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समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी: बार खिसकाएँ, सूत्र समझें

एक निश्चित नियम से बनी संख्याओं की सूची को श्रेढ़ी कहते हैं, और उसके पदों को जोड़ने पर जो मिलता है उसे श्रेणी कहते हैं। समांतर श्रेढ़ी (AP) में हर पद पिछले पद में एक स्थिर संख्या d जोड़कर बनता है, जबकि गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में हर पद पिछले पद को एक स्थिर संख्या r से गुणा करके बनता है।

हर पद पिछले से d अधिक है, इसलिए बार सीधी रेखा की दर से बढ़ते-घटते हैं

पद, Tᵢआंशिक योग, Sᵢ
गति

नियंत्रण

श्रेढ़ी का प्रकार

2
3
6

मापन

nवाँ पद, Tₙ
17.0
पहला + अंतिम पद, a + l
19.0
पहले n पदों का योग, Sₙ
57.0

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. पहले AP मोड में पहला पद a और सार्व अंतर d खिसकाएँ: बार सीधी रेखा की स्थिर दर से बढ़ते या घटते दिखेंगे।
  2. “गाउस की जोड़ी बनाने वाली तकनीक दिखाएँ” चुनें: हर बार पर दूसरे सिरे से आया एक बार ढँक जाता है, और अंत में सभी बार समान ऊँचाई पर पहुँचकर एक आयत बना लेते हैं।
  3. दाईं ओर की आंशिक-योग वाली रेखा देखें: AP मोड में यह परिवृत्त की तरह लगातार ऊपर की ओर मुड़ती है, कभी सपाट नहीं होती।
  4. अब GP मोड में जाएँ और सार्व अनुपात r को ०.५ की ओर खिसकाएँ: दाईं वाली रेखा एक स्थिर रेखा S∞ के पास जाकर सपाट हो जाती है।
  5. r को 1 से अधिक या −1 से कम कर दें: बार बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं और योग-रेखा कभी सपाट नहीं होती, और “श्रेढ़ी का व्यवहार” रीडिंग अभिसारी से अपसारी में बदल जाती है।

जेब खर्च की बचत और फैलती हुई खबर

मान लो तुम हर हफ़्ते अपने टिफ़िन के पैसों में से कुछ बचाते हो। पहले हफ़्ते ₂ बचाए, और उसके बाद हर हफ़्ते पिछले हफ़्ते से ₃ ज़्यादा बचाए: दूसरे हफ़्ते ₅, तीसरे हफ़्ते ₈, इसी तरह। यह संख्याएँ ₂, ₅, ₈, ११, १४, १७ एक समांतर श्रेढ़ी बनाती हैं, क्योंकि किसी भी पद से पिछला पद घटाने पर हमेशा एक ही संख्या, ₃, मिलती है। छह हफ़्तों बाद कुल कितना बचा, यही इस पेज का पहला सवाल है।

अब कहानी उलट दो। एक मज़ेदार खबर पहले दिन २ लोगों को बताई गई। अगले दिन उन दोनों ने एक-एक और व्यक्ति को बताया, और उसके अगले दिन वे नए सुनने वाले भी एक-एक को बताते हैं — यानी हर दिन नए सुनने वालों की संख्या पिछले दिन की संख्या के बराबर है, यानी दोगुनी होती जाती है: २, ४, ८, १६, ३२। यह एक गुणोत्तर श्रेढ़ी है, क्योंकि किसी भी पद को पिछले पद से भाग देने पर हमेशा एक ही संख्या, २, मिलती है। कुछ ही दिनों में सुनने वालों की संख्या लाखों में पहुँच सकती है, जबकि शुरुआत बहुत छोटी थी।

