृत्त” स्पर्श रेखा पर। CBSE कक्षा 10 बोर्ड में स्पर्श रेखा वाले दोनों प्रमेय (10.1 और 10.2) की उपपत्ति अक्सर 3 अंक के प्रश्न में आती है, और उनके प्रयोग वाले प्रश्न MCQ और केस-स्टडी में। पाठ्यक्रम हर वर्ष थोड़ा बदलता है, इसलिए CBSE की वर्तमान सिलेबस फ़ाइल से मिलान कर लीजिए।

JEE Main और Advanced में ये प्रमेय सीधे नहीं पूछे जाते, पर निर्देशांक ज्यामिति में वृत्त, स्पर्श रेखा की लंबाई √(S₁), “केंद्र से स्पर्श रेखा की दूरी = त्रिज्या” और चक्रीय बिंदुओं वाले सवाल इन्हीं पर टिके हैं। NTSE, गणित ओलंपियाड और कई राज्य बोर्डों में एकांतर वृत्तखंड प्रमेय भी आता है। NEET में गणित नहीं है, पर भौतिकी में वृत्तीय गति और प्रकाशिकी के चित्रों में ये कोण-नियम काम आते हैं।

  • उपपत्ति में दिया है, सिद्ध करना है, रचना और उपपत्ति चारों शीर्षक अलग-अलग लिखिए, और हर पंक्ति के आगे कोष्ठक में कारण।
  • चित्र में सबसे पहले सभी त्रिज्याओं पर बराबरी का निशान लगाइए; लगभग हर प्रश्न में समद्विबाहु त्रिभुज छिपा होता है।
  • व्यास दिखे तो तुरंत समकोण लिखिए; चार बिंदु वृत्त पर दिखें तो चक्रीय चतुर्भुज।
  • स्पर्श रेखा दिखे तो स्पर्श बिंदु पर 90° का निशान लगाइए।
  • दो संभावित उत्तर हों (जैसे समांतर जीवाएँ एक ओर या विपरीत ओर), तो दोनों लिखिए।

एक स्क्रीन में पूरा रिवीजन

परीक्षा से पहली रात बस यह तालिका देख लीजिए। हर पंक्ति सिमुलेशन के एक मोड से मेल खाती है।

प्रमेयसंबंधउपपत्ति की कुंजी
केंद्र और परिधि के कोण∠AOB = 2∠ACBसमद्विबाहु त्रिभुज और बहिष्कोण
एक ही वृत्तखंड∠ACB = ∠ADBदोनों ½∠AOB
अर्धवृत्त में कोण∠ACB = 90°∠AOB = 180°
चक्रीय चतुर्भुज∠A + ∠C = ∠B + ∠D = 180°दोनों केंद्रीय कोणों का योग 360°
बहिष्कोण∠DCE = ∠A∠C का संपूरक
जीवा पर लंबAM = MB, OM² + AM² = r²RHS सर्वांगसमता
स्पर्श रेखा और त्रिज्याOT ⟂ PTसबसे छोटी दूरी लंब दूरी
दो स्पर्श रेखाएँPA = PB = √(d² − r²)RHS सर्वांगसमता
एकांतर वृत्तखंड∠BAT = ∠ACBव्यास AA′ और अर्धवृत्त में कोण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वृत्त के मुख्य प्रमेय कौन-से हैं?

केंद्र से जीवा पर लंब जीवा को समद्विभाजित करता है, बराबर जीवाएँ केंद्र से समान दूरी पर होती हैं, केंद्र पर कोण परिधि पर कोण का दुगुना होता है, एक ही वृत्तखंड के कोण बराबर होते हैं, अर्धवृत्त में कोण समकोण होता है, चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का योग 180° होता है, और स्पर्श रेखा वाले दो प्रमेय।

केंद्र पर अंतरित कोण और परिधि पर अंतरित कोण में क्या अंतर है?

केंद्र पर अंतरित कोण का शीर्ष केंद्र पर होता है और भुजाएँ त्रिज्याएँ होती हैं। परिधि पर अंतरित कोण का शीर्ष वृत्त पर होता है और भुजाएँ जीवाएँ। एक ही चाप पर केंद्र वाला कोण परिधि वाले का दुगुना होता है।

अर्धवृत्त में बना कोण कितना होता है?

हमेशा 90°। व्यास केंद्र पर 180° का कोण बनाता है और परिधि पर कोण उसका आधा होता है।

चक्रीय चतुर्भुज किसे कहते हैं?

जिस चतुर्भुज के चारों शीर्ष एक ही वृत्त पर हों, उसे चक्रीय चतुर्भुज कहते हैं। इसके सम्मुख कोणों का योग 180° होता है और बहिष्कोण अंतःसम्मुख कोण के बराबर होता है।

जीवा की लंबाई कैसे निकालें?

यदि त्रिज्या r है और जीवा केंद्र से d दूरी पर है, तो जीवा की लंबाई 2√(r² − d²) होती है, क्योंकि केंद्र से लंब जीवा को आधा करता है और त्रिज्या के साथ समकोण त्रिभुज बनाता है।

बाह्य बिंदु से स्पर्श रेखा की लंबाई का सूत्र क्या है?

यदि बिंदु केंद्र से d दूरी पर है और त्रिज्या r है, तो स्पर्श रेखा की लंबाई √(d² − r²) है, क्योंकि स्पर्श बिंदु पर त्रिज्या स्पर्श रेखा पर लंब होती है।

स्पर्श रेखा और छेदक रेखा में क्या अंतर है?

स्पर्श रेखा वृत्त को केवल एक बिंदु पर छूती है, छेदक रेखा दो बिंदुओं पर काटती है। छेदक के दोनों प्रतिच्छेद बिंदु पास आते-आते मिल जाएँ तो वह स्पर्श रेखा बन जाती है।

एक बाह्य बिंदु से वृत्त पर कितनी स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं?

ठीक दो, और दोनों की लंबाई बराबर होती है। वृत्त के अंदर के बिंदु से कोई नहीं, और वृत्त पर के बिंदु से केवल एक।

एकांतर वृत्तखंड प्रमेय क्या है?

वृत्त के किसी बिंदु पर स्पर्श रेखा और उसी बिंदु से खींची जीवा के बीच का कोण, जीवा के दूसरी ओर वाले वृत्तखंड में बने कोण के बराबर होता है।

कौन-से चतुर्भुज हमेशा चक्रीय होते हैं?

आयत (वर्ग सहित) और समद्विबाहु समलंब हमेशा चक्रीय होते हैं। समांतर चतुर्भुज तभी चक्रीय है जब वह आयत हो, और समचतुर्भुज तभी जब वह वर्ग हो।

इस विषय पर और पढ़ाई

एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।

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