दोनों कहानियाँ एक ही दो सवाल पूछती हैं: हर कदम पर कितनी बढ़ोतरी हुई, और सारे कदम मिलाकर कुल कितना हुआ? पहले सवाल का जवाब देता है "n-वाँ पद" सूत्र, दूसरे का जवाब देता है "योग" सूत्र। ऊपर के सिमुलेशन में दोनों मोड में बार-चार्ट और योग-रेखा एक साथ बदलते दिखेंगे।

शुरुआत से: श्रेढ़ी और श्रेणी क्या होती है

एक निश्चित नियम से बनी संख्याओं की क्रमबद्ध सूची को श्रेढ़ी (sequence) कहते हैं; सूची की हर संख्या को पद (term) कहा जाता है। पहले पद को a और n-वें पद को Tₙ लिखा जाता है। श्रेढ़ी के पदों को जोड़ने पर जो मिलता है उसे श्रेणी या श्रेढ़ी-योग (series) कहते हैं, और पहले n पदों के योग को Sₙ लिखा जाता है।

समांतर श्रेढ़ी (Arithmetic Progression, संक्षेप में AP) में लगातार दो पदों का अंतर हमेशा स्थिर रहता है; इस स्थिर अंतर को सार्व अंतर, प्रतीक d, कहते हैं। यानी Tₙ − Tₙ₋₁ = d हर n के लिए। ऊपर बचत के उदाहरण में a = २, d = ३।

गुणोत्तर श्रेढ़ी (Geometric Progression, संक्षेप में GP) में लगातार दो पदों का अनुपात हमेशा स्थिर रहता है; इस स्थिर अनुपात को सार्व अनुपात, प्रतीक r, कहते हैं। यानी Tₙ ÷ Tₙ₋₁ = r हर n के लिए। खबर वाले उदाहरण में a = २, r = २।

दोनों श्रेढ़ियाँ एक ही ढाँचे पर बनी हैं: हर पद पिछले पद से एक तय नियम से बनता है, बस AP में नियम है "जोड़ो" और GP में नियम है "गुणा करो"। यही एक अंतर बाकी सारे अंतरों की जड़ है — सीधी रेखा जैसी बढ़त बनाम तेज़ी से बढ़त, और योग का न थमना बनाम थम जाना।

ज़रूरी शब्द

सूत्रों से पहले शब्दावली स्पष्ट कर लें; परीक्षा के परिभाषा वाले सवाल यहीं से आते हैं।

शब्दप्रतीकसरल भाषा में अर्थ
पदTₙ या aₙश्रेढ़ी की एक संख्या, उसकी स्थिति n से पहचानी जाती है
पहला पदa या T₁श्रेढ़ी की सबसे पहली संख्या
सार्व अंतरdसमांतर श्रेढ़ी में लगातार दो पदों का स्थिर अंतर
सार्व अनुपातrगुणोत्तर श्रेढ़ी में लगातार दो पदों का स्थिर अनुपात
पदों की संख्याnकितने पद लिए गए हैं
अंतिम पदl या Tₙवह n-वाँ पद जहाँ गणना रुकती है
आंशिक योगSₙपहले n पदों का योग
अनंत श्रेढ़ी का योगS∞पदों की संख्या अनंत मानने पर योग जिस सीमा के पास पहुँचता है

छोटे गाउस और दस सेकंड का जवाब

जर्मन गणितज्ञ कार्ल फ्रीडरिख गाउस (१७७७–१८५५) की एक प्रसिद्ध कहानी है। स्कूल में एक बार शिक्षक ने कक्षा को व्यस्त रखने के लिए १ से 100 तक की सभी संख्याएँ जोड़ने को कहा। जब बाकी बच्चे एक-एक करके जोड़ रहे थे, गाउस ने कुछ ही सेकंडों में जवाब लिख दिया।

उनकी तकनीक सरल पर सुंदर थी: उन्होंने संख्याओं को दो सिरों से जोड़ियों में बाँटा — पहली और आख़िरी, दूसरी और आख़िर से दूसरी — १ + 100 = 101, २ + ९९ = 101, इसी तरह। हर जोड़ी का योग बराबर है, 101, और ऐसी 50 जोड़ियाँ हैं। इसलिए कुल योग = 50 × 101 = 5,050।

यही तकनीक किसी भी समांतर श्रेढ़ी पर काम करती है, क्योंकि AP में पहले और अंतिम पद का योग, दूसरे और अंतिम से पहले पद के योग के बराबर होता है, और यह हर जोड़ी के लिए सच है। ऊपर सिमुलेशन में "गाउस की जोड़ी बनाने वाली तकनीक दिखाएँ" चुनने पर यही दृश्य एनिमेशन में दिखता है: हर बार अपने दर्पण-साथी से ढँककर बराबर ऊँचाई पर पहुँच जाता है।

समांतर श्रेढ़ी के सूत्र: n-वाँ पद और योग

परिभाषा से ही सूत्र निकल आता है। पहले पद में d कितनी बार जुड़ा, यही n-वें पद को तय करता है।

Tₙ = a + (n − 1)dn-वाँ पद पाने के लिए a में ठीक (n − 1) बार d जोड़ें

Sₙ = n/2 × [2a + (n − 1)d]पदों की संख्या गुणा पहले-आख़िरी पद का औसत

Sₙ = n/2 × (a + l)l = अंतिम पद = Tₙ जानने पर यह रूप भी बराबर काम करता है

Tₙ = a + (n − 1)d क्यों

पहले पद से दूसरे पद तक जाने में d एक बार जुड़ता है (T₂ = a + d)। तीसरे पद तक जाने में एक बार फिर (T₃ = a + 2d)। n-वें पद तक पहुँचने में d ठीक (n − 1) बार जुड़ता है, क्योंकि पहले पद से n-वें पद के बीच (n − 1) कदम ही होते हैं।

Sₙ = n/2 × (a + l) क्यों: गाउस का आयत

श्रेढ़ी को एक बार सीधा और एक बार उलटा लिखें, फिर दोनों को जोड़ें। सीधी सूची के i-वें पद और उलटी सूची के i-वें पद का योग हर जगह (a + l) देता है, क्योंकि एक दिशा में जितना बढ़ा है, दूसरी दिशा में ठीक उतना ही घटा है। ऐसी n स्थितियाँ हैं, इसलिए 2Sₙ = n(a + l), यानी Sₙ = n(a + l)/2।

उदाहरण में (a = 2, d = 3, n = 6): अंतिम पद l = Tₙ = 17। जोड़ी का योग a + l = 19, इसलिए Sₙ = 6 × 19 ÷ 2 = 57।

गुणोत्तर श्रेढ़ी के सूत्र: n-वाँ पद, सांत योग और अनंत योग

हर कदम पर जोड़ने के बजाय गुणा करने से सूत्र का रूप बदल जाता है।

Tₙ = a rⁿ⁻¹n-वाँ पद पाने के लिए a को ठीक (n − 1) बार r से गुणा करें

Sₙ = a(rⁿ − 1) / (r − 1)जब r ≠ 1; r = 1 होने पर Sₙ = na

S∞ = a / (1 − r)केवल |r| < 1 होने पर परिभाषित

Tₙ = a rⁿ⁻¹ क्यों

पहले पद से दूसरे पद तक जाने में r एक बार गुणा होता है (T₂ = ar)। तीसरे पद तक जाने में फिर एक बार (T₃ = ar²)। n-वें पद तक पहुँचने में r ठीक (n − 1) बार गुणा होता है, उसी तर्क से जो AP में d पर लागू हुआ था।

Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1) क्यों: गुणा करके घटाने की तकनीक

Sₙ = a + ar + ar² + … + arⁿ⁻¹ लिखें। दोनों पक्षों को r से गुणा करें: rSₙ = ar + ar² + … + arⁿ। अब rSₙ से Sₙ घटाएँ: बीच के सभी पद कट जाते हैं, बचता है rSₙ − Sₙ = arⁿ − a। बाईं ओर (r − 1)Sₙ है, इसलिए Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1)।

उदाहरण में (a = 2, r = 0.5, n = 6): Sₙ = 2(0.5⁶ − 1) ÷ (0.5 − 1) = 3.9375। ध्यान दें, यह पहले ही 4 के बहुत पास है — यही अगले अनंत योग का संकेत है।

n को अनंत तक ले जाने पर: S∞ = a/(1 − r)

जब |r| < 1 हो, तो n बढ़ने पर rⁿ शून्य के पास सिमटता जाता है, क्योंकि 1 से छोटी संख्या को बार-बार अपने से गुणा करने पर वह और छोटी होती जाती है। Sₙ = a(rⁿ − 1)/(r − 1) में rⁿ की जगह शून्य रखने पर मिलता है S∞ = a(0 − 1)/(r − 1) = −a/(r − 1) = a/(1 − r)।

यहाँ r = 0.5 है, इसलिए |r| < 1, और S∞ = 2/(1 − 0.5) = 4। n = 6 तक योग पहले से ही 3.9375 था, जो 4 के बहुत पास है; और पद लेने पर यह 4 के और पास जाएगा, पर कभी उसे पार नहीं करेगा।

जब |r| ≥ 1 हो, तो rⁿ कभी शून्य के पास नहीं जाता — या तो स्थिर रहता है (r = 1) या बढ़ता है (|r| > 1) — इसलिए n बढ़ने पर Sₙ भी असीमित रूप से बढ़ता रहता है, किसी सीमा के पास नहीं थमता। इसे अपसारी श्रेढ़ी कहते हैं।

समांतर बनाम गुणोत्तर: अंतर एक नज़र में

दोनों श्रेढ़ियों का व्यवहार इतना अलग है कि एक साथ सारणी में रखने पर अंतर साफ़ दिखता है।

विशेषतासमांतर श्रेढ़ी (AP)गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP)
अगला पद कैसे मिलता हैपिछले पद में d जोड़करपिछले पद को r से गुणा करके
बढ़ोतरी का प्रकाररैखिक (स्थिर दर से बढ़ना/घटना)चरघातांकी (बहुत तेज़ बढ़ना/घटना)
n-वाँ पदTₙ = a + (n−1)dTₙ = a rⁿ⁻¹
योग Sₙn/2 × (a+l)a(rⁿ−1)/(r−1)
n → अनंत होने पर योगहमेशा असीमित बढ़ता है|r|<1 हो तो a/(1−r) पर थमता है, नहीं तो असीमित बढ़ता है
वास्तविक उदाहरणबराबर किस्तों में ऋण चुकाना, हर पंक्ति में बराबर अतिरिक्त कुर्सियाँबैंक का चक्रवृद्धि ब्याज, वायरस का फैलना, रेडियोऐक्टिव क्षय

सिमुलेशन में स्वयं करके देखें

हर प्रयोग से पहले अनुमान लगाएँ, फिर सिमुलेशन चलाकर मिलाएँ।

  • AP मोड में d = 0 करें: सभी पद बराबर हो जाते हैं, बार-चार्ट एक सपाट रेखा जैसा दिखता है, और Sₙ = na बन जाता है।
  • AP मोड में d को ऋणात्मक करें (जैसे −3): पद घटते-घटते ऋणात्मक हो जाते हैं, और बार शून्य से नीचे चले जाते हैं।
  • गाउस की तकनीक चालू करके n विषम और सम दोनों तरह से आज़माएँ: n विषम होने पर बीच वाला बार अपने आप से जोड़ी बनाता है, फिर भी उसकी ऊँचाई ठीक a+l की आधी रहती है।
  • GP मोड में r = −0.5 करें: पद बारी-बारी धनात्मक-ऋणात्मक होते हैं, फिर भी |r| < 1 होने के कारण योग एक सीमा पर थमता है।
  • GP मोड में n धीरे-धीरे बढ़ाएँ: r = 2 पर बार इतनी तेज़ी से बढ़ते हैं कि स्केल बार-बार बदलता है, जबकि r = 0.5 पर बार इतनी तेज़ी से सिकुड़ते हैं कि कुछ पदों बाद दिखना ही मुश्किल हो जाता है।

हल किए गए उदाहरण

हर हल में पहले ज्ञात राशियाँ, फिर सूत्र, फिर मान रखना — परीक्षा में इस क्रम से लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं।

उदाहरण 1: सिमुलेशन का डिफ़ॉल्ट AP (a = 2, d = 3, n = 6)

Tₙ = a + (n−1)d = 2 + (6−1) × 3 = 2 + 5 × 3 = 17। Sₙ = n/2 × (a+l) = 6/2 × (2+17) = 3 × 19 = 57। सिमुलेशन खोलते ही रीडिंग पैनल में यही मान दिखते हैं।

उदाहरण 2: गाउस की तकनीक से 1 से 100 तक का योग

यहाँ a = 1, d = 1, n = 100। Sₙ = n/2 × (a+l) = 100/2 × (1+100) = 50 × 101 = 5,050। यही गाउस का दस सेकंड वाला जवाब है।

उदाहरण 3: नई AP 5, 8, 11, … का 10वाँ पद और योग

यहाँ a = 5, d = 3, n = 10। T₁₀ = 5 + (10−1) × 3 = 5 + 9 × 3 = 32। S₁₀ = 10/2 × (5+32) = 5 × 37 = 185।

उदाहरण 4: कितने पद लेने पर योग 210 होगा?

श्रेढ़ी 3, 7, 11, … जहाँ a = 3, d = 4। Sₙ = n/2 × [2a+(n−1)d] को 210 के बराबर रखकर मिले द्विघात समीकरण को हल करने पर n = 10 मिलता है। जाँच: T₁₀ = 3 + 9×4 = 39, और S₁₀ = 10/2 × (3+39) = 5 × 42 = 210, जो मेल खाता है।

उदाहरण 5: सिमुलेशन का डिफ़ॉल्ट GP (a = 2, r = 0.5, n = 6)

Tₙ = a rⁿ⁻¹ = 2 × 0.5⁵ = 0.0625। Sₙ = a(rⁿ−1)/(r−1) = 3.9375। और S∞ = a/(1−r) = 2/0.5 = 4। यहाँ भी रीडिंग पैनल का मान पूरी तरह मेल खाता है।

उदाहरण 6: शतरंज की बिसात और दोगुने होते दाने

पुरानी कहानी में शतरंज की बिसात के पहले घर में 1 दाना, और हर अगले घर में पिछले से दोगुना। यह a = 1, r = 2 वाली एक GP है। पहले 10 घरों का योग S₁₀ = a(rⁿ−1)/(r−1) = 1 × (2¹⁰−1)/(2−1) = 1,023 है, और दसवें घर में अकेले T₁₀ = a rⁿ⁻¹ = 2⁹ = 512 दाने हैं। पूरी 64 घरों तक ले जाने पर यह संख्या दुनिया की पूरी गेहूँ उपज से भी बड़ी हो जाती है — यही चरघातांकी बढ़ोतरी की ताक़त है।

उदाहरण 7: आवर्ती दशमलव असल में एक अनंत GP है

0.333… को तोड़ने पर मिलता है 0.3 + 0.03 + 0.003 + …, जहाँ a = 0.3, r = 0.1। |r| < 1 होने के कारण S∞ = a/(1−r) = 0.3/0.9 = 0.333…, जो ठीक 1/3 के बराबर है। इस तरह अनंत श्रेढ़ी का सूत्र साबित करता है कि 0.333… एक सटीक संख्या है, अनुमान नहीं।

एक नज़र में: सिमुलेशन के डिफ़ॉल्ट मान पर AP और GP की तुलना

n बढ़ने पर AP का Sₙ रैखिक रूप से कैसे बढ़ता है और GP का Sₙ 4 के पास कैसे थम जाता है, यह सारणी में स्पष्ट है।

nAP Tₙ (a=2, d=3)AP SₙGP Tₙ (a=2, r=0.5)GP Sₙ
1222.00002.0000
2571.00003.0000
38150.50003.5000
411260.25003.7500
514400.12503.8750
617570.06253.9375

वे गलतियाँ जो सब करते हैं

इन गलतियों से बचने पर श्रेढ़ी और श्रेणी के सवालों में अंक कटने का डर नहीं रहता।

  • Tₙ में d ठीक (n−1) बार जुड़ता है, n बार नहीं — पहले पद से गिनती शुरू करने पर बीच में केवल (n−1) कदम होते हैं।
  • GP के सूत्र में r = 1 रखकर भाग देना। r = 1 होने पर हर शून्य हो जाता है, तब सीधे Sₙ = na का उपयोग करना चाहिए।
  • |r| ≥ 1 होने पर भी S∞ का सूत्र लगा देना। अनंत योग का सूत्र केवल |r| < 1 पर परिभाषित है, अन्यथा श्रेढ़ी अपसारी होती है।
  • सार्व अंतर और सार्व अनुपात को गड़बड़ करना: d घटाकर निकलता है, r भाग देकर निकलता है।
  • श्रेढ़ी और श्रेणी को एक ही चीज़ समझना। श्रेढ़ी पदों की सूची है, श्रेणी उनका योग है।
  • Sₙ और Tₙ को गड़बड़ करना — Tₙ एक निश्चित पद है, Sₙ पहले n पदों का कुल योग है; दोनों अलग-अलग राशियाँ हैं।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में श्रेढ़ी और श्रेणी

ये सूत्र परीक्षा की कॉपी के बाहर भी बहुत जगह काम करते हैं।

  • बराबर किस्तों में ऋण या किराया चुकाना: हर महीने अगर किस्त एक ही मात्रा से बढ़े या घटे, तो यह एक समांतर श्रेढ़ी है।
  • बैंक का चक्रवृद्धि ब्याज: हर साल जमा राशि पर एक ही दर से ब्याज जुड़कर अगले साल की मूल राशि बनती है, यह एक गुणोत्तर श्रेढ़ी है।
  • वायरस या किसी जानकारी का फैलना: अगर हर व्यक्ति औसतन r लोगों को संक्रमित करता है, तो कुल संक्रमित लोगों की संख्या गुणोत्तर श्रेढ़ी में बढ़ती है।
  • रेडियोऐक्टिव क्षय या खून में दवा का घटना: हर बराबर समय-अंतराल में एक स्थिर हिस्सा घट जाना (अर्ध-आयु) एक गुणोत्तर श्रेढ़ी का उदाहरण है, जहाँ r आधा होता है।
  • स्टेडियम की पंक्तियाँ सजाना: अगर हर पंक्ति में पिछली पंक्ति से एक तय संख्या में अधिक कुर्सियाँ हों, तो कुल कुर्सियाँ समांतर श्रेढ़ी के सूत्र से गिनी जा सकती हैं।
  • उछलती हुई गेंद: अगर हर बार गेंद पिछली ऊँचाई के एक तय अंश तक उछले, तो गेंद द्वारा तय की गई कुल दूरी एक अनंत गुणोत्तर श्रेढ़ी से निकलती है।

परीक्षा कॉर्नर: CBSE बोर्ड और JEE-NEET

NCERT की कक्षा 10 में समांतर श्रेढ़ी (Arithmetic Progressions) और कक्षा 11 में गुणोत्तर श्रेढ़ी व अनंत श्रेढ़ी पढ़ाई जाती है। CBSE बोर्ड में n-वाँ पद, योग और शर्त वाले सवाल नियमित आते हैं; JEE और NEET में इन्हें अक्सर द्विघात समीकरण या असमिकाओं के साथ मिलाकर पूछा जाता है, तो सूत्र के साथ-साथ शर्त (जैसे |r|<1) याद रखना ज़रूरी है।

एक नमूना परीक्षा प्रश्न

प्रश्न: पहली श्रेढ़ी का पहला पद 2 और सार्व अंतर 3 है। दूसरी श्रेढ़ी का पहला पद 2 और सार्व अनुपात 0.5 है। (क) सार्व अनुपात की परिभाषा दें। (ख) पहली श्रेढ़ी का 6वाँ पद ज्ञात करें। (ग) दूसरी श्रेढ़ी के पहले 6 पदों का योग ज्ञात करें। (घ) क्या यह सच है कि दूसरी श्रेढ़ी का अनंत तक योग एक सांत संख्या है? कारण दें।

(ग) का हल: Sₙ = a(rⁿ−1)/(r−1) से S₆ = 3.9375। (घ) का मूल तर्क: r = 0.5 और |r| < 1 होने के कारण श्रेढ़ी अभिसारी है, इसलिए S∞ = a/(1−r) = 4 एक सांत संख्या है — कथन सत्य है।

रिवीज़न: एक स्क्रीन का सारांश

परीक्षा से पहले की रात केवल यह सूची और ऊपर की तुलना सारणी देख लेना काफ़ी है।

  • AP: अगला पद = पिछला पद + d। GP: अगला पद = पिछला पद × r।
  • Tₙ(AP) = a + (n−1)d। Tₙ(GP) = a rⁿ⁻¹।
  • Sₙ(AP) = n/2 × (a+l) — गाउस के आयत से निकला सूत्र।
  • Sₙ(GP) = a(rⁿ−1)/(r−1), जब r ≠ 1; r = 1 होने पर Sₙ = na।
  • S∞(GP) = a/(1−r), केवल |r| < 1 पर; अन्यथा श्रेढ़ी अपसारी है।
  • AP स्थिर दर से बढ़ती/घटती है, GP चरघातांकी दर से — यही दोनों श्रेढ़ियों के बाकी सभी अंतरों की जड़ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समांतर श्रेढ़ी और गुणोत्तर श्रेढ़ी में क्या अंतर है?

समांतर श्रेढ़ी (AP) में लगातार दो पदों का अंतर स्थिर होता है (सार्व अंतर, d); गुणोत्तर श्रेढ़ी (GP) में लगातार दो पदों का अनुपात स्थिर होता है (सार्व अनुपात, r)। AP स्थिर दर से बढ़ती/घटती है, GP चरघातांकी दर से।

समांतर श्रेढ़ी के n-वें पद और योग का सूत्र क्या है?

n-वाँ पद Tₙ = a + (n−1)d है और पहले n पदों का योग Sₙ = n/2 × [2a + (n−1)d] = n/2 × (a+l), जहाँ l अंतिम पद है। उदाहरण में a=2, d=3, n=6 लेने पर Tₙ=17 और Sₙ=57 मिलता है।

गुणोत्तर श्रेढ़ी का योग सूत्र क्या है?

n-वाँ पद Tₙ = a rⁿ⁻¹ है और पहले n पदों का योग Sₙ = a(rⁿ−1)/(r−1), जब r ≠ 1। r = 1 होने पर सभी पद बराबर हो जाते हैं, इसलिए Sₙ = na होता है।

अनंत श्रेढ़ी का योग सूत्र क्या है और यह कब लागू होता है?

अनंत गुणोत्तर श्रेढ़ी का योग S∞ = a/(1−r) होता है, लेकिन यह केवल |r| < 1 होने पर ही परिभाषित है। |r| ≥ 1 होने पर पद शून्य की ओर नहीं सिमटते, इसलिए योग किसी सीमा के पास नहीं थमता — इसे अपसारी श्रेढ़ी कहते हैं।

सार्व अंतर और सार्व अनुपात कैसे निकालें?

किसी भी पद से उसके ठीक पहले वाला पद घटाने पर सार्व अंतर मिलता है, d = Tₙ − Tₙ₋₁। किसी भी पद को उसके ठीक पहले वाले पद से भाग देने पर सार्व अनुपात मिलता है, r = Tₙ ÷ Tₙ₋₁।

गाउस की जोड़ी बनाने वाली तकनीक क्या है?

पहले पद को अंतिम पद के साथ, दूसरे पद को अंतिम से पहले वाले पद के साथ जोड़ी बनाने पर हर जोड़ी का योग बराबर (a+l) मिलता है। n/2 ऐसी जोड़ियाँ होने से कुल योग n(a+l)/2 होता है। बालक गाउस ने 1 से 100 तक जोड़ने के लिए ठीक यही तकनीक इस्तेमाल की थी और सेकंडों में 5,050 पा लिया था।

यह कैसे पता करें कि कोई श्रेढ़ी अभिसारी है या अपसारी?

समांतर श्रेढ़ी (जब d ≠ 0) हमेशा अपसारी होती है, क्योंकि इसके पद असीमित रूप से बढ़ते या घटते रहते हैं। गुणोत्तर श्रेढ़ी केवल तभी अभिसारी होती है जब सार्व अनुपात का परिमाण 1 से कम हो, यानी |r| < 1।

क्या 0.333… वास्तव में ठीक 1/3 के बराबर है?

हाँ। 0.333… को 0.3 + 0.03 + 0.003 + … के रूप में लिखने पर यह a=0.3, r=0.1 वाली एक अनंत गुणोत्तर श्रेढ़ी बनती है। इसका अनंत योग S∞ = a/(1−r) = 0.3/0.9 = 1/3 ठीक-ठीक है, कोई अनुमान नहीं।

शतरंज की बिसात वाली कहानी में संख्या इतनी बड़ी क्यों हो जाती है?

हर घर में पिछले घर से दोगुने दाने रखना r=2 वाली एक गुणोत्तर श्रेढ़ी है, जो चरघातांकी दर से बढ़ती है। पहले 10 घरों का योग ही एक हज़ार से अधिक हो जाता है; पूरे 64 घरों का योग दुनिया की पूरी गेहूँ उपज से भी बड़ा है, क्योंकि गुणोत्तर श्रेढ़ी समांतर श्रेढ़ी से कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ती है।

श्रेढ़ी और श्रेणी में क्या अंतर है?

श्रेढ़ी (sequence) एक नियम से बनी संख्याओं की क्रमबद्ध सूची है, जैसे 2, 5, 8, 11। इन पदों को जोड़ने पर, 2+5+8+11, जो मिलता है उसे श्रेणी या श्रेढ़ी-योग (series) कहते हैं।

इस विषय पर और पढ़ाई

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प्रायिकता किसे कहते हैं, प्रतिदर्श समष्टि और सूत्र P(E) = n(E)/n(S) कैसे काम करता है, और बार-बार उछालने पर प्रयोगसिद्ध दर सैद्धांतिक प्रायिकता के कितने पास आ जाती है — सिक्के, पासे और रंगीन गेंदों के इंटरैक्टिव सिमुलेशन में।

कक्षा 9 · 10

माध्य, माध्यिका और बहुलक

माध्य, माध्यिका और बहुलक निकालने के सूत्र, अपवाद (आउटलायर) मिलने पर माध्यिका क्यों नहीं बदलती जबकि माध्य बहुत बदल जाता है, और वर्गीकृत आँकड़ों की माध्यिका-बहुलक सूत्र: संख्या रेखा पर बिंदु खींचकर स्वयं देखें, हल किए गए उदाहरणों के साथ।

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